वीएम सिंह की दो टूक: चीनी मिल और सरकार कितने भी रोड़े अटकाए, ब्याज तो देना ही पड़ेगा, जीत किसान की ही होगी
वीएम सिंह ने कहा कि वह दिन दूर नहीं है जब चीनी मिलों के बीच 14 दिन की अवधि भुगतान की होड़ लगेगी। संगठन अदालत में लगातार पैरवी कर रहा है। सरकार और चीनी मिल आपस में मिले हुए हैं।
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राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह ने कहा कि चीनी मिलें और सरकार कितने भी रोड़े अटका ले, बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज तो देना ही पड़ेगा। जब मिलों पर ब्याज की जवाबदेही बनेगी तो समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान भी हो सकेगा।
वीएम सिंह तीस वर्ष से बकाया गन्ना मूल्य और ब्याज के सवाल पर लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अदालत के जरिए किसान न्याय हासिल कर रहे हैं। वह दिन दूर नहीं है जब चीनी मिलों के बीच 14 दिन की अवधि भुगतान की होड़ लगेगी। गन्ना क्रय अधिनियम में गन्ना क्रय करने के बाद 14 दिन की अवधि में भुगतान न करने पर 15 प्रतिशत ब्याज देने का प्रावधान है। उधर, मिलों को बैंकों से कम ब्याज पर ऋण मिलता है। ऐसी स्थिति में कोई भी चीनी मिल नहीं चाहेगी कि उसे अधिक ब्याज देना पड़े। उनका संगठन अदालत में लगातार पैरवी कर रहा है। सरकार और चीनी मिल आपस में मिले हुए हैं और इसी कारण किसी न किसी बहाने समय लेकर मामले को टालना चाहते हैं लेकिन अंततः किसान के हक में जीत होगी।
किसान नेता ने बताया कि गन्ना मूल्य पर ब्याज की लड़ाई 1994-95 में उनके द्वारा बुलंदशहर की अगौता चीनी मिल से शुरू की गई थी। तब चीनी मिल को 2.18 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान करना पड़ा था। वर्ष 2011 से 2014 के बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में प्रदेश सरकार ने 17 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। जिसमें गन्ना आयुक्त के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना याचिका पर रोक लगाने की गुहार की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक नहीं लगाई बल्कि सरकार को आठ सप्ताह की मोहलत दी थी। इसके बाद 9 मई की तारीख लगी थी लेकिन 9 मई को केस नहीं लग सका। अब अगली तिथि 18 मई है। वह बीमारी के बावजूद खुद केस की पैरवी कर रहे हैं।