सांसद वरुण गांधी बोले: यूपी में बीते पांच साल में 18 लाख से अधिक लोग नौकरी से हटाए गए
सांसद वरुण गांधी ने कहा कि पूरे देश में विभिन्न विभागों में एक करोड़ पद रिक्त हैं लेकिन उन्हें जानबूझ कर भरा नहीं जा रहा है। जो नौकरियां निकाली जाती हैं, उनके पेपर लीक हो जाते हैं। कहा कि बेरोजगार पांच-पांच बार आवेदन करते हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक हो जाता है। बार-बार आवेदन करने में बेरोजगार युवाओं का काफी पैसा भी खर्च हो रहा है और उन्हें नौकरी भी नहीं मिल पा रही है।
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पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी ने बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है। पीलीभीत के लोग हरियाणा और गुजरात में जाकर मजदूरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों में 18 लाख से अधिक लोगों को नौकरी से हटाया गया। इससे बेरोजगारी और बढ़ी है।
सांसद वरुण गांधी सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर जिले में पहुंचे थे। सांसद ने क्षेत्र के गांव अभय भगवंतपुर, सोरहा, मझगवां, रड़ेता, रोहनिया भूड़ा आदि गांवों में जनसंवाद कार्यक्रमों को संबोधित किया। साथ ही लोगों की समस्याएं सुनीं। सांसद ने कहा कि निजीकरण की वजह से यूपी के 18 लाख लोगों को पिछले पांच साल में नौकरी से हटाया गया है। यूपी पहले से ही बेरोजगारी की चपेट में था। अब इसमें 18 लाख लोगों का आंकड़ा और बढ़ गया है। है।
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सांसद ने कहा कि सरकारी नौकरी पहले आम आदमी के लिए एक मात्र नौकरी थी। आसानी से मिल जाती थी। जब से निजीकरण हुआ तब से नौकरी पाना तो दूर उसके बारे में सोचना भी कठिन लगता है। यही वजह है कि भारत दो बन गए हैं। एक भारत में लोग आसानी से दौड़ रहे हैं, लेकिन दूसरे भारत का भट्ठा बैठता जा रहा है।
'मात्र सात लाख लोगों को मिली नौकरी'
पिछले सात वर्षों में 28 करोड़ लोगों ने सरकारी नौकरी के लिए परीक्षाएं दीं, लेकिन नौकरी मात्र सात लाख लोगों को ही मिली। प्रत्येक वर्ष 15 लाख से अधिक इंजीनियर पढ़ाई कर निकलते हैं, लेकिन नौकरी मात्र 15 फीसदी लोगों को ही मिलती है। एक गांव का किसान कर्ज लेकर अपने बेटे को पढ़ाता है, लेकिन जब उसको नौकरी नहीं मिलती है तो सोचो उसके दिल पर क्या गुजरती होगी, जबकि आज के दौर में कर्ज लेकर पढ़ाई करना आसान नहीं है।