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Pilibhit News: बाढ़ और त्रासदी के संकट में नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग पीछे छूटी

Sun, 30 Aug 2026 01:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 01:53 AM IST
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The demand for a Hindu nation in Nepal has taken a back seat amidst the crisis of floods and tragedy.
पीलीभीत। नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बाढ़ की त्रासदी ने सीमावर्ती लोगों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। पीलीभीत जिले से सटे नेपाल के गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि इस समय सबसे बड़ा संकट बाढ़ का है। घर, रास्ते और खेत पानी से घिरे हैं। लोगों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान जुटाने के लिए भी मुश्किल रास्तों से होकर भारत आना पड़ रहा है। ऐसे में हिंदू राष्ट्र की मांग से ज्यादा जरूरी लोगों की जिंदगी बचाना और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना है। हालात सामान्य होने के बाद ही देश की व्यवस्था और हिंदू राष्ट्र जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं, भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी सक्रिय है।
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जिले से नेपाल की करीब 47 किलोमीटर लंबी खुली सीमा लगती है। कलीनगर व पूरनपुर तहसील क्षेत्र के माधोटांडा व हजारा थाना क्षेत्र में नेपाल सीमा लगती है। सीमा से सटे नेपाली गांवों के लोगों का भारतीय क्षेत्र में रोजाना आवागमन रहता है। सामान्य दिनों में नेपाली ग्रामीण बाइक और साइकिल से भारतीय बाजारों में पहुंचते हैं और खाद्य सामग्री समेत रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदकर वापस लौटते हैं, लेकिन इस समय बाढ़ और जलभराव के कारण छोटे संपर्क मार्गों पर पानी भर गया है। कई रास्तों पर बाइक और साइकिल ले जाना मुश्किल हो गया है। इसके चलते ग्रामीण पैदल ही भारतीय क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। संवाद
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अभी राजनीति नहीं, मदद को आगे आए प्रशासन

नेपाल सीमा से सटे गांव के रहने वाले अधम चंद ने बातचीत में कहा कि बाढ़ के कारण इस समय लोगों के सामने सबसे बड़ा संकट जीवन और खाने-पीने की चीजों का है। गांवों में रास्ते पानी से घिरे हैं। ऐसे में हिंदू राष्ट्र की मांग से पहले सरकार और प्रशासन को बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद करनी चाहिए। सपन कुमार ने बताया कि सीमा के इस पार भारतीय बाजारों से उनका पुराना जुड़ाव है। घर में जरूरत का सामान लेने के लिए वे अक्सर भारत आते हैं। पहले बाइक से आना-जाना आसान था, लेकिन बाढ़ के कारण रास्ते बंद या जलमग्न हैं। मजबूरी में पैदल आकर सामान खरीदना पड़ रहा है।
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ग्रामीण बिट्टू ने कहा कि नेपाल में हिंदू राष्ट्र को लेकर लोगों की अपनी-अपनी राय है, लेकिन बाढ़ ने सभी को एक बड़ी परेशानी के सामने खड़ा कर दिया है। गांवों में जिन परिवारों के घर और खेत पानी से प्रभावित हैं, उनके लिए अभी यही सबसे बड़ा मुद्दा है। उनका कहना था कि देश में किस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए, इस पर चर्चा बाद में भी हो सकती है, लेकिन संकट के समय लोगों को राहत मिलना जरूरी है।

एक महिला ग्रामीण ने बताया कि घर के लिए राशन, बच्चों के लिए जरूरी सामान और दवाएं लेने के लिए भारतीय बाजार आना पड़ता है। उनका कहना था कि हिंदू राष्ट्र या अन्य राजनीतिक मुद्दों पर बाद में बात हो सकती है। फिलहाल महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। संवाद
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हजारों परिवारों का भारतीय बाजारों से जुड़ाव
सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के मुताबिक, नेपाल के बड़ी संख्या में परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं। कलीनगर क्षेत्र के नौजल्हा नंबर दो गांव की बाजार में नेपाली नागरिकों का दशकों से आना-जाना रहता है। संबंध ऐसे कि साल भर उधारी में सामान देने का सिलसिला भी बना रहता है। यहां खाद्य सामग्री, कपड़े, दवा और घरेलू उपयोग का सामान लेने के लिए नेपाली ग्रामीण भारतीय क्षेत्र में आते हैं।


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सीमा पर सुरक्षा के बीच जारी है आवाजाही

सीमा क्षेत्र में सुरक्षा बलों की निगरानी बनी रहती है। जगह-जगह जवान सीमा की सुरक्षा संभाल रहे हैं और आने-जाने वालों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ के कारण छोटे रास्तों के प्रभावित होने के बावजूद सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। एसपी सुकीर्ति माधव ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी के अलावा पुलिस की नियमित निगरानी रहती है। बीहड़ रास्तों और घाट क्षेत्रों में भी पैनी नजर रखी जाती है। खुद भी समीक्षा की जाती है।
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