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Pilibhit News: शारदा की दो धाराएं बनीं मुसीबत, सीमा और गांवों पर खतरा
Wed, 16 Jul 2025 12:15 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Wed, 16 Jul 2025 12:15 AM IST
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कलीनगर। शारदा नदी ने एक बार फिर अपने प्रवाह की दिशा बदलते हुए रामनगर क्षेत्र में दोनों किनारों पर कटान तेज कर दिया है। नदी की दो धाराएं अब अलग-अलग दिशा में बह रही हैं।
एक अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बढ़ रही है, जबकि दूसरी गांवों के पास कटान कर रही है। इससे ग्रामीणों की कृषि भूमि खतरे में पड़ गई है और सीमा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ने का अंदेशा जताया जा रहा है।
शारदा नदी कलीनगर तहसील क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्र से जनपद सीमा में प्रवेश करती है। इसके बाद तहसील क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों की सीमा से होकर पूरनपुर तहसील क्षेत्र में पहुंच जाती है। कलीनगर क्षेत्र में नदी की चौड़ाई अधिक होने से ढाई लाख क्यूसेक से अधिक पानी आने पर ही बाढ़ के हालात बनते हैं, लेकिन इससे कम जलस्तर पर नदी कटान शुरू कर देती है। रमनगरा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बाढ़ के समय शारदा का जलस्तर बेहद तेजी से बढ़ता है। पहाड़ों से बहकर आने वाले भारी पेड़ व मलबा नदी की धार को और ज्यादा खतरनाक बना देता है।
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इस बार भी जब जलस्तर बढ़ा तो रामनगरा गांव निवासी सरदार बख्शीश सिंह के झाले से लेकर प्रभास के झाले तक दाहिने किनारे पर पानी का जबरदस्त दबाव देखा गया। खास बात यह है कि यहां एक हिस्से में मार्जिनल बांध नहीं है, इससे कटान की आशंका और बढ़ गई है।
गत वर्षों में नदी ने इसी क्षेत्र में एक धार्मिक स्थल और दर्जनों किसानों की उपजाऊ जमीन काट दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार भी अगर बाढ़ आती है, तो धुरिया, पलिया, पुरैना और महाराजपुर जैसे गांवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है। इसके पीछे वजह यह है कि नदी की चौड़ाई इस क्षेत्र में अत्यधिक बढ़ गई है और रेत के ढेरों के बीच से नदी दो धारा में बहकर कटान कर रही है।
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एक अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बढ़ रही है, जबकि दूसरी गांवों के पास कटान कर रही है। इससे ग्रामीणों की कृषि भूमि खतरे में पड़ गई है और सीमा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ने का अंदेशा जताया जा रहा है।
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शारदा नदी कलीनगर तहसील क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्र से जनपद सीमा में प्रवेश करती है। इसके बाद तहसील क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों की सीमा से होकर पूरनपुर तहसील क्षेत्र में पहुंच जाती है। कलीनगर क्षेत्र में नदी की चौड़ाई अधिक होने से ढाई लाख क्यूसेक से अधिक पानी आने पर ही बाढ़ के हालात बनते हैं, लेकिन इससे कम जलस्तर पर नदी कटान शुरू कर देती है। रमनगरा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बाढ़ के समय शारदा का जलस्तर बेहद तेजी से बढ़ता है। पहाड़ों से बहकर आने वाले भारी पेड़ व मलबा नदी की धार को और ज्यादा खतरनाक बना देता है।
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इस बार भी जब जलस्तर बढ़ा तो रामनगरा गांव निवासी सरदार बख्शीश सिंह के झाले से लेकर प्रभास के झाले तक दाहिने किनारे पर पानी का जबरदस्त दबाव देखा गया। खास बात यह है कि यहां एक हिस्से में मार्जिनल बांध नहीं है, इससे कटान की आशंका और बढ़ गई है।
गत वर्षों में नदी ने इसी क्षेत्र में एक धार्मिक स्थल और दर्जनों किसानों की उपजाऊ जमीन काट दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार भी अगर बाढ़ आती है, तो धुरिया, पलिया, पुरैना और महाराजपुर जैसे गांवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है। इसके पीछे वजह यह है कि नदी की चौड़ाई इस क्षेत्र में अत्यधिक बढ़ गई है और रेत के ढेरों के बीच से नदी दो धारा में बहकर कटान कर रही है।