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Pilibhit News: गैंगस्टर एक्ट के दो मामलों में दो लोग दोषी करार
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एक को दो वर्ष दस माह व दूसरे को दो वर्ष की सजा, पांच-पांच हजार लगाया अर्थदंड
पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायालय गैंगस्टर एक्ट अनु सक्सेना ने गैंगस्टर एक्ट के दो अलग-अलग मामलों में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एक को दो वर्ष दस माह और दूसरे को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन के अनुसार, थाना सुनगढ़ी के तत्कालीन प्रभारी बृजेश सिंह ने वर्ष 2015 में ग्राम चिड़ियादाह निवासी प्रमोद कुमार वर्मा उर्फ गुड्डू व उसके साथियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान प्रमोद कुमार वर्मा ने अपनी पत्रावली अलग कर सुनवाई किए जाने का प्रार्थना पत्र दिया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
दूसरे मामले में थाना बरखेड़ा के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक आलोक कुमार मिश्रा ने 31 जुलाई 2019 को थाना बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम टिकरी बाजार निवासी पप्पन उर्फ वीरेंद्र पाल व उसके आठ साथियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट में मामला दर्ज कराया था। विवेचना पूरी होने पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस मामले में भी पप्पन उर्फ वीरेंद्र पाल की ओर से पत्रावली अलग करने का प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर अलग सुनवाई की।
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दोनों मामलों में अभियोजन ने पैरवी की। साक्ष्यों एवं दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने प्रमोद कुमार वर्मा उर्फ गुड्डू को दो वर्ष दस माह के कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड व पप्पन उर्फ वीरेंद्र पाल को दो वर्ष के कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। संवाद
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फर्जी बैंक रसीद से 15 लाख रुपये की ठगी के आरोपी की जमानत खारिज
पीलीभीत। फर्जी बैंक रसीद तैयार कर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी आयुष्मान भारत कार्यक्रम के संविदाकर्मी की नियमित जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु ने प्रथम दृष्ट्या जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप गंभीर मानते हुए आरोपी को राहत देने से इन्कार कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, थाना सुनगढ़ी क्षेत्र निवासी पीयूष कुमार सिंह, जो सीएमओ कार्यालय में सहायक शोध अधिकारी हैं, ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि आयुष्मान भारत कार्यक्रम में तैनात आयुष्मान मैनेजर अरुण कुमार मौर्य ने पारिवारिक परेशानी का हवाला देकर उनसे अलग-अलग समय पर ऑनलाइन माध्यम से 15 लाख रुपये उधार लिए।
कुछ रकम लौटाने के बाद 7.47 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं। रुपये मांगने पर आरोपी और उसके परिजनों ने जान से मारने की धमकी दी तथा कृष्णा लोक कॉलोनी में प्लॉट दिलाने का झांसा भी दिया। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इसे कारोबारी विवाद बताया। दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी और जालसाजी के पर्याप्त आधार हैं। साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी अरुण कुमार मौर्य की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी। संवाद
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डीआईओएस कार्यालय घोटाले में मुख्य आरोपी के पुत्र और दो महिलाओं को सशर्त अग्रिम जमानत
पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में एक करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के मुख्य आरोपी के पुत्र और दो महिलाओं की अग्रिम जमानत याचिकाएं जनपद सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार ने सशर्त स्वीकार कर ली हैं। यह मामला सरकारी धन के गबन से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि जनता टेक्निकल कॉलेज बीसलपुर में कार्यरत इलहाम उर रहमान शम्सी ने वेतन बिल टोकन जनरेशन का कार्य देखा था। उसने कूटरचना कर वेतन मद से 1,01,95,135 रुपये की धनराशि अपनी पत्नी अर्शी खातून के खाते में हस्तांतरित कर दी थी। इस तरह सरकारी धन का गबन किया गया।
इलहाम उर रहमान शम्सी के पुत्र वामीक शम्सी, तशबिया शम्सी और गुलनाज फखरुद्दीन ने जनपद सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार के न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने अपने तर्क प्रस्तुत किए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुना और पत्रावली का अवलोकन किया।
न्यायालय ने तशबिया शम्सी, वामीक शम्सी और गुलनाज फखरुद्दीन की अग्रिम जमानत याचिकाएं सशर्त स्वीकार कीं। न्यायालय ने आदेश दिया कि वे प्रत्येक नियत तिथि पर स्वयं और अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित रहेंगे। वे मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन नहीं देंगे। ऐसा करने से उन्हें तथ्यों को न्यायालय में प्रकट न करने के लिए मनाया जा सकता है। वे न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। साथ ही, वे आरोपित अपराध के समान किसी अन्य अपराध में संलिप्त नहीं होंगे। संवाद
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पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायालय गैंगस्टर एक्ट अनु सक्सेना ने गैंगस्टर एक्ट के दो अलग-अलग मामलों में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए एक को दो वर्ष दस माह और दूसरे को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन के अनुसार, थाना सुनगढ़ी के तत्कालीन प्रभारी बृजेश सिंह ने वर्ष 2015 में ग्राम चिड़ियादाह निवासी प्रमोद कुमार वर्मा उर्फ गुड्डू व उसके साथियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान प्रमोद कुमार वर्मा ने अपनी पत्रावली अलग कर सुनवाई किए जाने का प्रार्थना पत्र दिया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
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दूसरे मामले में थाना बरखेड़ा के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक आलोक कुमार मिश्रा ने 31 जुलाई 2019 को थाना बीसलपुर क्षेत्र के ग्राम टिकरी बाजार निवासी पप्पन उर्फ वीरेंद्र पाल व उसके आठ साथियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट में मामला दर्ज कराया था। विवेचना पूरी होने पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस मामले में भी पप्पन उर्फ वीरेंद्र पाल की ओर से पत्रावली अलग करने का प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर अलग सुनवाई की।
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दोनों मामलों में अभियोजन ने पैरवी की। साक्ष्यों एवं दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने प्रमोद कुमार वर्मा उर्फ गुड्डू को दो वर्ष दस माह के कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड व पप्पन उर्फ वीरेंद्र पाल को दो वर्ष के कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। संवाद
फर्जी बैंक रसीद से 15 लाख रुपये की ठगी के आरोपी की जमानत खारिज
पीलीभीत। फर्जी बैंक रसीद तैयार कर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी आयुष्मान भारत कार्यक्रम के संविदाकर्मी की नियमित जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु ने प्रथम दृष्ट्या जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप गंभीर मानते हुए आरोपी को राहत देने से इन्कार कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, थाना सुनगढ़ी क्षेत्र निवासी पीयूष कुमार सिंह, जो सीएमओ कार्यालय में सहायक शोध अधिकारी हैं, ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि आयुष्मान भारत कार्यक्रम में तैनात आयुष्मान मैनेजर अरुण कुमार मौर्य ने पारिवारिक परेशानी का हवाला देकर उनसे अलग-अलग समय पर ऑनलाइन माध्यम से 15 लाख रुपये उधार लिए।
कुछ रकम लौटाने के बाद 7.47 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं। रुपये मांगने पर आरोपी और उसके परिजनों ने जान से मारने की धमकी दी तथा कृष्णा लोक कॉलोनी में प्लॉट दिलाने का झांसा भी दिया। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने इसे कारोबारी विवाद बताया। दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी और जालसाजी के पर्याप्त आधार हैं। साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी अरुण कुमार मौर्य की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी। संवाद
डीआईओएस कार्यालय घोटाले में मुख्य आरोपी के पुत्र और दो महिलाओं को सशर्त अग्रिम जमानत
पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में एक करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के मुख्य आरोपी के पुत्र और दो महिलाओं की अग्रिम जमानत याचिकाएं जनपद सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार ने सशर्त स्वीकार कर ली हैं। यह मामला सरकारी धन के गबन से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि जनता टेक्निकल कॉलेज बीसलपुर में कार्यरत इलहाम उर रहमान शम्सी ने वेतन बिल टोकन जनरेशन का कार्य देखा था। उसने कूटरचना कर वेतन मद से 1,01,95,135 रुपये की धनराशि अपनी पत्नी अर्शी खातून के खाते में हस्तांतरित कर दी थी। इस तरह सरकारी धन का गबन किया गया।
इलहाम उर रहमान शम्सी के पुत्र वामीक शम्सी, तशबिया शम्सी और गुलनाज फखरुद्दीन ने जनपद सत्र न्यायाधीश रविंद्र कुमार के न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने अपने तर्क प्रस्तुत किए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुना और पत्रावली का अवलोकन किया।
न्यायालय ने तशबिया शम्सी, वामीक शम्सी और गुलनाज फखरुद्दीन की अग्रिम जमानत याचिकाएं सशर्त स्वीकार कीं। न्यायालय ने आदेश दिया कि वे प्रत्येक नियत तिथि पर स्वयं और अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित रहेंगे। वे मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन नहीं देंगे। ऐसा करने से उन्हें तथ्यों को न्यायालय में प्रकट न करने के लिए मनाया जा सकता है। वे न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। साथ ही, वे आरोपित अपराध के समान किसी अन्य अपराध में संलिप्त नहीं होंगे। संवाद