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Pilibhit News: मेडिकल कॉलेज में झुलसे लोगों के लिए उपचार की व्यवस्था अपर्याप्त

Thu, 02 May 2024 02:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 02 May 2024 02:52 AM IST
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Treatment system for scorched people in medical college insufficient
मेडिकल कॉलेज के वर्न वार्ड में भर्ती मरीज । संवाद
पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज में आग से झुलसे लोगों के लिए उपचार की व्यवस्था अपर्याप्त है। यहां स्टाफ तो बढ़ा दिया गया लेकिन संसाधन नाकाफी हैं। इसी का नतीजा है कि संसाधन न होने के कारण सर्जन होने के बाद भी झुलसे लोगों की सर्जरी नहीं हो पाती और उन्हे रेफर कर दिया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिले के लोगों को आस थी कि अब यहां पर सभी गंभीर बीमारियों का इलाज हो सकेगा, लेकिन उनकी यह आस पूरी नहीं हो सकी। आग लगने से झुलसे लोगों को ही लें तो अधिकतर मामलों में संसाधन न होने के कारण उनको रेफर कर दिया जाता है।
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सिर्फ कम झुलसे लोगों को ही यहां बने बर्न वार्ड में भर्ती किया जाता है। वार्ड में बस मच्छरदानी की व्यवस्था है, इसके अलावा अन्य कोई संसाधन नहीं है। ऐसे में कई बार मरीजों को उनके तीमारदार खुद ही यहां से रेफर करवाकर ले जाते हैं।
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भवन तैयार, सर्जन भी मौजूद फिर भी नहीं सर्जरी की सुविधा
मेडिकल कॉलेज में करीब आठ साल पहले बर्न यूनिट-प्लास्टिक सर्जरी के लिए भवन बनवाया गया था। इसका ताला सिर्फ कोरोनाकॉल में टीकाकरण के लिए कुछ दिनों के लिए खुला, फिर लगा दिया गया। अब जब मेडिकल कॉलेज बनने के बाद सर्जन की भी तैनाती कर दी गई है। इसके बावजूद यहां सर्जरी नहीं होती, क्योंकि पर्याप्त संसाधन ही नहीं हैं।

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एक माह में जाते हैं सिर्फ 10 से 12 मरीज
मौजूदा समय में आग की काफी घटनाएं हो रही हैं। इससे मेडिकल कॉलेज में आग से झुलसे लोगो के आने के मामले भी बढ़ गए है। आग के साथ ही करंट से झुलसे मरीज भी आते है। बावजूद इसके गंभीर मरीजों को यहां से रेफर कर दिया जाता है। कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार हर माह सिर्फ 10 से 12 झुलसे मरीज ही यहां पहुंचते हैं।
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व्यवस्थाओं को धीरे-धीरे पटरी पर लाने की कोशिश है। कोशिश की जा रही है कि जल्द ही यहां झुलसे लोगों की सर्जरी भी शुरू हो जाए।
- डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
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