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शौचालय निर्माण में गड़बड़ी खुली तो सचिव घबराए, सात टेंडर निरस्त कराए
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पीलीभीत। सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मांगे गए उनके टेंडर आनन फानन में पंचायत सचिवों ने निरस्त कर दिए। डीएम के जांच के निर्देश देने के बाद ग्राम विकास अधिकारियों और ग्राम पंचायत सचिवों ने खुद को बचाने के लिए यह कदम उठाया। खास बात रही कि टेंडर प्रक्रिया निरस्त करने का सचिव कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं दे पाए। सिर्फ भूलवश टेंडर मांगे जाने की बात कहकर अपनी इज्जत बचाई।
शासन के निर्देश के बाद ग्राम निधि और मनरेगा से करोड़ों रुपये खर्च कर ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। बरखेड़ा ब्लॉक के एक ग्राम विकास अधिकारी (कार्यवाहक पंचायत सचिव) ने बीते दिनों निर्माण सामग्री खरीदने के लिए टेंडर मांगे थे। इसकी निविदा सूचना भी जारी कर दी गई थी। जिन ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण की सामग्री को टेंडर मांगे गए थे, वहां पहले से ही उनका निर्माण पूरा करा लिया गया था। अमर उजाला ने अनियमितताओं को उजागर करते हुए पांच सितंबर के अंक में समाचार प्रकाशित किया था। इसका संज्ञान लेकर डीएम पुलकित खरे ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। इधर, पंचायत सचिव को डीएम तक यह मामला पहुंचने का पता लगा तो उसने खुद को बचाने के लिए आनन फानन में सात ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण सामग्री खरीद के लिए मांगे गए टेंडरों को निरस्त कर दिया। इन सभी सात ग्राम पंचायत का काम एक ही सचिव पर है। उन्होंने टेंडर निरस्त करने कोई ठोस कारण नहीं बताया। सिर्फ भूलवश टेंडर मांगे जाने की बात कहकर उन्हें निरस्त किया गया। डीएम पुलकित खरे ने कहा कि शौचालय निर्माण में गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी। अनियमितताएं मिलने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी या अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी धन का हो रहा दुरुपयोग
शौचालय निर्माण को लेकर 24 घंटे के भीतर पहले टेंडर मांगे और फिर निरस्त करा दिए गए। भूलवश टेंडर मांगने की बात कहकर पंचायत सचिव ने तो स्वयं को बचा लिया, मगर निविदा सूचना दो बार प्रकाशित कराकर अनावश्यक रुपये खर्च किए गए। ब्लॉक में चर्चा है कि ग्राम विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों ने शौचालय निर्माण कराने के बाद अनावश्यक टेंडर प्रकाशित कराकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
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शासन के निर्देश के बाद ग्राम निधि और मनरेगा से करोड़ों रुपये खर्च कर ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। बरखेड़ा ब्लॉक के एक ग्राम विकास अधिकारी (कार्यवाहक पंचायत सचिव) ने बीते दिनों निर्माण सामग्री खरीदने के लिए टेंडर मांगे थे। इसकी निविदा सूचना भी जारी कर दी गई थी। जिन ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण की सामग्री को टेंडर मांगे गए थे, वहां पहले से ही उनका निर्माण पूरा करा लिया गया था। अमर उजाला ने अनियमितताओं को उजागर करते हुए पांच सितंबर के अंक में समाचार प्रकाशित किया था। इसका संज्ञान लेकर डीएम पुलकित खरे ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। इधर, पंचायत सचिव को डीएम तक यह मामला पहुंचने का पता लगा तो उसने खुद को बचाने के लिए आनन फानन में सात ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण सामग्री खरीद के लिए मांगे गए टेंडरों को निरस्त कर दिया। इन सभी सात ग्राम पंचायत का काम एक ही सचिव पर है। उन्होंने टेंडर निरस्त करने कोई ठोस कारण नहीं बताया। सिर्फ भूलवश टेंडर मांगे जाने की बात कहकर उन्हें निरस्त किया गया। डीएम पुलकित खरे ने कहा कि शौचालय निर्माण में गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी। अनियमितताएं मिलने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी या अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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सरकारी धन का हो रहा दुरुपयोग
शौचालय निर्माण को लेकर 24 घंटे के भीतर पहले टेंडर मांगे और फिर निरस्त करा दिए गए। भूलवश टेंडर मांगने की बात कहकर पंचायत सचिव ने तो स्वयं को बचा लिया, मगर निविदा सूचना दो बार प्रकाशित कराकर अनावश्यक रुपये खर्च किए गए। ब्लॉक में चर्चा है कि ग्राम विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों ने शौचालय निर्माण कराने के बाद अनावश्यक टेंडर प्रकाशित कराकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
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