{"_id":"583ed4be4f1c1b2d1ede6a0a","slug":"tips-given-to-trankyulaij","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रैंक्युलाइज करने के टिप्स दिये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रैंक्युलाइज करने के टिप्स दिये
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Wed, 30 Nov 2016 11:01 PM IST
विज्ञापन
ट्रैंक्युलाइज करने के टिप्स दिये
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाघ एवं अन्य वन्यजीवों के हमलों से निपटने के लिए बने त्वरित कार्रवाई बल के सदस्यों को डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने वन्यजीवों को बेहोश करने का तरीका समझाया। वहीं वन संरक्षक ने बैठक कर जंगल से सटे ग्रामीणों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
बाघिन के हमले में गांव पिपरिया संतोष निवासी बाबूराम की मौत के बाद वन विभाग हरकत में आया है। मंगलवार देरशाम वन संरक्षक वीके सिंह ने क्यूआरटी गठित की थी। इसमें वन्यजीवों के ट्रैंक्युलाइज करने के लिए दो पशु चिकित्साधिकारियों को भी रखा गया है। बुधवार को मुस्तफाबाद रेंज में लखनऊ प्राणी उद्यान के डीडी डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने क्यूआरटी सदस्यों को वन्यजीवों को बेहोश करने का तरीका समझाया। उन्होंने बताया कि टैक्युलाइजिंग गन से बेहोशी की दवा देते समय वन्यजीव का वजन, आयु आदि का विशेष रखना चाहिए साथ ही दूरी की गणना भी की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि किसी भी वन्यजीव को बेहोश करने से पहले वन्यजीव प्रतिपालक से अनुमति हासिल करनी जरूरी है। हालांकि आपात स्थिति में दूरभाष पर भी अनुमति मिल सकती है। दिन भर चले प्रशिक्षण में उन्होंने वनकर्मियों का भी ट्रैंक्युलाइजिंग गन और उसकी खूबियां की जानकारी दी। इस मौके पर वनसंरक्षक वीके सिंह, डीएफओ आदर्श कुमार, कैलाश प्रकाश, एसडीओ डीपी सिंह, केपी सिंह, पशु चिकित्सक डॉ. राजुल सक्सेना, डॉ. सुनील राठौर, रेंजर अनिल शाह, दिलीप श्रीवास्तव, आरिफ जमाल, मोबिन आरिफ मौजूद रहे।
विज्ञापन
बाघिन के हमले में गांव पिपरिया संतोष निवासी बाबूराम की मौत के बाद वन विभाग हरकत में आया है। मंगलवार देरशाम वन संरक्षक वीके सिंह ने क्यूआरटी गठित की थी। इसमें वन्यजीवों के ट्रैंक्युलाइज करने के लिए दो पशु चिकित्साधिकारियों को भी रखा गया है। बुधवार को मुस्तफाबाद रेंज में लखनऊ प्राणी उद्यान के डीडी डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने क्यूआरटी सदस्यों को वन्यजीवों को बेहोश करने का तरीका समझाया। उन्होंने बताया कि टैक्युलाइजिंग गन से बेहोशी की दवा देते समय वन्यजीव का वजन, आयु आदि का विशेष रखना चाहिए साथ ही दूरी की गणना भी की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि किसी भी वन्यजीव को बेहोश करने से पहले वन्यजीव प्रतिपालक से अनुमति हासिल करनी जरूरी है। हालांकि आपात स्थिति में दूरभाष पर भी अनुमति मिल सकती है। दिन भर चले प्रशिक्षण में उन्होंने वनकर्मियों का भी ट्रैंक्युलाइजिंग गन और उसकी खूबियां की जानकारी दी। इस मौके पर वनसंरक्षक वीके सिंह, डीएफओ आदर्श कुमार, कैलाश प्रकाश, एसडीओ डीपी सिंह, केपी सिंह, पशु चिकित्सक डॉ. राजुल सक्सेना, डॉ. सुनील राठौर, रेंजर अनिल शाह, दिलीप श्रीवास्तव, आरिफ जमाल, मोबिन आरिफ मौजूद रहे।
विज्ञापन