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बाघ की अफवाह से दहशत, खेतों में दौड़े ग्रामीण
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Thu, 01 Dec 2016 10:28 PM IST
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बाघ की अफवाह से दहशत, खेतों में दौड़े ग्रामीण
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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पिपरिया संतोष में बाघिन के हमले में बाबूराम की मौत के बाद से दहशत कायम है। बृहस्पतिवार सुबह गांव के निकट गन्ने के खेत में आने की अफवाह से हड़कंप मच गया। आनन फानन में लोग खेत के निकट पहुंच लेकिन घंटों तलाशी के बाद कोई नहीं मिला। उधर गांव के बच्चे भी स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। जिससे स्कूलों में सन्नाटा पसरा है।
पिपरिया संतोष गांव में बाघिन के हमले में मारे गए बाबूराम के खेत से कुछ दूरी पर स्थित गन्ने के खेत में बाघ की अफवाह क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। सूचना मिलते ही बढ़ी संख्या में लोग खेत की और दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने हो हल्ला कर खेतों की तलाशी की लेकिन कुछ नहीं मिला। वहीं किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए वनविभाग ने अपने कुछ कर्मियों को सिविल डे्रस में मौके पर भेजकर स्थिति की जानकारी लेकिन कुछ न होने पर सभी ने राहत की सांस ली। उधर बाघिन के हमले में बाबूराम की मौत के चार दिन बाद भी क्षेत्र में दहशत कायम हैं। रातों को लोग जागकर रखवाली कर रहे हैं वहीं शाम को भी गांव के बाहरी हिस्सों में आग जलाकर व पहरा देकर सुरक्षा के उपाय कर रहे हैं। इसके अलावा स्कूलों में सन्नाटा पसरा है। दहशत के चलते ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। बृहस्पतिवार को गांव के लगभग बाहर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में रसोइया के अलावा सहायक अध्यापिका प्रवीन कौर मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि दहशत के चलते बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। जो चार छह बच्चे आए थे उन्हें अधिकारियों के आदेश पर गांव के अंदर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में भेजकर पढ़ाया जा रहा है।
पिपरिया संतोष गांव में बाघिन के हमले में मारे गए बाबूराम के खेत से कुछ दूरी पर स्थित गन्ने के खेत में बाघ की अफवाह क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। सूचना मिलते ही बढ़ी संख्या में लोग खेत की और दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने हो हल्ला कर खेतों की तलाशी की लेकिन कुछ नहीं मिला। वहीं किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए वनविभाग ने अपने कुछ कर्मियों को सिविल डे्रस में मौके पर भेजकर स्थिति की जानकारी लेकिन कुछ न होने पर सभी ने राहत की सांस ली। उधर बाघिन के हमले में बाबूराम की मौत के चार दिन बाद भी क्षेत्र में दहशत कायम हैं। रातों को लोग जागकर रखवाली कर रहे हैं वहीं शाम को भी गांव के बाहरी हिस्सों में आग जलाकर व पहरा देकर सुरक्षा के उपाय कर रहे हैं। इसके अलावा स्कूलों में सन्नाटा पसरा है। दहशत के चलते ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। बृहस्पतिवार को गांव के लगभग बाहर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में रसोइया के अलावा सहायक अध्यापिका प्रवीन कौर मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि दहशत के चलते बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। जो चार छह बच्चे आए थे उन्हें अधिकारियों के आदेश पर गांव के अंदर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में भेजकर पढ़ाया जा रहा है।
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