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पीलीभीत में कचहरी के पास पहुंचा बाघ, गाय पर किया हमला, लोगों में दहशत
ब्यूरो/ अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:44 PM IST
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पीलीभीत के बनकटी के जंगल से बाहर आया बाघ अब वन विभाग के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। आसपास गांवों के खेतों से होता हुआ बाघ बृहस्पतिवार को सुबह कचहरी के निकट पहुंचा और यहां खाली पड़े प्लॉट में गाय पर हमला कर दिया। इससे हड़कंप मच गया।
सूचना मिलने पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मौके पर बाघ के पंजों के निशान मिलने पर उसे ट्रैंक्युलाइज करने का निर्णय लिया। इसके लिए हाथियों की मदद से कांबिग की गई लेकिन बाघ नहीं मिला। उधर गजरौला क्षेत्र के विधिपुर गांव में बाघ ने खेत में घूम रही भैंस पर हमला कर उसे घायल कर दिया।
देर शाम कांबिग कर रहे दो हाथियों में से एक का मिजाज बिगड़ गया। उसने डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल को सूंड़ से एक ओर धकेल दिया। वह उन पर पैर रखने ही जा रहा था कि पास खड़े वनकर्मियों ने फुर्ती से उन्हें खींचकर बचा लिया।
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बृहस्पतिवार को सुबह करीब 10:30 बजे बाघ बनकटी रोड और रेलवे लाइन को पार कर कचहरी के निकट बंद पड़ी गत्ता फैक्ट्री के करीब पहुंच गया। यहां टनकपुर रोड से सटी खाली पड़ी एक झाड़ियों वाली जमीन पर गांव दियूनीकेसरपुर निवासी रमेश यादव की गाय पर हमला कर दिया लेकिन गाय पूरी तरह बाघ की पकड़ में नहीं आ सकी। बाघ का हमला देख रमेश यादव शोर मचाते हुए भागे। कुछ ही देर में खबर कचहरी तक पहुंची जिस पर कई अधिवक्ता भी मौके पर पहुंच गए।
सूचना मिलने पर डीएफओ टाइगर रिजर्व कैलाश प्रकाश, डीएफओ सामाजिक वानिकी आदर्श कुमार, एसडीओ केपी सिंह, रेंजर पीलीभीत सतेंद्र चौधरी, रेंजर माला डीके श्रीवास्तव टीम के साथ पहुंचे। घटनास्थल पर बाघ के पग चिन्ह मिलने के बाद अधिकारियों ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने का निर्णय लिया।
इसके लिए बनकटी वन चौकी से दोनों हाथी पवनकली और गजराज मंगवाए गए। इसके बाद पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजुल सक्सेना की मदद से ट्रैंक्युलाइज गन तैयार की सर्च आपरेशन चलाया गया। लेकिन काफी तलाशी के बाद भी बाघ नहीं मिला। डीएफओ ने बताया कि तलाशी में बाघ नहीं मिला है। इसके चलते टनकपुर रोड व बनकटी रोड पर वनकर्मियों की टीमें निगरानी के लिए लगाई गई हैं।
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सूचना मिलने पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मौके पर बाघ के पंजों के निशान मिलने पर उसे ट्रैंक्युलाइज करने का निर्णय लिया। इसके लिए हाथियों की मदद से कांबिग की गई लेकिन बाघ नहीं मिला। उधर गजरौला क्षेत्र के विधिपुर गांव में बाघ ने खेत में घूम रही भैंस पर हमला कर उसे घायल कर दिया।
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देर शाम कांबिग कर रहे दो हाथियों में से एक का मिजाज बिगड़ गया। उसने डिप्टी रेंजर आरिफ जमाल को सूंड़ से एक ओर धकेल दिया। वह उन पर पैर रखने ही जा रहा था कि पास खड़े वनकर्मियों ने फुर्ती से उन्हें खींचकर बचा लिया।
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बृहस्पतिवार को सुबह करीब 10:30 बजे बाघ बनकटी रोड और रेलवे लाइन को पार कर कचहरी के निकट बंद पड़ी गत्ता फैक्ट्री के करीब पहुंच गया। यहां टनकपुर रोड से सटी खाली पड़ी एक झाड़ियों वाली जमीन पर गांव दियूनीकेसरपुर निवासी रमेश यादव की गाय पर हमला कर दिया लेकिन गाय पूरी तरह बाघ की पकड़ में नहीं आ सकी। बाघ का हमला देख रमेश यादव शोर मचाते हुए भागे। कुछ ही देर में खबर कचहरी तक पहुंची जिस पर कई अधिवक्ता भी मौके पर पहुंच गए।
सूचना मिलने पर डीएफओ टाइगर रिजर्व कैलाश प्रकाश, डीएफओ सामाजिक वानिकी आदर्श कुमार, एसडीओ केपी सिंह, रेंजर पीलीभीत सतेंद्र चौधरी, रेंजर माला डीके श्रीवास्तव टीम के साथ पहुंचे। घटनास्थल पर बाघ के पग चिन्ह मिलने के बाद अधिकारियों ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने का निर्णय लिया।
इसके लिए बनकटी वन चौकी से दोनों हाथी पवनकली और गजराज मंगवाए गए। इसके बाद पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजुल सक्सेना की मदद से ट्रैंक्युलाइज गन तैयार की सर्च आपरेशन चलाया गया। लेकिन काफी तलाशी के बाद भी बाघ नहीं मिला। डीएफओ ने बताया कि तलाशी में बाघ नहीं मिला है। इसके चलते टनकपुर रोड व बनकटी रोड पर वनकर्मियों की टीमें निगरानी के लिए लगाई गई हैं।