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बाघ की मौत के मामले में दो गिरफ्तार, शराब बनाने में इस्तेमाल केमिकल से मौत का अंदेशा
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पीलीभीत। हमलावर बाघ को बेहोश (ट्रैंक्युलाइज) करते हुए हुई मौत के मामले में 17 दिन बाद टाइगर रिजर्व और वन विभाग की टीम ने दो लोगों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। दोनों को जेल भेज दिया गया। ये दोनों जंगल में शराब बनाते थे और उसमें केमिकल इस्तेमाल करते थे। बाघ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर में केमिकल पाया गया था, इसे भी मौत का एक कारण माना गया था। इसी वजह से दोनों पर कार्रवाई हुई है।
टाइगर रिजर्व की माला रेंज से सटे इलाके में एक मई को बाघ ने हमला कर तीन ग्रामीणों को घायल कर दिया था। वन विभाग की टीम ने तीन मई की शाम अभियान चलाकर बाघ को टैैंक्युलाइज किया। कुछ देर बाद ही परीक्षण के दौरान बाघ की गढ़ा रेंज में मौत हो गई थी। इस मामले में ट्रैंक्युलाइज टीम पर भी ओवरडोज देने के आरोप लगे थे। इधर वन विभाग के अधिकारियों ने पांच मई को अज्ञात पर विभागीय केस काटा था। गजरौला थाने में भी अज्ञात पर बाघ की हत्या की आशंका जताते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसकी विवेचना पुलिस अभी कर रही है। मगर, वन विभाग ने इस प्रकरण में मंगलवार शाम महदखास गांव निवासी मनोहर और लोचन को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद बुधवार को दोनों का चालान कर दिया गया। सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार ने बताया कि दोनों जंगल में कच्ची शराब बनाते हैं। इनके द्वारा विभिन्न केमिकल भी शराब बनाने में प्रयोग किए जाते हैं। बाघ की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में केमिकल का जिक्र था। दोनों आरोपियों की चहलकदमी भी जंगल में रहती है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर दोनों पर कार्रवाई की गई है।
पूर्व मंत्री ने ट्वीट कर अफसरों को घेरा
सपा सरकार में राज्यमंत्री रहे हेमराज वर्मा ने बाघ की मौत के मामले में अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ट्वीट कर उन्होंने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर दो बाघों की मौत हुई। बाघ और इंसानों की मौत का सिलसिला जारी है। अधिकारी बाघ संरक्षण के नाम पर सरकारी धन की लूट खसोट कर रहे हैं।
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टाइगर रिजर्व की माला रेंज से सटे इलाके में एक मई को बाघ ने हमला कर तीन ग्रामीणों को घायल कर दिया था। वन विभाग की टीम ने तीन मई की शाम अभियान चलाकर बाघ को टैैंक्युलाइज किया। कुछ देर बाद ही परीक्षण के दौरान बाघ की गढ़ा रेंज में मौत हो गई थी। इस मामले में ट्रैंक्युलाइज टीम पर भी ओवरडोज देने के आरोप लगे थे। इधर वन विभाग के अधिकारियों ने पांच मई को अज्ञात पर विभागीय केस काटा था। गजरौला थाने में भी अज्ञात पर बाघ की हत्या की आशंका जताते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसकी विवेचना पुलिस अभी कर रही है। मगर, वन विभाग ने इस प्रकरण में मंगलवार शाम महदखास गांव निवासी मनोहर और लोचन को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद बुधवार को दोनों का चालान कर दिया गया। सामाजिक वानिकी के डीएफओ संजीव कुमार ने बताया कि दोनों जंगल में कच्ची शराब बनाते हैं। इनके द्वारा विभिन्न केमिकल भी शराब बनाने में प्रयोग किए जाते हैं। बाघ की पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में केमिकल का जिक्र था। दोनों आरोपियों की चहलकदमी भी जंगल में रहती है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर दोनों पर कार्रवाई की गई है।
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पूर्व मंत्री ने ट्वीट कर अफसरों को घेरा
सपा सरकार में राज्यमंत्री रहे हेमराज वर्मा ने बाघ की मौत के मामले में अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ट्वीट कर उन्होंने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर दो बाघों की मौत हुई। बाघ और इंसानों की मौत का सिलसिला जारी है। अधिकारी बाघ संरक्षण के नाम पर सरकारी धन की लूट खसोट कर रहे हैं।
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