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दफनाए गए मवेशियों के शव बाघिन ने खोद निकाले, रात भर खाए

Tue, 01 Dec 2020 01:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 01 Dec 2020 01:07 AM IST
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The tigress carved the bodies of buried cattle, ate them overnight
आबादी के पास पहुंची बाघिन 36 घंटे से अधिक गन्ने के खेत में डेरा जमाए रही
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सोमवार दिन भर खेत में आराम करने के बाद शाम को बाहर निकली तो मचा हड़कंप
माधोटांडा। जंगल से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र के किनारे पहुंची बाघिन 36 घंटे बीतने के बाद भी गन्ने के खेत में डेरा जमाए हुए है। बताते हैं कि रविवार रात भर बाघिन मृत मवेशी के गड्ढे में दबाए गए शव को निकालकर खाती रही। सोमवार तड़के बाघिन गन्ने के खेत में चली गई और शाम को ही खेत से बाहर निकली। सुरक्षा के मद्देनजर टाइगर रिजर्व और सामाजिक वानिकी प्रभाग की संयुक्त टीम निगरानी में जुटी रहीं।
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से बाहर निकल बाघिन रविवार सुबह गांव के पश्चिम दिशा में बसी आबादी क्षेत्र से सटे इलाके में पहुंच गई थी। यहां बाघिन ने खेतों में घूम रहे दो छुट्टा बछड़ों का शिकार किया। किसानों की हलचल होने पर बाघिन सौ मीटर दूर ग्रामीण शगुन सिंह के गन्ने के खेत में पहुंच गई और पूरा दिन गन्ने के खेत से बाहर डेरा जमाने के बाद शाम होते ही बाघिन फिर उसी स्थान पर पहुंच गई जहां मृत पशुओं को गड्ढों में दबाया गया था। बताते हैं कि बाघिन ने गड्ढों में दबे पशुओं के शवों को खोदकर बाहर निकाल लिया और पेट भरती रही।
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खास बात यह रही कि रात भर मृत पशुओं का मांस खाने के बाद बाघिन सोमवार सुबह पुन: गन्ने के खेत में जाकर बैठ गई। निगरानी में जुटे वनकर्मियों ने पैरों के निशान ट्रेस किए। सुबह होते ही सामाजिक वानिकी के एसडीओ हेमंत सेठ, टाइगर रिजर्व के एसडीओ प्रवीण खरे मौके पर पहुंच गए। वही रेंजर अयूब हसन और दिनेश गोयल टीम के साथ निगरानी में जुटे रहे। दिन में बाघिन गन्ने के खेत से बाहर नहीं निकली। इससे कुछ समय के लिए असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, मगर शाम होते ही बाघिन जैसे ही गन्ने के बाहर निकली वन कर्मियों में एक बार फिर हड़कंप मच गया। निगरानी में जुटी टीमें भी सक्रिय हो गईं।
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रात में खलती रही संसाधनों की कमी
आबादी क्षेत्र के किनारे चहलकदमी कर रही बाघिन रात में पुन: उसी स्थान पर पहुंच गई, जहां मृत पशुओं को गड्ढों में दफनाया गया था। बाघिन ने पंजों की मदद से गड्ढे को खोदकर शवों का बाहर निकालकर अपना पेट भरा। निगरानी में जुटे वनकर्मी करीब 100 मीटर दूर खड़े रहे। रात के समय सर्च लाइट, टॉर्च आदि की कमी वनकर्मियों को खासी खली। जागरूक ग्रामीण टॉर्च लेकर पहुंचे, जिससे वन कर्मियों को खासी मदद मिली।

बाघ और बाघिन होने में असमंजस की स्थिति
रविवार को जहां वन विभाग के अफसर और कर्मचारी आबादी के निकट मवेशियों पर हमलावर को बाघिन बता रहे थे वहीं सोमवार सुबह वन विभाग के अफसर उसके बाघ होने की बात कहते दिखे।
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