{"_id":"59a5a7cd4f1c1b57738b456e","slug":"the-team-sitting-on-the-scaffolding-day-to-transcribe","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रैंक्युलाइज करने के लिए दिन भर मचान पर बैठी रही टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रैंक्युलाइज करने के लिए दिन भर मचान पर बैठी रही टीम
पीलीभीत।
Updated Tue, 29 Aug 2017 11:13 PM IST
विज्ञापन
tiger
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कई दिन से खूनी बाघ को बेहोश करने के लिए तलाश रही वन विभाग की टीम को मंगलवार को भी निराशा हाथ लगी। वन विभाग की टीम को बाघ की लोकेशन ग्राम हिमकरपुर के बाहर देवहा नदी के किनारे गन्ने के खेतों में मिली, लेकिन इस क्षेत्र में बांधे गए चारों पड्ढे सुरक्षित मिले हैं। बाघ की तस्वीर भी वन विभाग की ओर से लगाए गए कैमरे में कैद हुई है।
अमरिया क्षेत्र में खूनी बाघ द्वारा तीन ग्रामीणों को मौत के उतारने के बाद से ही वन महकमा उसे मानव जीवन के लिए खतरा मानते हुए बेहोश कर पकड़ने में 19 दिन से जुटा हुआ है, लेकिन शातिर बाघ वन विभाग के झांसे के बाद भी कब्जेे में नहीं आ सका है। वन विभाग द्वारा उसे लालच देने के लिए बांधे गए कई पड्डे भी वह खा चुका है। ट्रैंक्युलाइजर टीम के लोग तीन हाथियों की मदद से उसे बेहोश करने की फिराक में रोज सुबह अभियान चलाते हैं, लेकिन सायं होने तक शातिर बाघ उन्हें नजर नहीं आता। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि बाघ की लोकेशन टीम को मिल गई है। वह हिमकरपुर के बाहर देवहा नदी के किनारे स्थित गन्ने के खेतों में मौजूद है। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त को उसकी तस्वीर भी वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरे सायं 5.30 बजे कैद हुआ है। उन्होंने बताया कि बाघ को बेहोश करने के लिए प्रशिक्षित डॉ. उत्कर्ष शुक्ला द्वारा पूरे दिन संबंधित क्षेत्र में मचान पर बैठ कर बाघ को ट्रैक्युलाइज करने का प्रयास किया। हाथियों द्वारा गन्ने के खेत के बाहर गांव की तरफ कॉबिंग की गई। गठित टीम द्वारा ग्रामीणों को मीटिंग कर जागरूक किया गया और गन्ने के खेतों की ओर जाने से मना किया गया। उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार टीमों को दिन व रात्रि की ड्यिूटी के अनुसार तैनात किया गया है।
विज्ञापन
अमरिया क्षेत्र में खूनी बाघ द्वारा तीन ग्रामीणों को मौत के उतारने के बाद से ही वन महकमा उसे मानव जीवन के लिए खतरा मानते हुए बेहोश कर पकड़ने में 19 दिन से जुटा हुआ है, लेकिन शातिर बाघ वन विभाग के झांसे के बाद भी कब्जेे में नहीं आ सका है। वन विभाग द्वारा उसे लालच देने के लिए बांधे गए कई पड्डे भी वह खा चुका है। ट्रैंक्युलाइजर टीम के लोग तीन हाथियों की मदद से उसे बेहोश करने की फिराक में रोज सुबह अभियान चलाते हैं, लेकिन सायं होने तक शातिर बाघ उन्हें नजर नहीं आता। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि बाघ की लोकेशन टीम को मिल गई है। वह हिमकरपुर के बाहर देवहा नदी के किनारे स्थित गन्ने के खेतों में मौजूद है। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त को उसकी तस्वीर भी वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरे सायं 5.30 बजे कैद हुआ है। उन्होंने बताया कि बाघ को बेहोश करने के लिए प्रशिक्षित डॉ. उत्कर्ष शुक्ला द्वारा पूरे दिन संबंधित क्षेत्र में मचान पर बैठ कर बाघ को ट्रैक्युलाइज करने का प्रयास किया। हाथियों द्वारा गन्ने के खेत के बाहर गांव की तरफ कॉबिंग की गई। गठित टीम द्वारा ग्रामीणों को मीटिंग कर जागरूक किया गया और गन्ने के खेतों की ओर जाने से मना किया गया। उन्होंने बताया कि योजना के अनुसार टीमों को दिन व रात्रि की ड्यिूटी के अनुसार तैनात किया गया है।
विज्ञापन