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हिस्ट्रीशीटरों से बेखबर है जिले की पुलिस
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Mon, 27 Mar 2017 10:42 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे की कानून व्यवस्था को बेतहर बनाने के लिए अपराधियों पर शिकंजा कसने के निर्देश तो दिए हैं लेकिन हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी से लेकर उन पर नकेल कसने के लिए पुलिस का रवैया बेहद लापरवाह है। थानों की काली सूची में दर्ज लोग कहां हैं और क्या कर रहे हैं। इससे पुलिस बेखबर है।
वैसे तो जिले के समस्त थानों में हिस्ट्रीशीटरों को लेकर रजिस्टर बनाए गए हैं। हिस्ट्रीशीटर की वर्तमान मौजूदगी से लेकर उसकी दिनचर्या पर नजर रखने को वीट सिपाही, दरोगा एवं थानाध्यक्ष तक जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा जिला बदर किए जाने वालों की भी निगरानी कराई जाती है। लेकिन अफसरों की लचर मॉनीटरिंग के चलते कार्रवाई अभिलेखों में सिमट कर रह गई है। पुलिस रिकार्ड की बात करें तो करीब 80 प्रतिशत हिस्ट्रीशीटर पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। वह क्या कर रहे हैं, किससे मिल रहे है। इसके अलावा उनकी अन्य गतिविधियों का पुलिस को पता ही नहीं है। कई मामलों में तो अभिलेखों मेें निगरानी का जिम्मा संभाल रहे पुलिसकर्मी एचएस को पहचानते नहीं। अभिलेख भी अधूरे हैं। जबकि अधिकारी लगातार अभियान चलाकर निगरानी कराए जाने के दावे करते है। खास बात है कि कोतवाली, सुनगढ़ी गजरौला, अमरिया, जहानाबाद और बीसलपुर के अलावा अन्य थानों की पुलिस को अपराधियों को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं है।
बिलसंडा पुलिस नहीं जानती क्षेत्र में कितने एचएस!
पुलिस अपराधियों की निगरानी को लेकर कितनी संजीदा है। इसका आइना बिलसंडा थाना पुलिस की कार्यशैली से उजागर हो जाता है। थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटरों की संख्या पुलिस को नहीं पता है। एसओ रूम सिंह वघेल से लेकर कार्यालय मुंशी कोई भी इसको लेकर जवाब नहीं दे सका। दियोरियाकलां पुलिस भी संख्या को लेकर अभिज्ञनता जताती रह गई। वहीं न्यूरिया, हजारा, बरखेड़ा पुलिस एचएस की संख्या तो बता गई, लेकिन उनकी वर्तमान मौजूदगी नहीं बता सकी।
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एक साल पहले उजागर हो चुकी लापरवाही
एक साल पहले अपराधियों की निगरानी को लेकर पुलिस की लापरवाही अफसरों के सामने उजागर हो चुकी है। तत्कालीन एसपी अनिल कुमार सिंह ने हिस्ट्रीशीटरों की चेकिंग को विशेष अभियान चलाया था। जिसमें अभिलेखों में जीवित चल रहे पांच हिस्ट्रीशीटर ऐसे पाए गए, जिनकी कई साल पहले मौत हो चुकी थी। इसके अलावा अभिलेखों से फोटो गायब मिले थे।
अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई कराई जा रही है। उनकी हर गतिविधि पर पुलिस की नजर है। कहीं कोई लापरवाही मिलती है, तो कार्रवाई तय है।
अनुराग दर्शन, सीओ क्राइम
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वैसे तो जिले के समस्त थानों में हिस्ट्रीशीटरों को लेकर रजिस्टर बनाए गए हैं। हिस्ट्रीशीटर की वर्तमान मौजूदगी से लेकर उसकी दिनचर्या पर नजर रखने को वीट सिपाही, दरोगा एवं थानाध्यक्ष तक जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा जिला बदर किए जाने वालों की भी निगरानी कराई जाती है। लेकिन अफसरों की लचर मॉनीटरिंग के चलते कार्रवाई अभिलेखों में सिमट कर रह गई है। पुलिस रिकार्ड की बात करें तो करीब 80 प्रतिशत हिस्ट्रीशीटर पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। वह क्या कर रहे हैं, किससे मिल रहे है। इसके अलावा उनकी अन्य गतिविधियों का पुलिस को पता ही नहीं है। कई मामलों में तो अभिलेखों मेें निगरानी का जिम्मा संभाल रहे पुलिसकर्मी एचएस को पहचानते नहीं। अभिलेख भी अधूरे हैं। जबकि अधिकारी लगातार अभियान चलाकर निगरानी कराए जाने के दावे करते है। खास बात है कि कोतवाली, सुनगढ़ी गजरौला, अमरिया, जहानाबाद और बीसलपुर के अलावा अन्य थानों की पुलिस को अपराधियों को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं है।
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बिलसंडा पुलिस नहीं जानती क्षेत्र में कितने एचएस!
पुलिस अपराधियों की निगरानी को लेकर कितनी संजीदा है। इसका आइना बिलसंडा थाना पुलिस की कार्यशैली से उजागर हो जाता है। थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटरों की संख्या पुलिस को नहीं पता है। एसओ रूम सिंह वघेल से लेकर कार्यालय मुंशी कोई भी इसको लेकर जवाब नहीं दे सका। दियोरियाकलां पुलिस भी संख्या को लेकर अभिज्ञनता जताती रह गई। वहीं न्यूरिया, हजारा, बरखेड़ा पुलिस एचएस की संख्या तो बता गई, लेकिन उनकी वर्तमान मौजूदगी नहीं बता सकी।
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एक साल पहले उजागर हो चुकी लापरवाही
एक साल पहले अपराधियों की निगरानी को लेकर पुलिस की लापरवाही अफसरों के सामने उजागर हो चुकी है। तत्कालीन एसपी अनिल कुमार सिंह ने हिस्ट्रीशीटरों की चेकिंग को विशेष अभियान चलाया था। जिसमें अभिलेखों में जीवित चल रहे पांच हिस्ट्रीशीटर ऐसे पाए गए, जिनकी कई साल पहले मौत हो चुकी थी। इसके अलावा अभिलेखों से फोटो गायब मिले थे।
अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई कराई जा रही है। उनकी हर गतिविधि पर पुलिस की नजर है। कहीं कोई लापरवाही मिलती है, तो कार्रवाई तय है।
अनुराग दर्शन, सीओ क्राइम