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Pilibhit News: मनरेगा में पंजीकरण तक सिमटी पुरुषों की भागीदारी, घट गई महिलाओं की भी संख्या

Fri, 08 May 2026 02:25 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 02:25 AM IST
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The operation of buses will improve with the appointment of 16 women conductors.
ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना में काम करते श्रमिक। स्रोत ग्रामीण।
पीलीभीत। पीलीभीत। गांव-गांव श्रमिकों को काम दिलाने के मकसद से शुरू की गई मनरेगा (वीबीजीरामजी) योजना में अब श्रमिकों को ठीक से काम नहीं मिल रहा है। श्रमिकों की जगह मशीनों के प्रयोग और समय पर मजदूरी नहीं मिलने की वजह से श्रमिकों का इस याेजना से मोह भंग हो रहा है।
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यही वजह है कि इस योजना में मजदूर रजिस्ट्रेशन तो करा रहे हंै, लेकिन काम कहीं और कर रहे हैं। महिलाओं की भागीदारी भी पंजीकरण तक सिमटकर रह गई है। कभी इस योजना में 3.91 लाख मजदूरों का पंजीकरण हुआ करता था, लेकिन यह संख्या सिमट कर 1.26 लाख रह गई। मनरेगा में 40 प्रतिशत महिला और 28 प्रतिशत पुरुष श्रमिक काम कर रहे हैं।
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हालांकि मनरेगा योजना से जुड़े अफसरों का अभी भी यही दावा है कि श्रमिकों को काम दिया जा रहा है। समय से भुगतान भी हो रहा है, लेकिन मनरेगा पंजीकरण के आंकड़े और वर्तमान में मजदूरों की संख्या यही कह रही है कि दिक्कतों की वजह से मजदूरों का इस योजना से धीरे-धीरे मोह भंग होता चला गया। गौरतलब है कि गांव-गांव श्रमिकों को 100 दिन का रोजगार देने के लिए मनरेगा योजना चलाई जा रही है। गांवों में लोगों ने मनरेगा योजना के अंतर्गत पंजीकरण तो कराया है, लेकिन काम के लिए आज भी दूरस्थ क्षेत्रों में जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महज 1.26 लाख लोगों को ही विभाग रोजगार दिला सका है। संवाद
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महिलाओं ने पंजीकरण कराकर आवास योजना में ही किया काम
मनरेगा योजना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाए जाने के लिए शासन से निर्देश जारी हैं। ऐसे में अफसरों ने कागजी दावों को पूरा करने के लिए महिलाओं के पंजीकरण कराए, लेकिन इन महिलाओं की काम में भागीदारी नाममात्र की ही है। यह महिलाएं आवास निर्माण में स्वयं के कार्य कर रही हैं, जबकि अन्य कामों में इनकी भागीदारी नाममात्र की है। अफसर भी इसको लेकर गंभीर नहीं है।

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मनरेगा श्रमिकों की इन कामों में भागीदारी

शासन की ओर से मनरेगा श्रमिकों को तालाब की खोदाई, नाला निर्माण, नहर खोदाई, पौधरोपण, आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण, पंचायत सचिवालय निर्माण, इंटरलॉकिंग कार्य, चकमार्ग निर्माण आदि में काम दिया जा रहा है। इसके बाद भी आंकड़े कुछ और बता रहे हैं।
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हाजिरी के नाम पर किया जा रहा फर्जीवाड़ा, अफसर साधे हैं चुप्पी
मनरेगा श्रमिकों को भले ही धरातल पर काम नहीं मिल रहा है, लेकिन कागजों में उनकी हाजिरी लगाए जाने का खेल भी चल रहा है। इसको लेकर लगातार शिकायतें भी सामने आईं। इस पर मनरेगा लोकपाल की ओर से कई लोगों पर जुर्माना सहित अन्य आदेश भी दिए गए, लेकिन कार्रवाई सभी ठंडे बस्ते चली गई। जिला मुख्यालय पर तैनात अफसरों की ओर से कोई निगरानी नहीं की जा रही है।
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श्रमिकों की यह है स्थिति
जिले में कुल मनरेगा श्रमिक 3,91,449

जिले में कुल पुरुष श्रमिक 2,60,441

जिले में कुल सक्रिय श्रमिक 1,26,510

जिले में कुल महिला श्रमिक 1,31,008

कुल सक्रिय महिला श्रमिक 52,916

कुल सक्रिय पुरुष श्रमिक 73594
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मनरेगा श्रमिकों की इन कामों में भागीदारी

शासन की ओर से मनरेगा श्रमिकों को तालाब की खोदाई, नाला निर्माण, नहर खोदाई, पौधरोपण, आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण, पंचायत सचिवालय निर्माण, इंटरलॉकिंग कार्य, चकमार्ग निर्माण आदि में काम दिया जा रहा है। इसके बाद भी आंकड़े कुछ और बता रहे हैं।

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योजना के अंतर्गत मनरेगा श्रमिकों का पंजीकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें काम के साथ ही समय से भुगतान किया जा रहा है। महिलाओं की भागीदारी है, लेकिन महिलाएं काम कम कर रही हैं। - हेमंत यादव, डीसी मनरेगा
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