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Pilibhit: तराई में भी चलता था मुलायम सिंह का जादू, खास से लेकर आम सबके दिलों पर करते थे राज
Mon, 10 Oct 2022 03:52 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला, संवाद, पीलीभीत
अमर उजाला, संवाद, पीलीभीत
Published by: Digvijay Singh
Updated Mon, 10 Oct 2022 03:52 PM IST
सार
सिक्ख बाहुल्य क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव सबके प्रिय थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह ने चुनावी रैली करके जिले की चार में से तीन सीटों पर कब्जा किया था।
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मुलायम सिंह यादव, फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे मुलायम सिंह यादव का जादू तराई में भी खूब चलता था। सिक्ख बाहुल्य क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव सबके प्रिय थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह ने चुनावी रैली करके जिले की चार में से तीन सीटों पर कब्जा किया था। पीलीभीत को शुरू से ही मुलायम सिंह ने काफी तवज्जो दी। यूपी में जहां अन्य जिलों के लोग इस जिले को छोटा कहते थे वहीं मुलायम सिंह यादव ने जमकर मेहनत की। 1983 में पूर्व मंत्री रहे धीरेंद्र सहाय के चुनाव में वह तीन दिन तक जिले में ही डटे रहे। धीरेंद्र सहाय के बेटे मनोज सप्पू बताते हैं कि नेताजी हमेशा से ही सादा जीवन व्यतीत करते थे। उनके घर पर आए तो दरी पर ही लेट गए।
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पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने बताया कि आखिरी बार नेता जी 2014 के लोकसभा चुनाव में गजरौला आए थे। इससे पहले 2012 में विधानसभा चुनाव में नेताजी आए थे। तब असम चौराहे के पास मैदान पर उन्होंने रैली की थी। जिसमें हजारों की भीड़ जुटी थी। रैली में नेताजी ने जिले की चारों सीटों को जितवाने की अपील जनता से की थी। उस रैली का नतीजा यह निकला कि पीलीभीत की चार सीटों में से तीन पर सपा का कब्जा हो गया।
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शहर से हाजी रियाज अहमद, बरखेड़ा से हेमराज वर्मा व पूरनपुर से प्रीतमराम विधायक बने। हेमराज वर्मा बताते हैं कि नेताजी ने गरीबों को मुख्यधारा से जोड़ने का का किया। वह गरीब को भी नेता बनाने का हुनर जानते थे। किसानों के लिए उन्होंने बहुत काम किया। हमेशा सबसे परिवार की तरह मिला करते थे। पीलीभीत में दलित, यादव, ब्राह्मण, मुस्लिम सभी जातियों के प्रति उनका स्नेह था। तराई की जनता भी उन्हें बहुत प्यार करती थी। यही कारण था कि शहर सीट पर साल 2000 के बाद से हाजी रियाज अहमद लगातार तीन बार 15 साल तक विधायक रहे। जिले में तमाम नेता ऐसे हैं जिनके सामने आने पर वह सीधे नाम लेकर पुकारते थे।
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