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बड़े नेताओं के ‘करीबियों ’ को मतदाताओं ने किया दूर

Mon, 02 Nov 2015 11:46 PM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Mon, 02 Nov 2015 11:46 PM IST
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The leaders ' close ' The voters did away

जिला पंचायत सदस्य पद चुनाव में मतदाताओं ने बड़े नेताओं व पुराने सदस्यों पर कम ही भरोसा दिखाया। स्वतंत्र प्रभार मंत्री हाजी रियाज अहमद के दो भाई व एक दामाद चुनाव हार गए। गनीमत यह रही कि उनकी बेटी एवं जिपं अध्यक्ष रुकैया आरिफ ने जिले में सर्वाधिक वोटों से चुनाव जीत मंत्री की लाज बचा ली। पूरनपुर ब्लाक प्रमुख ममता भारती को भी क्षेत्र की जनता ने नकार दिया। सपा विधायक पीतमराम की दो जगह से चुनाव लड़ रहीं पुत्र वधू आरती देवी को भी एक सीट से हार का सामना करना पड़ा जबकि उनकी अनुज वधू मालती भी काटे की टक्कर से ही चुनाव जीत सकीं।

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जिला पंचायत सदस्य पद पर संपन्न चुनाव के परिणाम चौंकाने वाले रहे। अधिकांश स्थानों पर मतदाताओं ने बड़े नेताओं के सगे संबंधियों को नकार दिया। जिला पंचायत पर एक तरह से प्रदेश सरकार में मंत्री हाजी रियाज अहमद के परिवार का ही कब्जा था। उनकी बेटी रुकैया आरिफ यहां जिला पंचायत अध्यक्ष थीं। इस बार जिपं अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो गया था, लेकिन जिले के कद्दावर नेताओं में शुमार हाजी रियाज अहमद ने कुछ इस तरह चुनावी बिसात बिछाई थी कि अप्रत्यक्ष रूप से अध्यक्ष की कुर्सी उन्हीं के इशारे पर घूमे। इसके लिए उन्होंने अपने दो भाइयों जहांगीर व फरियाद हुसैन को क्रमश: 11 व पांच नंबर वार्ड से, दामाद एवं जिपं अध्यक्ष रुकैया आरिफ के पति मोहम्मद आरिफ को आठ नंबर वार्ड से तथा पुत्री एवं जिपं अध्यक्ष रुकैया आरिफ को 20 नंबर वार्ड से चुनावी मैदान में उतारा था। इसमे रुकैया को छोड़ शेष सभी चुनाव हार गए।
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दो वार्डों से चुनाव लड़ रहीं सपा विधायक पीतमराम की पुत्रवधू आरती देवी वार्ड छह से चुनाव जीत गईं, लेकिन वार्ड 26 से हार गईं। वार्ड 23 से उनकी अनुज वधू मालती देवी भी जीत गईं। इसके अलावा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष गुरदयाल सिंह तथा पूरनपुर ब्लाक प्रमुख ममता भारती भी चुनाव नहीं जीत सकीं।
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मेनका का जादू भी होने लगा कम
जिला पंचायत सदस्य पद के इस चुनाव में मेनका गांधी का जादू भी कम ही चला। भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद मेनका समर्थकों ने आपत्ति करते हुए 34 सीटों में से 33 पर नए सिरे से अपने समर्थित प्रत्याशियों की सूची जारी की थी, लेकिन इनमें से मात्र तीन उम्मीदवार महेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह टोनी व रुचि सागर ही चुनाव जीत सके।

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