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Pilibhit News: फर्म को 15 माह से नहीं मिला भुगतान, कमीशन मांगने का आरोप
Sat, 15 Jun 2024 02:37 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 15 Jun 2024 02:37 AM IST
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पीलीभीत। नगर पालिका परिषद में बने आश्रय गृह का संचालन करने वाली लखनऊ की संस्था हेल्पिंग यूथ फाउंडेशन के पीके गुप्ता ने पालिकाध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल और उनके पति आशीर्वाद अग्रवाल पर भुगतान चेक पास करने के लिए 20 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। आरोप है कि कमीशन न देने के कारण 15 माह से भुगतान नहीं हो सका है।
संस्था के पीके गुप्ता ने बताया कि उनकी संस्था नगर पालिका परिषद के आश्रय गृह का संचालन करती है। अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद से हुए अनुबंध के अनुसार एक लाख रुपये प्रति माह के हिसाब से तीन महीने का तीन लाख का भुगतान एडवांस मिलना चाहिए। एक लाख रुपये में संस्था चार कर्मचारियों और एक सफाई कर्मी का वेतन 52 हजार रुपये प्रति माह से भुगतान करती है।
इसके साथ ही बिजली का बिल 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह अदा करना होता है। संस्था को 15 महीने कार्य करते हो गए, लेकिन अभी तक एक रुपये का भुगतान पालिका की ओर से नहीं किया गया। भुगतान करने के लिए 12 लाख रुपये 10 जनवरी 2024 को डूडा की ओर से ईओ नगर पालिका परिषद के खाते में भेज दिए गए थे। संस्था को एक सप्ताह के अंदर भुगतान करके उपभोक्ता प्रमाण पत्र देने के निर्देश थे। आरोप है कि नगर पालिका परिषद में तैनात ईओ और पालिका अध्यक्ष 20 प्रतिशत कमीशन देने के बाद ही भुगतान करने की बात कर रहे हैं।
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जिलाधिकारी ने भी दिए थे निर्देश
संस्था संचालक का यह भी आरोप है कि जिलाधिकारी ने ईओ को भुगतान करने के निर्देश दिए थे। संस्था का तीन लाख रुपये का एक चेक 17 फरवरी को ही बन गया। दूसरा चेक 9 लाख का भी बन गया। उस पर तिथि अंकित नहीं की गई। संस्था संचालक ने आरोप लगाया कि पालिका अध्यक्ष के पति आशीर्वाद अग्रवाल ने 20 प्रतिशत के हिसाब से 2.40 लाख रुपये की रिश्वत की मांगी है। रुपये न देने पर चेक आगे नहीं बढ़ाए।
अध्यक्ष ने कहा मेरे हस्ताक्षर के बिना नहीं होगा भुगतान
नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल ने कहा कि अध्यक्ष की शक्तियां हैं, आरोप जो चाहे लगाए। ईओ के हस्ताक्षर से क्या होता है, अध्यक्ष के हस्ताक्षर जरूरी हैं। जब चेक पास किया गया था। उस दौरान ईओ की नई तैनाती हुई ही थी। उन्होंने रुटीन कार्य में चेक पर हस्ताक्षर कर दिए। आश्रय गृह में कई खामियां मिली थी।
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संस्था के पीके गुप्ता ने बताया कि उनकी संस्था नगर पालिका परिषद के आश्रय गृह का संचालन करती है। अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद से हुए अनुबंध के अनुसार एक लाख रुपये प्रति माह के हिसाब से तीन महीने का तीन लाख का भुगतान एडवांस मिलना चाहिए। एक लाख रुपये में संस्था चार कर्मचारियों और एक सफाई कर्मी का वेतन 52 हजार रुपये प्रति माह से भुगतान करती है।
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इसके साथ ही बिजली का बिल 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह अदा करना होता है। संस्था को 15 महीने कार्य करते हो गए, लेकिन अभी तक एक रुपये का भुगतान पालिका की ओर से नहीं किया गया। भुगतान करने के लिए 12 लाख रुपये 10 जनवरी 2024 को डूडा की ओर से ईओ नगर पालिका परिषद के खाते में भेज दिए गए थे। संस्था को एक सप्ताह के अंदर भुगतान करके उपभोक्ता प्रमाण पत्र देने के निर्देश थे। आरोप है कि नगर पालिका परिषद में तैनात ईओ और पालिका अध्यक्ष 20 प्रतिशत कमीशन देने के बाद ही भुगतान करने की बात कर रहे हैं।
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जिलाधिकारी ने भी दिए थे निर्देश
संस्था संचालक का यह भी आरोप है कि जिलाधिकारी ने ईओ को भुगतान करने के निर्देश दिए थे। संस्था का तीन लाख रुपये का एक चेक 17 फरवरी को ही बन गया। दूसरा चेक 9 लाख का भी बन गया। उस पर तिथि अंकित नहीं की गई। संस्था संचालक ने आरोप लगाया कि पालिका अध्यक्ष के पति आशीर्वाद अग्रवाल ने 20 प्रतिशत के हिसाब से 2.40 लाख रुपये की रिश्वत की मांगी है। रुपये न देने पर चेक आगे नहीं बढ़ाए।
अध्यक्ष ने कहा मेरे हस्ताक्षर के बिना नहीं होगा भुगतान
नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. आस्था अग्रवाल ने कहा कि अध्यक्ष की शक्तियां हैं, आरोप जो चाहे लगाए। ईओ के हस्ताक्षर से क्या होता है, अध्यक्ष के हस्ताक्षर जरूरी हैं। जब चेक पास किया गया था। उस दौरान ईओ की नई तैनाती हुई ही थी। उन्होंने रुटीन कार्य में चेक पर हस्ताक्षर कर दिए। आश्रय गृह में कई खामियां मिली थी।