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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   The doors were closed and police stations the day in hiding

दिन छिपते ही तब बंद हो जाते थे थानों के दरवाजे

Sat, 02 Apr 2016 12:46 AM IST
पीलीभीत, ब्यूरो
पीलीभीत, ब्यूरो Updated Sat, 02 Apr 2016 12:46 AM IST
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 बात सन 1991 की है। तब तराई में आतंकवाद का दौर था। शुरू में पंजाब से आए कुछ आतंकवादियों ने तराई के सिखों में अपनी पैठ बनाने के लिए पहले उन्हें धार्मिक आधार पर कट्टर बनाने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने महिलाओं के पहनावे से लेकर शृंगार तक पर अंकुश लगाया। बारात में अधिक लोगों के ले जाने से लेकर दान दहेज तक की मनाही की। इससे तमाम कट्टरपंथी सिख उनके संपर्क में भी आए। फिर पहले राजी खुशी मदद लेने का दौर चला जब पुलिस की सख्ती से सिखों ने हाथ खींचने शुरू किए तो आतंकवादियों ने जबरिया उनके घरों में पनाह, रुपये पैसे लेने से लेकर भोजन तक की व्यवस्था कराई।
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जब उन्हें पंजाब जाना होता था अथवा पंजाब से वापस तराई के इलाकों में आना होता था तब वह कभी राजी तो कभी जबरिया तीर्थ यात्रियों के जत्थे में शामिल हो जाते थे। सूत्र बताते हैं कि उस दौरान तराई में हालात कुछ ऐसे बने कि तराई का सिख दो चाकों के बीच में पिसने लगा था। आतंकवादी संगीन के बल पर उनके घरों में पनाह और मदद लेते थे। उनके जाने के बाद जब पुलिस को भनक लगती थी तो वह उनसे उगाही से लेकर थर्ड डिग्री तक इस्तेमाल करती थी। टाडा जैसा गंभीर आरोप लगा जेल में ठूंस देती थी। अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकवादियों की दहशत तराई में इस कदर थी कि डीएम-एसपी तक अपनी गाड़ी में नेम प्लेट लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। थाने के दरवाजे दिन ढलते ही बंद हो जाते थे। आतंकवादियों की यह दहशत सहज ही नहीं बनी थी। इसके लिए आतंकवादियों ने न्यूरिया थाना क्षेत्र के मंडरिया गांव में 14 निर्दोष ग्रामीणों को, धनकुना अड्ड़ा पर 11 निर्दोषों को, घुंघचाई क्षेत्र में कटरुआ बीनने गए 29 ग्रामीणों समेत दर्जनों पुलिस वालों को गोलियों से छलनी कर दिया था। तराई का यह आतंकवाद तब कमजोर पड़ा जब यहां के सिखों ने कहीं स्वयं मोर्चा लिया तो कहीं पुलिस की मदद ली।
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सिख फार्मर के दो गैर सिख नौकरों ने खोला था राज
फर्जी मुठभेड़ में हत्या का राज माधोटांडा रोड स्थित रिछोला निवासी सिख फार्मर हरजिंदर सिंह कहलो के दो नौकरों ने खोला था। इन दोनों नौकरों के नाम क्रमश: मनोहर लाल व रामकुमार हैं। खास बात यह है कि इन दोनों नौकरों तथा उनके फार्मर मालिक तीनों लोग घटना के चश्मदीद गवाह बने तथा तमाम धमकियों के बाद भी अंत तक पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सीबीआई कोर्ट में खम ठोक कर गवाही दी। उनकी गवाही व सीबीआई जांच में जुटाए गए अन्य साक्ष्य ही आरोपी पुलिस कर्मियों को कुसूरवार ठहराने में सहायक साबित हुए। इन दोनों नौकरों ने रिछोला पुलिस चौकी पर इन सिख तीर्थ यात्रियों के पुलिस अभिरक्षा में जीवित देखने का साक्ष्य दिया था।
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हरजिंदर सिंह कहलो ने उठाई आवाज 
सिख फार्मर हरजिंदर सिंह कहलो को पहले उनके नौकरों ने यह बात बताई। इसके बाद हरजिंदर सिंह कहलो ने भी उन तीर्थ यात्रियों को पुलिस अभिरक्षा में रिछोला पुलिस चौकी पर जीवित देखा। उसमे अमरिया निवासी पछतौर सिंह, नरेेंद्र सिंह, समेत करीब चार-पांच लोगों को वह पहचानते भी थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में घटना के बाद पीआईएल दायर कराने को पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर घटना की सीबीआई जांच हुई।



01पीबीटीपी39 
हरजिंदर सिंह कहलो को खतरा बढ़ा
मामले में सिख नेताओं को बुलाकर सभा कराने से लेकर मामले को हाईलाइट कराने में अहम भूमिका निभाने वाले हरजिंदर सिंह कहलो ने मुकदमे के दौरान अपनी जान को खतरा बताया था। तब काफी समय तक कहलो को सुरक्षा भी न्यायालय के आदेश पर मिली। कहलो कहते हैं कि मामले में पुलिस वाले मुल्जिम है। जो निरंतर धमका रहे हैं। अब सजा के बाद उन्हें और खतरा बढ़ गया है।
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