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वित्त नियंत्रक के निर्देश पर टीओ लखीमपुर ने शुरू की जांच
पीलीभीत।
Updated Tue, 25 Jul 2017 07:07 PM IST
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T.O. Lakhimpur checks on the instructions of finance controller
- फोटो : T.O. Lakhimpur checks on the instructions of finance controller
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बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में व्याप्त अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी गई। वित्त नियंत्रक इलाहाबाद के निर्देश पर लखीमपुर के वित्त एवं लेखाधिकारी ने मंगलवार को लेखाधिकारी कार्यालय में पहुंचकर मामले की जांच की।
प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर वित्त एवं लेखा कार्यालय बेसिक शिक्षा में भ्रष्टाचार व अनियमितताओं की शिकायत की थी। भेजे पत्र में कहा गया था कि शिक्षकों के वेतन से फंड के नाम पर काटी जाने वाली धनराशि का ब्योरा (लेखापर्ची) प्रत्येक वर्ष दी जानी चाहिए, लेकिन पिछले दो वर्ष वित्तीय वर्षों से लेखा पर्ची नहीं दी जा रही है। ऐसे में वेतन से काटी गई करोड़ों की धनराशि कहां है, यह जांच का विषय है। कहा गया कि जब कोई शिक्षक अपने भविष्य निधि से लोन लेता है तो केवल उसका ही खाता गलत तरीके से अपडेट कर दो तीन महीने बाद लोन मिल पाता है। ऐसे में कई शिक्षकों को अपनी पुत्रियों की शादी के लिए लोन नहीं मिल सका। पत्र में सहायक लेखाकार पर भी अवैध वसूली करने का आरोप लगाया गया था। इधर मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा ने जांच के आदेश किए थे। वित्त नियंत्रक इलाहाबाद के निर्देश पर मंगलवार को लखीमपुर के वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने लेखाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान उन्होंने कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों आदि के बयान भी लिए। शासन के निर्देश पर शुरू हुई जांच को लेकर लेखाधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों के चेहरों पर हवाईयां उड़ती नहजर आई।
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प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर वित्त एवं लेखा कार्यालय बेसिक शिक्षा में भ्रष्टाचार व अनियमितताओं की शिकायत की थी। भेजे पत्र में कहा गया था कि शिक्षकों के वेतन से फंड के नाम पर काटी जाने वाली धनराशि का ब्योरा (लेखापर्ची) प्रत्येक वर्ष दी जानी चाहिए, लेकिन पिछले दो वर्ष वित्तीय वर्षों से लेखा पर्ची नहीं दी जा रही है। ऐसे में वेतन से काटी गई करोड़ों की धनराशि कहां है, यह जांच का विषय है। कहा गया कि जब कोई शिक्षक अपने भविष्य निधि से लोन लेता है तो केवल उसका ही खाता गलत तरीके से अपडेट कर दो तीन महीने बाद लोन मिल पाता है। ऐसे में कई शिक्षकों को अपनी पुत्रियों की शादी के लिए लोन नहीं मिल सका। पत्र में सहायक लेखाकार पर भी अवैध वसूली करने का आरोप लगाया गया था। इधर मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा ने जांच के आदेश किए थे। वित्त नियंत्रक इलाहाबाद के निर्देश पर मंगलवार को लखीमपुर के वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने लेखाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान उन्होंने कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों आदि के बयान भी लिए। शासन के निर्देश पर शुरू हुई जांच को लेकर लेखाधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों के चेहरों पर हवाईयां उड़ती नहजर आई।
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