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कारगिल में शहीद होकर सुरेंद्र सिंह ने चुकाया था मातृभूमि का कर्ज

Tue, 26 Jul 2022 12:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2022 12:01 AM IST
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Surendra Singh had paid the debt of the motherland by giving martyrdom
कारगिल शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा का फाइल फोटो। - फोटो : PILIBHIT
पूरनपुर। हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाणा को याद किया जाता है। वह 23 साल पहले कारगिल की लड़ाई में शहीद हुए थे। जांबाज को खोने वाले परिवार के सदस्यों का सीना अब भी गर्व से चौड़ा हो जाता है, जब लोग उनकी बहादुरी को नमन करते हैं।
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क्षेत्र के गांव रुदपुर हरीपुर में बलागर सिंह के घर चार जनवरी, 1961 को जन्मे शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा 18 अगस्त, 1989 में सेना की सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन रक्षक के तहत जम्मू-कश्मीर के द्रास सेक्टर में उनकी तैनाती की गई थी। दस दिन के भीतर पाकिस्तानी घुसपैठियों से सिख रेजीमेंट की तीन मुठभेड़ हुईं। 29 मई, 1999 को वतन की रक्षा के लिए सुरेंद्र सिंह लवाणा शहीद हो गए थे। सुरेंद्र सिंह को उच्च सेवा मेडल, सिंह सेवा मेडल से पुरस्कृत किया गया था।
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शहीद की पत्नी गुरमीत कौर ने पति के शहीद होने की पीड़ा सहते हुए पूरा ध्यान बच्चों की परवरिश पर लगा दिया। लवाणा अक्सर कहा करते थे कि अपने दोनों बेटों को फौज में भर्ती कराएंगे। गुरमीत ने भी बेटों को बचपन से ही फौज में शामिल होने की प्रेरणा दी। सेना के कुछ अफसर उनके दोनों बेटों को सैनिक स्कूल में भर्ती कराने के लिए अपने साथ ले गए थे। हालांकि सैनिक स्कूल उन्हें रास नहीं आया और घर लौट आए।
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शहीद की याद आते ही उनके परिजन के दिल में आज भी टीस होती है। गुरमीत कौर कहती है कि पति के शहीद होने पर गर्व है। पति की वजह से आज समाज में उनकों सम्मान मिल रहा है। पुत्री पलविंदर कौर कहती हैं कि पिता के त्याग को कभी नहीं भुलाया जा सकता। समाज में पिता के त्याग पर ही सम्मान मिल रहा है।
हादसे में चली गई बड़े बेटे की जान
शहीद के परिवार में पत्नी के अलावा पुत्र रेशम सिंह, पुत्रवधू, पौत्री जैयस, वानी, परी, बड़े पुत्र सुखविंदर सिंह की विधवा पत्नी सतनाम कौर, पौत्र गुरप्रीत सिंह, वीरेंद्र सिंह, पुत्री नरेंद्र कौर, पलविंदर कौर हैं। बड़ी पुत्री नरेंद्र कौर की शादी हो चुकी है। बड़े पुत्र सुखविंदर सिंह की करीब नौ साल पहले एक हादसे में जान चली गई थी।
पिता व दो भाइयों ने भी की फौज में सेवा
शहीद सुरेंद्र सिंह लवाणा के पिता बलागर सिंह, बड़े भाई रंजीत सिंह, अमरजीत सिंह ने भी फौज में रहकर देश की सेवा की।
अग्निपथ योजना से सहमत नहीं है बेटी
हवलदार सुरेंद्र सिंह लवाड़ा की बेटी पलविंदर कौर ने कहा कि सरकार की ओर कारगिल शहीदों के लिए जो वायदे किए थे वे पूरे हो चुके हैं। उनके पिता के लिए सरकार ने सम्मान दिया और पेट्रोल पंप देकर रोजगार का साधन भी दिया है। उनसे पूछा गया कि हाल में ही सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना लाई गई है? इस पर उन्होंने कहा कि वह इस योजना से कतई असहमत हैं क्योंकि इसमें सिर्फ चार वर्ष की सर्विस मिलेगी और चार वर्ष कब गुजर जाएंगे पता ही नहीं चलेगा।

कारगिल शहीद सुरेंद्र सिंह को याद किया
पीलीभीत। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के कार्यालय में कारगिल के शहीद सुरेंद्र सिंह लवाड़ा को याद किया गया। सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल वीर भंडारी ने जिस समय सुरेंद्र सिंह की वीरगाथा सुनाई। उस समय उनकी शहीद की पत्नी गुरमीत कौर भावुक हो उठीं। जब सैनिकों ने आग्रह किया वे भी कुछ बोलें तो उनके मुंह से शब्द नहीं निकल सके। उन्होंने पति के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर नमन किया। संवाद
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