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चुनाव से पहले ही बिखरा संयुक्त मोर्चा
पूरनपुर, पीलीभीत।
Updated Tue, 02 Feb 2016 12:05 AM IST
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ब्लाक प्रमुख चुनाव में सपा प्रत्याशी के खिलाफ साझा उम्मीदवार उतारने के लिए बना संयुक्त मोर्चा सोमवार को बिखर गया। मोर्चा में शामिल असलम कुरैशी अपने लोगों के साथ जरनैल सिंह के खेमे मेें शामिल हो गए। उन्होंने अचानक सपा प्रत्याशी राजप्रीत कौर को समर्थन देने की घोषणा कर दी।
ब्लाक प्रमुख चुनाव के लिए सपा से जनरैल सिंह जैली की पुत्रवधू राजप्रीत कौर का नाम घोषित होने के बाद से ही सपा से टिकट पाने की लाइन में लगे लोगों ने विरोध शुरू कर दिया था। ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ने के इच्छुक सभी लोग एक मंच पर आ गए थे। एक सप्ताह पहले सहकारी गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मीकांत भारद्वाज के आवास पर हुई बैठक के बाद संयुक्त मोर्चा का गठन कर सपा प्रत्याशी को एकजुट होकर हराने का निर्णय लिया गया था। तय किया गया था कि असलम कुरैशी की क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुई पुत्री अरसी असलम समेत दो-तीन लोगों का नामांकन कराया जाएगा बाद में आपसी सहमति के बाद एक नाम को छोड़ शेष वापस ले लिए जाएंगे तथा सभी एकजुट होकर सपा प्रत्याशी को हराने का काम करेंगे, लेकिन सप्ताह भर बाद सोमवार को संयुक्त मोर्चा धड़ाम हो गया। मोर्चा के अगुवाकार पूर्व जिला पंचायत सदस्य असलम कुरैशी ने जरनैल सिंह जैली से सोमवार को हाथ मिला लिया। कस्बे के महादेव एन्क्लेव में हुई प्रेस वार्ता में असलम कुरैशी ने अपने लोगों के साथ जरनैल सिंह जैली की पुत्रवधू को समर्थन की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू जब बसपा में थे तब उन्होंने सपा प्रत्याशी के विरोध मेें चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। संयुक्त मोर्चा ने जिम्मेदारी से काम शुरू नहीं किया। इसके अलावा फूलबाबू के निर्देश पर अब पुत्री को चुनाव न लड़ाने का निर्णय लिया है। उनके निर्देश पर ही अब सपा नेता जनरैल सिंह जैली की पुत्रवधू को समर्थन दिया है। उधर, मोर्चा के लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने बताया कि चुनाव को लेकर सभी स्वतंत्र हैं उनका गुट चुनाव लड़ेगा। असलम कुरैशी के गुट से अलग हो जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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ब्लाक प्रमुख चुनाव के लिए सपा से जनरैल सिंह जैली की पुत्रवधू राजप्रीत कौर का नाम घोषित होने के बाद से ही सपा से टिकट पाने की लाइन में लगे लोगों ने विरोध शुरू कर दिया था। ब्लाक प्रमुख का चुनाव लड़ने के इच्छुक सभी लोग एक मंच पर आ गए थे। एक सप्ताह पहले सहकारी गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मीकांत भारद्वाज के आवास पर हुई बैठक के बाद संयुक्त मोर्चा का गठन कर सपा प्रत्याशी को एकजुट होकर हराने का निर्णय लिया गया था। तय किया गया था कि असलम कुरैशी की क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुई पुत्री अरसी असलम समेत दो-तीन लोगों का नामांकन कराया जाएगा बाद में आपसी सहमति के बाद एक नाम को छोड़ शेष वापस ले लिए जाएंगे तथा सभी एकजुट होकर सपा प्रत्याशी को हराने का काम करेंगे, लेकिन सप्ताह भर बाद सोमवार को संयुक्त मोर्चा धड़ाम हो गया। मोर्चा के अगुवाकार पूर्व जिला पंचायत सदस्य असलम कुरैशी ने जरनैल सिंह जैली से सोमवार को हाथ मिला लिया। कस्बे के महादेव एन्क्लेव में हुई प्रेस वार्ता में असलम कुरैशी ने अपने लोगों के साथ जरनैल सिंह जैली की पुत्रवधू को समर्थन की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू जब बसपा में थे तब उन्होंने सपा प्रत्याशी के विरोध मेें चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। संयुक्त मोर्चा ने जिम्मेदारी से काम शुरू नहीं किया। इसके अलावा फूलबाबू के निर्देश पर अब पुत्री को चुनाव न लड़ाने का निर्णय लिया है। उनके निर्देश पर ही अब सपा नेता जनरैल सिंह जैली की पुत्रवधू को समर्थन दिया है। उधर, मोर्चा के लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने बताया कि चुनाव को लेकर सभी स्वतंत्र हैं उनका गुट चुनाव लड़ेगा। असलम कुरैशी के गुट से अलग हो जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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