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कोच ही नहीं... कई खेलों के लिए पंजीकरण बंद
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पीलीभीत। खेल के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश का नाम रोशन करने की तमन्ना रखने वाले खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन जरूरत है उन्हें निखारने की। होनहार युवा अपने सपने पूरा करना चाहते हैं मगर उनके सपने जिले के इकलौते गांधी स्टेडियम में पहुंचते ही दम तोड़ने लगते हैं। वजह, स्टेडियम में संसाधनों की कमी और लक्ष्य प्राप्ति में सहायक बनने वाले कोच का न होना है। कोच की कमी की वजह से कई खेलों में खिलाड़ियों के पंजीकरण तक बंद हो गए हैं।
गांधी स्टेडियम में सुबह से शाम तक खेलने के लिए खिलाड़ियों का जमघट लगा रहता है लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। वर्तमान में यहां प्रशिक्षकों के चार पद खाली है। अगर स्टेडियम में खिलाड़ियों की स्थिति पर नजर डाली जाए तो कोच की सुविधा न होने से क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेबिल टेनिस के खिलाड़ियों का पंजीकरण ही बंद हो गया। अन्य खेलों के लिए कुल 165 खिलाड़ी पंजीकृत हैं। जिसमें से 15 खिलाड़ियों ने शौकिया तौर पर खेलने के लिए पंजीकरण कराए हैं, जबकि 150 खिलाड़ी ऐसे हैं जो शिविरों में भाग लेने के लिए पंजीकरण कराते हैं।
स्टेडियम की स्थिति
शहर में वर्ष 1986 में 11 एकड़ भूमि पर स्टेडियम की स्थापना की गई थी। यहां आउटडोर गेम के रूप में एथलेटिक्स ट्रैक, क्रिकेट मैदान, हॉकी, फुटबाल और वॉलीबॉल मैदान मौजूद हैं। इंडोर गेम के नाम पर एक जिम है। बहुउद्देशीय क्रीड़ा हाल भी बनाया गया है। इसमें बैडमिंटन और टेबिल टेनिस की व्यवस्था की गई है।
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कोच की स्थिति
खेल कोच की संख्या
फुटबॉल 1
एथलीट 1
जिम 1
तैराकी 1
ताइक्वांडो 1
वेटलिफ्टिंग 0
हॉकी 0
क्रिक्रेट 0
वॉलीबॉल 0
बैडमिंटन 0
टेबिल टेनिस 0
पंजीकृत खिलाड़ी
जिम 15
एथलीट 40
तैराकी 30
फुटबॉल 40
ताईक्वांडो 40
बरसात में तालाब बन जाता है स्टेडियम
बरसात के मौसम में ग्राउंड की साफ सफाई तथा जलनिकासी की व्यवस्था बेहतर न होने खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बारिश होने से स्टेडियम तालाब में बदल जाता है।
‘स्टेडियम में कोच की कमी है। इसको लेकर पत्राचार भी किए गए। कोच के लिए ट्रायल हुए हैं लेकिन अभी नियुक्ति नहीं हो पाई है।’
- राज कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी
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गांधी स्टेडियम में सुबह से शाम तक खेलने के लिए खिलाड़ियों का जमघट लगा रहता है लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। वर्तमान में यहां प्रशिक्षकों के चार पद खाली है। अगर स्टेडियम में खिलाड़ियों की स्थिति पर नजर डाली जाए तो कोच की सुविधा न होने से क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेबिल टेनिस के खिलाड़ियों का पंजीकरण ही बंद हो गया। अन्य खेलों के लिए कुल 165 खिलाड़ी पंजीकृत हैं। जिसमें से 15 खिलाड़ियों ने शौकिया तौर पर खेलने के लिए पंजीकरण कराए हैं, जबकि 150 खिलाड़ी ऐसे हैं जो शिविरों में भाग लेने के लिए पंजीकरण कराते हैं।
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स्टेडियम की स्थिति
शहर में वर्ष 1986 में 11 एकड़ भूमि पर स्टेडियम की स्थापना की गई थी। यहां आउटडोर गेम के रूप में एथलेटिक्स ट्रैक, क्रिकेट मैदान, हॉकी, फुटबाल और वॉलीबॉल मैदान मौजूद हैं। इंडोर गेम के नाम पर एक जिम है। बहुउद्देशीय क्रीड़ा हाल भी बनाया गया है। इसमें बैडमिंटन और टेबिल टेनिस की व्यवस्था की गई है।
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कोच की स्थिति
खेल कोच की संख्या
फुटबॉल 1
एथलीट 1
जिम 1
तैराकी 1
ताइक्वांडो 1
वेटलिफ्टिंग 0
हॉकी 0
क्रिक्रेट 0
वॉलीबॉल 0
बैडमिंटन 0
टेबिल टेनिस 0
पंजीकृत खिलाड़ी
जिम 15
एथलीट 40
तैराकी 30
फुटबॉल 40
ताईक्वांडो 40
बरसात में तालाब बन जाता है स्टेडियम
बरसात के मौसम में ग्राउंड की साफ सफाई तथा जलनिकासी की व्यवस्था बेहतर न होने खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बारिश होने से स्टेडियम तालाब में बदल जाता है।
‘स्टेडियम में कोच की कमी है। इसको लेकर पत्राचार भी किए गए। कोच के लिए ट्रायल हुए हैं लेकिन अभी नियुक्ति नहीं हो पाई है।’
- राज कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी