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कहीं अमरिया को कॉरिडोर तो नहीं समझ रहे बाघ, जानने में जुटा विभाग
सार
बीस किलोमीटर के दायरे में सूरजपुर, पैरीफार्म समेत कई इलाकों में बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। अमरिया में मिल रहा बाघों को अनुकूल माहौलदुधवा, कर्तनिया टाइगर रिजर्व में रह चुके पीयूष मोहन का कहना है कि अमरिया में बाघों के जंगल से बाहर आने की घटनाओं देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बाघ यहां खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टेरिटरी में बाघ चिह्नित इलाके और रास्ते से ही चहलकदमी करता है, मगर अमरिया में बाघ एक इलाके और एक रास्ते का इस्तेमाल न कर दूसरे क्षेत्र से भी आ जा रहा है।
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मझोला की सड़कों पर घूमता बाघ।
विस्तार
पिछले छह महीने से लगातार अमरिया क्षेत्र में ही दिख रहे बाघ
10 कैमरे लगाए, रेंजर ने शुरू किया बाघों के स्वभाव पर अध्ययन
पीलीभीत। जंगल से बाहर अमरिया क्षेत्र में घूम रहे बाघों की वर्तमान स्थिति और स्वभाव जानने की कवायद शुरू हुई है। सामाजिक वानिकी रेंजर के नेतृत्व में एक टीम इस कार्य में जुटी है। बाघ के चहलकदमी करने का दायरा और रास्ता चिह्नित करने के लिए दस कैमरे भी लगाए गए हैं।
अमरिया में सबसे पहले 2016 से बाघों की चहलकदमी शुरू हुई थी। शुरुआत में एक-दो बाघ ही देखे गए थे, मगर कुछ समय बाद ये बाघ खेतों में आने लगे। बाद में उन्होंने यहां रुकना भी शुरू कर दिया। 2020 तक धीरे-धीरे एक-दो से बढ़कर इनकी संख्या आठ हो गई। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो 2020 के बाद अमरिया क्षेत्र में जंगल से बाहर आने वाले बाघों की संख्या कम हो गई।
दो साल पहले यह कयासबाजी शुरू हो गई कि बाघ वापस जंगल में लौट गए हैं। इधर, पिछले छह माह से अमरिया क्षेत्र में बाघ फिर से दिखने लगे हैं। बीस किलोमीटर के दायरे में सूरजपुर, पैरीफार्म समेत कई इलाकों में बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। दिन के अलावा रात में बाघों के घूमने से लोगों में दहशत बढ़ गई है। 20 से अधिक जानवर इन बाघों का शिकार बने। इसके बाद विभाग ने निगरानी बढ़ा दी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकाल सके। इधर, लखनऊ से तबादले के बाद यहां आए सामाजिक वानिकी विभाग के रेंजर पीयुष मोहन श्रीवास्तव ने अमरिया के बाघों को लेकर अध्ययन शुरू किया है।
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अमरिया में मिल रहा बाघों को अनुकूल माहौल
दुधवा, कर्तनिया टाइगर रिजर्व में रह चुके पीयूष मोहन का कहना है कि अमरिया में बाघों के जंगल से बाहर आने की घटनाओं देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बाघ यहां खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उसकी वजह यहां फार्म हाउस काफी बड़े होना संभव है। गन्ने का रकबा काफी है। पानी की भरपूर सुविधा है। उन्होंने बताया कि टेरिटरी में बाघ चिह्नित इलाके और रास्ते से ही चहलकदमी करता है, मगर अमरिया में बाघ एक इलाके और एक रास्ते का इस्तेमाल न कर दूसरे क्षेत्र से भी आ जा रहा है। ऐसे में यह देखना होगा कि बाघ बाहरी इलाके को अपना कॉरिडोर या घर तो नहीं मान रहे हैं।
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10 कैमरे लगाए, रेंजर ने शुरू किया बाघों के स्वभाव पर अध्ययन
पीलीभीत। जंगल से बाहर अमरिया क्षेत्र में घूम रहे बाघों की वर्तमान स्थिति और स्वभाव जानने की कवायद शुरू हुई है। सामाजिक वानिकी रेंजर के नेतृत्व में एक टीम इस कार्य में जुटी है। बाघ के चहलकदमी करने का दायरा और रास्ता चिह्नित करने के लिए दस कैमरे भी लगाए गए हैं।
अमरिया में सबसे पहले 2016 से बाघों की चहलकदमी शुरू हुई थी। शुरुआत में एक-दो बाघ ही देखे गए थे, मगर कुछ समय बाद ये बाघ खेतों में आने लगे। बाद में उन्होंने यहां रुकना भी शुरू कर दिया। 2020 तक धीरे-धीरे एक-दो से बढ़कर इनकी संख्या आठ हो गई। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो 2020 के बाद अमरिया क्षेत्र में जंगल से बाहर आने वाले बाघों की संख्या कम हो गई।
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दो साल पहले यह कयासबाजी शुरू हो गई कि बाघ वापस जंगल में लौट गए हैं। इधर, पिछले छह माह से अमरिया क्षेत्र में बाघ फिर से दिखने लगे हैं। बीस किलोमीटर के दायरे में सूरजपुर, पैरीफार्म समेत कई इलाकों में बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। दिन के अलावा रात में बाघों के घूमने से लोगों में दहशत बढ़ गई है। 20 से अधिक जानवर इन बाघों का शिकार बने। इसके बाद विभाग ने निगरानी बढ़ा दी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकाल सके। इधर, लखनऊ से तबादले के बाद यहां आए सामाजिक वानिकी विभाग के रेंजर पीयुष मोहन श्रीवास्तव ने अमरिया के बाघों को लेकर अध्ययन शुरू किया है।
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अमरिया में मिल रहा बाघों को अनुकूल माहौल
दुधवा, कर्तनिया टाइगर रिजर्व में रह चुके पीयूष मोहन का कहना है कि अमरिया में बाघों के जंगल से बाहर आने की घटनाओं देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बाघ यहां खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उसकी वजह यहां फार्म हाउस काफी बड़े होना संभव है। गन्ने का रकबा काफी है। पानी की भरपूर सुविधा है। उन्होंने बताया कि टेरिटरी में बाघ चिह्नित इलाके और रास्ते से ही चहलकदमी करता है, मगर अमरिया में बाघ एक इलाके और एक रास्ते का इस्तेमाल न कर दूसरे क्षेत्र से भी आ जा रहा है। ऐसे में यह देखना होगा कि बाघ बाहरी इलाके को अपना कॉरिडोर या घर तो नहीं मान रहे हैं।