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Pilibhit News: यात्री शेड बने शोपीस, यहां तो बसें रुकती ही नहीं
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शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर पड़ी बेंच। संवाद
शहर के छह स्थानों में एक-दो जगह ही यात्री शेड, लाखों खर्च के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालत बदतर, सुविधाएं अधूरी
पीलीभीत। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रियों की सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए यात्री शेड अब महज शोपीस बनकर रह गए हैं। ऐसे में यात्री शेड होने के बावजूद लोगों को सड़क किनारे खड़े होकर रोडवेज बसों का इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में भी सांसद और विधायकों की निधि से बनाए गए कई यात्री शेड उपयोग के अभाव में बेकार पड़े हैं। संवाद न्यूज एजेंसी ने जब इसको लेकर पड़ताल की तो यह स्थिति सामने आई।
शहर के विभिन्न मार्गों पर यात्रियों की सुविधा के लिए यात्री शेड बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य यात्रियों को धूप और बारिश से बचाव के साथ बसों का सुरक्षित ठहराव उपलब्ध कराना है। निर्माण के समय इन स्थानों पर यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी, मगर रोडवेज बसों के निर्धारित ठहराव नहीं होने से यात्री शेड का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो रहा है।
शहर में करीब छह स्थानों पर यात्री शेड बनाए गए हैं, लेकिन इनमें भी सुविधाएं आधी-अधूरी है। शहर के कई यात्री शेड के आसपास यात्रियों की भीड़ तो नजर आती है, लेकिन बसें वहां रुकने के बजाय आगे निकल जाती हैं। बस पकड़ने के लिए यात्रियों को सड़क तक पहुंचना पड़ता है। इससे खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को परेशानी होती है। कई बार बस चालक सड़क पर ही यात्रियों को उतारते या बैठाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
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ग्रामीण इलाकों में भी जनप्रतिनिधियों की निधि से जगह-जगह यात्री शेड बनवाए गए हैं। इनमें कई यात्री शेड ऐसे स्थानों पर हैं, जहां बसों का नियमित ठहराव नहीं है। नतीजतन, लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए यात्री शेड यात्रियों के काम नहीं आ रहे हैं। कई जगह इनका इस्तेमाल दूसरे कार्यों में भी होता दिखाई देता है। संवाद
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शहर के इन स्थानों पर बसों का है ठहराव
शहर के असम चौराहा, टाइगर तिराहा, ट्रांसपोर्ट नगर, नौगवां चौराहा, छतरी चौराहा, टाइगर तिराहा, गौहनिया चौराहा, अस्पताल तिराहा, नकटादाना चौराहा, कलेक्ट्रेट तिराहा, एकता सरोवर पार्क पर बस रोके जाने का प्रावधान है। इसके बाद इन स्थानों पर यात्री दिखने पर ही बसों को रोका जाता है, लेकिन ठहराव नहीं किया जा रहा है।
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सीट को लगवाया, भूल गए अन्य सुविधाएं देना
शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर बस का ठहराव होने का एक प्वाइंट है। इस प्वाइंट पर यात्रियों की सुविधाएं के महज एक बेंच को डाला गया है, जबकि बरसात से बचने के लिए वहां पर कोई भी सुविधा नहीं की गई। यहां पर बसों का ठहराव भी नहीं किया जा रहा है।
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मुख्य चौराहे होने के बाद भी महज एक ही सीट पर हजारों यात्री
शहर के नौगवां चौराहे से ही बसों का संचालन किया जाता है। इस चौराहे से विभिन्न प्रमुख मार्गों के लिए बसों का संचालन किया जाता है। चौराहे पर यात्रियों की सुविधाओं के लिए महज एक सीट लगाई गई है। इससे यात्रियों को परेशानी होती है।
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एकता सरोवर पर बना यात्री शेड पर निजी बस संचालकों का कब्जा
शहर के रोडवेज बस अड्डे के निकट एकता सरोवर पार्क के पास यात्रियों की सुविधा व बस के ठहराव के लिए यात्री शेड बनाया गया है। इस यात्री शेड पर निजी बस संचालकों का कब्जा है। रोडवेज की बसों को आगे पीछे लगाया जाता है। इसके बाद भी जिम्मेदार अनजान है।
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आंधी बारिश में टूट गया यात्री शेड, फिर भी नहीं हट सका मलबा
बरखेड़ा कस्बे के बजाज चीनी मिल के समीप यात्री शेड को बनवाया गया था, जिससे यहां पर बसों का ठहराव हो, लेकिन बसों का ठहराव तो नहीं हो सका। आंधी बारिश में यात्री शेड ही क्षतिग्रस्त हो गया। विभागीय अफसरों ने भी इस मलबे को हटवाना उचित नहीं समझा।
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क्या बोले लोग
बीसलपुर मार्ग पर जहां-जहां यात्री शेड बने हैं। वहां पर एक भी बस का ठहराव नहीं होता है। लोगों को आज भी बसों के लिए यहां-वहां भटकना पड़ता है।
- वीरेंद्र कुमार।
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यात्री शेड बनवाए जाने के नाम पर सिर्फ रुपया बहाया जा रहा है, जबकि सुवधिाओं के नाम पर वहां पर कुछ नहीं है। कोई भी बसें बने हुए यात्री शेड पर नहीं रुकती हैं। -नरेंद्र कुमार
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शहर व ग्रामीण इलाकों में जहां भी यात्री शेड बनाए गए है। वहां बसों का रुकना अनिवार्य है। यदि कहीं कोई चालक बसें नहीं रोकता है तो इसकी चेकिंग की जाएगी। चेकिंग में जिसकी भी लापरवाही मिलेगी। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- विपुल पाराशर, एआरएम, रोडवेज
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पीलीभीत। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक यात्रियों की सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए यात्री शेड अब महज शोपीस बनकर रह गए हैं। ऐसे में यात्री शेड होने के बावजूद लोगों को सड़क किनारे खड़े होकर रोडवेज बसों का इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में भी सांसद और विधायकों की निधि से बनाए गए कई यात्री शेड उपयोग के अभाव में बेकार पड़े हैं। संवाद न्यूज एजेंसी ने जब इसको लेकर पड़ताल की तो यह स्थिति सामने आई।
शहर के विभिन्न मार्गों पर यात्रियों की सुविधा के लिए यात्री शेड बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य यात्रियों को धूप और बारिश से बचाव के साथ बसों का सुरक्षित ठहराव उपलब्ध कराना है। निर्माण के समय इन स्थानों पर यात्रियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी, मगर रोडवेज बसों के निर्धारित ठहराव नहीं होने से यात्री शेड का उद्देश्य ही पूरा नहीं हो रहा है।
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शहर में करीब छह स्थानों पर यात्री शेड बनाए गए हैं, लेकिन इनमें भी सुविधाएं आधी-अधूरी है। शहर के कई यात्री शेड के आसपास यात्रियों की भीड़ तो नजर आती है, लेकिन बसें वहां रुकने के बजाय आगे निकल जाती हैं। बस पकड़ने के लिए यात्रियों को सड़क तक पहुंचना पड़ता है। इससे खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को परेशानी होती है। कई बार बस चालक सड़क पर ही यात्रियों को उतारते या बैठाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
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ग्रामीण इलाकों में भी जनप्रतिनिधियों की निधि से जगह-जगह यात्री शेड बनवाए गए हैं। इनमें कई यात्री शेड ऐसे स्थानों पर हैं, जहां बसों का नियमित ठहराव नहीं है। नतीजतन, लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए यात्री शेड यात्रियों के काम नहीं आ रहे हैं। कई जगह इनका इस्तेमाल दूसरे कार्यों में भी होता दिखाई देता है। संवाद
शहर के इन स्थानों पर बसों का है ठहराव
शहर के असम चौराहा, टाइगर तिराहा, ट्रांसपोर्ट नगर, नौगवां चौराहा, छतरी चौराहा, टाइगर तिराहा, गौहनिया चौराहा, अस्पताल तिराहा, नकटादाना चौराहा, कलेक्ट्रेट तिराहा, एकता सरोवर पार्क पर बस रोके जाने का प्रावधान है। इसके बाद इन स्थानों पर यात्री दिखने पर ही बसों को रोका जाता है, लेकिन ठहराव नहीं किया जा रहा है।
सीट को लगवाया, भूल गए अन्य सुविधाएं देना
शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर बस का ठहराव होने का एक प्वाइंट है। इस प्वाइंट पर यात्रियों की सुविधाएं के महज एक बेंच को डाला गया है, जबकि बरसात से बचने के लिए वहां पर कोई भी सुविधा नहीं की गई। यहां पर बसों का ठहराव भी नहीं किया जा रहा है।
मुख्य चौराहे होने के बाद भी महज एक ही सीट पर हजारों यात्री
शहर के नौगवां चौराहे से ही बसों का संचालन किया जाता है। इस चौराहे से विभिन्न प्रमुख मार्गों के लिए बसों का संचालन किया जाता है। चौराहे पर यात्रियों की सुविधाओं के लिए महज एक सीट लगाई गई है। इससे यात्रियों को परेशानी होती है।
एकता सरोवर पर बना यात्री शेड पर निजी बस संचालकों का कब्जा
शहर के रोडवेज बस अड्डे के निकट एकता सरोवर पार्क के पास यात्रियों की सुविधा व बस के ठहराव के लिए यात्री शेड बनाया गया है। इस यात्री शेड पर निजी बस संचालकों का कब्जा है। रोडवेज की बसों को आगे पीछे लगाया जाता है। इसके बाद भी जिम्मेदार अनजान है।
आंधी बारिश में टूट गया यात्री शेड, फिर भी नहीं हट सका मलबा
बरखेड़ा कस्बे के बजाज चीनी मिल के समीप यात्री शेड को बनवाया गया था, जिससे यहां पर बसों का ठहराव हो, लेकिन बसों का ठहराव तो नहीं हो सका। आंधी बारिश में यात्री शेड ही क्षतिग्रस्त हो गया। विभागीय अफसरों ने भी इस मलबे को हटवाना उचित नहीं समझा।
क्या बोले लोग
बीसलपुर मार्ग पर जहां-जहां यात्री शेड बने हैं। वहां पर एक भी बस का ठहराव नहीं होता है। लोगों को आज भी बसों के लिए यहां-वहां भटकना पड़ता है।
- वीरेंद्र कुमार।
यात्री शेड बनवाए जाने के नाम पर सिर्फ रुपया बहाया जा रहा है, जबकि सुवधिाओं के नाम पर वहां पर कुछ नहीं है। कोई भी बसें बने हुए यात्री शेड पर नहीं रुकती हैं। -नरेंद्र कुमार
शहर व ग्रामीण इलाकों में जहां भी यात्री शेड बनाए गए है। वहां बसों का रुकना अनिवार्य है। यदि कहीं कोई चालक बसें नहीं रोकता है तो इसकी चेकिंग की जाएगी। चेकिंग में जिसकी भी लापरवाही मिलेगी। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- विपुल पाराशर, एआरएम, रोडवेज

शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर पड़ी बेंच। संवाद

शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर पड़ी बेंच। संवाद

शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर पड़ी बेंच। संवाद