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वर्ष 1985 के बाद से कांग्रेस को जिले में जीत की तलाश

Mon, 07 Feb 2022 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 12:45 AM IST
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Since 1985, Congress is looking for victory in the district.
पीलीभीत। सूबे में पांच बार सत्ता में काबिज रह चुकी कांग्रेस की झोली पिछले 32 सालों से जिले में खाली है। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के साथ मैदान में उतरने के बावजूद जीत नहीं मिली। इससे पहले कांग्रेस ने जिले की चारों सीटों पर प्रत्याशी उतारे लेकिन कामयाबी हाथ नहीं आई। अब पार्टी जिले में खाता खोलने को आतुर है। चारों सीटों पर जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। अकेले दम जीत की उम्मीद से चारों सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
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आजादी के बाद से उत्तर प्रदेश की गद्दी पर ज्यादातर कांग्रेस का ही कब्जा रहा। 1967, 1969, 1974, 1980 और 1985 में जीत दर्ज करते हुए सरकार बनाई। 1980 में कांग्रेस ने जिले की चारों सीटें जीतीं। इसके बाद 1985 में चारों सीटों पर प्रत्याशी उतारे लेकिन बरखेड़ा सीट पर उम्मीदवार बनाए गए सन्नू लाल को हार मिली। वह दूसरे नंबर पर रहे। 1991 और 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने फिर चारों सीटों पर प्रत्याशी उतारे, लेकिन इस बार परिणाम और खराब रहा। चारों सीटों पर बुरी तरह हार झेलनी पड़ी। 1996 वाले चुनाव में पूरनपुर और बीसलपुर में कांग्रेस पांचवें स्थान पर खिसक गई। 1996 के चुनाव में पार्टी ने जिले में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा। इसके बाद से कांग्रेस जीत के लिए जद्दोजहद करती रही। 2007 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ पूरनपुर सीट कांग्रेस दूसरा स्थान हासिल कर की। बाकी सीटों पर करारी हार झेलनी पड़ी। पूरनपुर सीट पर कांग्रेस ने किसान नेता वीएम सिंह को कांग्रेस ने टिकट दिया था। इससे पहले हुए 2002 के चुनाव में पार्टी की हालात और खस्ता हुई थी। बीसलपुर से मैदान में आए तेज राम सिंह महज 878 वोट ले सके। ग्यारहवां स्थान रहा। कई निर्दलीय प्रत्याशियों ने कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन किया। यही हाल पूरनपुर सीट का रहा। पहली बार विधानसभा चुुनाव लड़ रहे मोहम्मद उम्र सिर्फ 2484 वोट हासिल कर सके। 2012 में जीत नसीब नहीं हुई। बीसलपुर के प्रत्याशी अनीस अहमद जरूर दूसरा स्थान पाने में कामयाब रहे। 2017 में कांग्रेस सपा गठबंधन से मैदान उतरी। कांग्रेस के हिस्से में बीसलपुर सीट मिली। बाकी पर सपा के प्रत्याशी रहे। कांग्रेस बीसलपुर में फिर दूसरे स्थान ही बना सकी।
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इस बार भी चारों सीटों पर उतारे हैं प्रत्याशी
कांग्रेस ने इस बार भी चारों सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। शहर सीट पर शकील नूरी, बरखेड़ा से हरप्रीत सिंह चब्बा, पूरनपुर से ईश्वर दयाल पासवान और बीसलपुर से शिखा पांडेय को उतारा है। इस बार कांग्रेस प्रियंका गांधी के नेतृत्व में यूपी चुुनाव लड़ रही है। अब देखना है कि पार्टी को कितना फायदा मिलता है।
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वर्ष 1980
सीट - उम्मीदवार - जीत/हार
पीलीभीत - चरण जीत सिंह - जीत
बीसलपुर- तेज बहादुर - जीत
पूरनपुर- विनोद कुमार - जीत
बरखेड़ा- बाबू राम - जीत
वर्ष 1985
सीट - उम्मीदवार - जीत/हार
पीलीभीत - सैयद अली अशरफी - जीत
बीसलपुर- तेज बहादुर गंगवार -जीत
पूरनपुर- विनोद कुमार - जीत
बरखेड़ा- सन्नू लाल - हार दूसरा नंबर
वर्ष 1991
सीट - उम्मीदवार - जीत/ हार
पीलीभीत - रियाज अहमद - हार दूसरा नंबर
बीसलपुर- भगवान सिंह - हार पांचवां स्थान
पूरनपुर- शिव स्वरूप - हार पांचवां स्थान
बरखेड़ा- सन्नू लाल - हार तीसरा नंबर
वर्ष 1993
सीट - उम्मीदवार - जीत हार
पीलीभीत - माधव प्रसाद - हार चौथा स्थान
बीसलपुर- पोथी राम - हार पांचवां स्थान
पूरनपुर- सैसद अली अशफरी - हार पांचवां स्थान
बरखेड़ा- सन्नू लाल -हार तीसरा नंबर
वर्ष 2002
सीट - उम्मीदवार - जीत/हार
पीलीभीत -राज राय सिंह - हार तीसरा स्थान
बीसलपुर- तेज राम - हार ग्यारहवां स्थान
पूरनपुर- मोहम्मद उमर - हार आठवां स्थान
बरखेड़ा- जुक्खन लाल -हार छठा स्थान
वर्ष 2007
सीट - उम्मीदवार - जीत/हार
पीलीभीत - राज राय सिंह - हार चौथा स्थान
बीसलपुर- सुरेंद्र प्रताप - हार पांचवां स्थान
पूरनपुर- वीएम सिंह - हार दूसरा स्थान
बरखेड़ा- मनोज कुमार - हार चौथा स्थान
वर्ष 2012
सीट - उम्मीदवार - जीत/ हार
पीलीभीत - बीके गुप्ता - हार पांचवां स्थान
बीसलपुर- अनीस अहमद खां - हार दूसरा स्थान
पूरनपुर- सुखलाल - हार तीसरा स्थान
बरखेड़ा- जोगिंदर सिंह - हार पांचवां स्थान
वर्ष 2017
सीट - उम्मीदवार - जीत हार
बीसलपुर -अनीस अहमद खां - हार दूसरा स्थान
(तीन सीटों पर कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। सपा से गठबंधन था और तीन सीटें सपा के खाते में थीं)
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