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ठिकाने लगाए जा रहे सिल्ट सफाई को मिले 16 करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 07 Apr 2016 11:19 PM IST
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नहर सफाई।
- फोटो : pilibhit, beureu
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हरदोई ब्रांच में सिल्ट सफाई करा रहे ठेकेदार सत्ता के नजदीकी होने के चलते सिंचाई विभाग के अभियंता उनके सामने बौने साबित हो रहे हैं। सिल्ट सफाई कार्य में तमाम खामियां होने के बावजूद जिम्मेदार आंखें मूंदे हैं।
हरदोई ब्रांच नहर, जिसे बाइफरकेशन में शारदा मुख्य नहर से निकाला गया है, के माध्यम से प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों को सिंचाई के लिए पानी मुहैय्या कराया जाता है। यह नहर हेडवर्कस खंड शारदा के अधीन है और इसकी देखरेख का जिम्मा विभाग की द्वितीय सबडिवीजन के पास है। नहर में सिंचाई की क्षमता बढ़ाने के लिए 16 करोड़ रुपया स्वीकृत किया गया है, जिसमें दस करोड़ से सिल्ट सफाई की जा रही है। यह कार्य सत्ता के खासे नजदीकी ठेकेदार ने लिया था। सिल्ट सफाई का कार्य मशीनों से किया जा रहा है। मजे की बात यह है कि नहर में किस स्तर का कार्य किया जा रहा है, इसको लेकर कोई भी अभियंता टिप्पणी करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। मशीनों से सिल्ट के नाम पर दोनों किनारों के वर्म काटकर चौड़ा किया जा रहा है। वहीं निकाली गई सिल्ट को मशीनों से बाहर फेंका जा रहा है, जिससे नहर के वर्म व डोले पर बरसों से विभिन्न प्रजातियों के खड़े पेड़-पौधे दबते जा रहे हैं। वहीं तमाम पेड़ उखाड़कर भी फेंक दिए गए है। नहर के जो डोले मिट्टी से बनाए जाने हैं, उनको रेत से ही बनाया जा रहा है। इससे नहर में पानी छोड़ने पर अधिकांश रेत नहर में ही पुन: बह जाएगी। एक अभियंता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह कार्य सत्ता से जुड़े ऐसे ठेकेदार से कराया जा रहा है, जिसके सामने हम लोग तो क्या, हमारा बड़ा अफसर भी यहां आकर कुछ नहीं कह पा रहा है।
वहीं एक दूसरे ठेकेदार से छह करोड़ की लागत से बांस के खूंटे लगाकर दोनों किनारों को मजबूत किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर तार के जाल में पत्थर भरकर लगाए जा रहे हैं। इस तरह से हरदोई ब्रांच की सिल्ट सफाई का कार्य पूरा हो जाएगा, लेकिन पानी छोड़ने पर उसका भविष्य क्या होगा? नहर में पानी की कितनी क्षमता बढ़ जाएगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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हरदोई ब्रांच नहर, जिसे बाइफरकेशन में शारदा मुख्य नहर से निकाला गया है, के माध्यम से प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों को सिंचाई के लिए पानी मुहैय्या कराया जाता है। यह नहर हेडवर्कस खंड शारदा के अधीन है और इसकी देखरेख का जिम्मा विभाग की द्वितीय सबडिवीजन के पास है। नहर में सिंचाई की क्षमता बढ़ाने के लिए 16 करोड़ रुपया स्वीकृत किया गया है, जिसमें दस करोड़ से सिल्ट सफाई की जा रही है। यह कार्य सत्ता के खासे नजदीकी ठेकेदार ने लिया था। सिल्ट सफाई का कार्य मशीनों से किया जा रहा है। मजे की बात यह है कि नहर में किस स्तर का कार्य किया जा रहा है, इसको लेकर कोई भी अभियंता टिप्पणी करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। मशीनों से सिल्ट के नाम पर दोनों किनारों के वर्म काटकर चौड़ा किया जा रहा है। वहीं निकाली गई सिल्ट को मशीनों से बाहर फेंका जा रहा है, जिससे नहर के वर्म व डोले पर बरसों से विभिन्न प्रजातियों के खड़े पेड़-पौधे दबते जा रहे हैं। वहीं तमाम पेड़ उखाड़कर भी फेंक दिए गए है। नहर के जो डोले मिट्टी से बनाए जाने हैं, उनको रेत से ही बनाया जा रहा है। इससे नहर में पानी छोड़ने पर अधिकांश रेत नहर में ही पुन: बह जाएगी। एक अभियंता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह कार्य सत्ता से जुड़े ऐसे ठेकेदार से कराया जा रहा है, जिसके सामने हम लोग तो क्या, हमारा बड़ा अफसर भी यहां आकर कुछ नहीं कह पा रहा है।
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वहीं एक दूसरे ठेकेदार से छह करोड़ की लागत से बांस के खूंटे लगाकर दोनों किनारों को मजबूत किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर तार के जाल में पत्थर भरकर लगाए जा रहे हैं। इस तरह से हरदोई ब्रांच की सिल्ट सफाई का कार्य पूरा हो जाएगा, लेकिन पानी छोड़ने पर उसका भविष्य क्या होगा? नहर में पानी की कितनी क्षमता बढ़ जाएगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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