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गर्दन फंसती देख शुरू कराई सड़कों की मरम्मत
सार
गर्दन फंसती देख शुक्रवार से टूटी पड़ी सड़कों पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया। वहीं अफसर जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं।शहरवासियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए शासन स्तर से अमृत योजना का काम 36.30 करोड़ रुपये से शुरू हुआ था। अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर को प्रकाशित कर घोटाले का खुलासा किया।
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सड़क बनाते मजदूर।
विस्तार
36 करोड़ का काम आधा छोड़कर हैंडओवर कर दिया था चार्ज
शासन के निर्देश पर कमेटी ने शुरू की जांच तो मची खलबली
पीलीभीत। शासन के निर्देश पर अमृत योजना के कार्य की जांच शुरू होने पर अफसरों में खलबली है। गर्दन फंसती देख शुक्रवार से टूटी पड़ी सड़कों पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया। मकसद है, जांच में टीम को कम से कम खामियां मिलें। वहीं अफसर जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
शहरवासियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए शासन स्तर से अमृत योजना का काम 36.30 करोड़ रुपये से शुरू हुआ था। कार्य के दौरान मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। नगर पालिका के ईओ ने भी नियम कायदे ताक पर रखकर टंकी को हैंडओवर कर लिया।
अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर को प्रकाशित कर घोटाले का खुलासा किया। इसके बाद शासन ने मंडलायुक्त के माध्यम से जांच के निर्देश दिए। डीएम ने एडीएम एफआर को जांच सौंपी। एडीएम ने आधी अधूरी जांच रिपोर्ट सौंपी तो डीएम ने चार सदस्यीय अफसरों की टीम बनाकर फिर से जांच के आदेश दिए। इससे नगरपालिका से लेकर कार्यदायी संस्था तक खलबली है। कार्यदायी संस्था ने खुद को फंसता देखा तो सड़कों की मरम्मत तेजी से शुरू करा दी ताकि जांच टीम को सड़कों में कोई खामी नहीं मिले।
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शासन के निर्देश पर कमेटी ने शुरू की जांच तो मची खलबली
पीलीभीत। शासन के निर्देश पर अमृत योजना के कार्य की जांच शुरू होने पर अफसरों में खलबली है। गर्दन फंसती देख शुक्रवार से टूटी पड़ी सड़कों पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया। मकसद है, जांच में टीम को कम से कम खामियां मिलें। वहीं अफसर जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
शहरवासियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए शासन स्तर से अमृत योजना का काम 36.30 करोड़ रुपये से शुरू हुआ था। कार्य के दौरान मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। नगर पालिका के ईओ ने भी नियम कायदे ताक पर रखकर टंकी को हैंडओवर कर लिया।
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अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर को प्रकाशित कर घोटाले का खुलासा किया। इसके बाद शासन ने मंडलायुक्त के माध्यम से जांच के निर्देश दिए। डीएम ने एडीएम एफआर को जांच सौंपी। एडीएम ने आधी अधूरी जांच रिपोर्ट सौंपी तो डीएम ने चार सदस्यीय अफसरों की टीम बनाकर फिर से जांच के आदेश दिए। इससे नगरपालिका से लेकर कार्यदायी संस्था तक खलबली है। कार्यदायी संस्था ने खुद को फंसता देखा तो सड़कों की मरम्मत तेजी से शुरू करा दी ताकि जांच टीम को सड़कों में कोई खामी नहीं मिले।
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