पीलीभीत टाइगर रिजर्व: पीटीआर के जंगलों में औषधीय खजाने की तलाश, आयुष मंत्रालय की टीम कर रही सर्वेक्षण
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में मौजूद करीब 200 प्रकार की औषधीय वनस्पतियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू हो गया है। आयुष मंत्रालय के भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी आयोग की टीम यह कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य इन जड़ी-बूटियों की पहचान, व्यवस्थित अध्ययन और संरक्षण करना है।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों में मौजूद औषधीय वनस्पतियों के खजाने को अब वैज्ञानिक नजरिये से खंगाला जाएगा। जंगल में पहले से करीब 200 प्रकार की जड़ी-बूटियां मौजूद होने की जानकारी के बीच इनके व्यवस्थित अध्ययन, पहचान और संरक्षण की दिशा में पहल शुरू हुई है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी आयोग (पीसीआईएमएंडएच) की टीम पीलीभीत वन प्रभाग में औषधीय पौधों का सर्वेक्षण कर रही है।
वन क्षेत्र में कई प्रकार की वनस्पतियां पाई जाती हैं। इनमें से कुछ का पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में उपयोग होता रहा है, जबकि कई पौधों की पहचान और उनके गुणों का व्यवस्थित वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी है। इसी के मद्देनजर 21 से 30 अक्तूबर तक चलने वाले इस अभियान में औषधीय पौधों की पहचान, उनके नमूनों का संग्रह और कच्ची औषधियों के दस्तावेजीकरण पर जोर रहेगा। सर्वेक्षण से वन क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय वनस्पतियों की वैज्ञानिक जानकारी जुटाने और भविष्य में उनके संरक्षण व अध्ययन की संभावनाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
टीम ने डीएफओ से ली जानकारी
भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी आयोग ने पीलीभीत वन प्रभाग में कच्ची औषधियों के संग्रह के लिए परियोजना से जुड़े कर्मचारियों को प्रतिनियुक्त किया है। डॉ. मुकेश कुमार, सलाहकार, अंकुश गोला, परियोजना सहायक तथा रामजीत और सुशील कुमार को सर्वेक्षण एवं संग्रहण कार्य के लिए भेजा गया है। बुधवार को इस टीम ने डीएफओ मनीष सिंह से मिलकर आवश्यक जानकारी ली।
तीन राज्यों में चल रही परियोजना का हिस्सा है सर्वेक्षण
यह सर्वेक्षण केवल पीलीभीत तक सीमित परियोजना नहीं है। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी), आयुष मंत्रालय ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें गंगा के मैदानी क्षेत्र में क्षेत्रीय कच्चे औषधि भंडार की स्थापना और भेषजकोष में शामिल प्रजातियों के लिए राष्ट्रीय हर्बल गार्डन का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं के तहत उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को अध्ययन क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया गया है।
हर्बेरियम में संरक्षित होंगे पौधों के नमूने
सर्वेक्षण में एकत्र किए जाने वाले पौधों के नमूनों का उपयोग हर्बेरियम तैयार करने में किया जाएगा। हर्बेरियम में पौधों के संरक्षित नमूने व्यवस्थित तरीके से रखे जाते हैं। इनके साथ पौधे की पहचान, मिलने का स्थान और अन्य जरूरी वैज्ञानिक विवरण दर्ज किए जाते हैं। इससे भविष्य में पौधों की प्रजातियों की पहचान, उनके वितरण और वनस्पति संबंधी अध्ययन में सहायता मिलती है।
परियोजना का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष औषधीय पौधों के लिए हर्बल गार्डन विकसित करना है। इसमें भेषजकोष में शामिल प्रजातियों को व्यवस्थित रूप से संरक्षित और प्रदर्शित करने की योजना है। सर्वेक्षण के दौरान मिलने वाली प्रजातियों के बारे में प्रमाणिक जानकारी जुटने से उनके संरक्षण, उपयुक्त परिस्थितियों में संवर्धन और वैज्ञानिक अध्ययन की संभावनाओं को समझने में मदद मिल सकती है।