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गलत ढंग से पंजीकृत कराई थीं फर्में, कई के तो अभिलेख भी पूरे नहीं

Sat, 19 Dec 2020 12:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 19 Dec 2020 12:13 AM IST
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scam
पीलीभीत। मनरेगा में फर्म बनाकर घोटाला करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए डीएम ने सूचीबद्ध कराकर समस्त ब्लॉकों पर काम कर रहीं फर्मों का सत्यापन शुरू कराया है। इससे मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई के संकेत हैं। मगर यह सब आसान नहीं है। अधिकांश फर्मों की बात करें तो इनके अभिलेख जुटा पाना ही चुनौती होगा। अफसरों का संरक्षण होने की वजह से पूर्व में भी हुई जांचों में फर्म से जुड़े आवश्यक अभिलेख ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक कार्यालयों में नहीं मिल पाए थे। फिलहाल डीएम की सख्ती के चलते मनरेगा के अधिकारी फर्मों के असली और नकली होने का पता लगाने में जुट गए हैं। अगर सख्ती बनी रही तो जल्द इस मामले में बड़ी कार्रवाई संभव है।
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गांवों की सूरत बदलने और श्रमिकों को काम दिलाने के उद्देश्य से मनरेगा की शुरुआत की गई थी। बजट बहुतायत में होने के कारण भ्रष्टाचारियों की इस पर निगाहें टिक गईं। ग्रामीण इलाकों में विकास कराने के नाम पर जिम्मेदार अपने विकास पर अधिक ध्यान देने लग गए। अफसरों की मॉनिटरिंग भी सिर्फ कागजों में ही दिखाई देने लगी। किसी ने निगाह फेर ली तो कोई खुद साठगांठ कर गड़बड़ी में संलिप्त हो गया।
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शासन स्तर पर हुई शिकायत के बाद पहले अमरिया के एपीओ द्वारा फर्म बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला मनरेगा में पकड़ा गया। फिर माधोटांडा के रोजगार सेवक और पूरनपुर के तकनीकी सहायक द्वारा फर्म बनाकर काम के घोटाला करने का मामला उजागर हो गया। इन्हें देखते हुए डीएम पुलकित खरे ने जनपद में काम कर रही 2026 फर्मों के सत्यापन की कार्रवाई अब शुरू की है।
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फर्मों के सत्यापन की जिम्मेदारी डीसी मनरेगा मृणाल सिंह को सौंपी गई है। बड़े पैैमाने पर फर्मों के गड़बड़ निकलने का कयास अफसरों ने भी लगाया है। इसे लेकर छंटनी तो शुरू कर दी गई है। मगर अब तक जांच में यह स्पष्ट है कि इनको पंजीकृत करतेे समय नियम कायदे नहीं अपनाए गए। सिर्फ जीएसटी पंजीकरण देखकर ही फर्म से लेनदेन करना शुरू कर दिया गया। फर्म किनकी हैं और कौन इसे चला रहा। धरातल पर इस नाम से फर्म चल भी रही है या नहीं। इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इनके पूरे अभिलेख मुहैया कराने में भी ब्लॉक से लेकर मुख्यालय स्तर पर कोई रुचि नहीं ली गई।
बीते दिनों दो बड़े घोटालों की जांच में जांच अधिकारियों को अभिलेख जुटाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। फिर भी विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी। कई अफसर संरक्षण देने में चर्चित हैं। वह भी अपनों को बचाने के लिए जद्दोजहद में जुट गए हैं।
रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक पर कार्रवाई जल्द
फर्म बनाकर ग्राम पंचायतों में काम करने वाले माधोटांडा के रोजगार सेवक और पूरनपुर के तकनीकी सहायक पर अब जल्द शिकंजा कसेगा। डीएम ने पूर्व में ही दोनों पर एफआईआर कराने के निर्देश देकर पत्रावली लौटा दी थी। अब डीएम की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन कराने के लिए मंथन तेज कर दिया गया है। पत्रावली डीएम कार्यालय से वापस सीडीओ के पास पहुंच गई है। अब इसमें कानूनी कार्रवाई के लिए रणनीति बनाई जा रही है। जल्द ही दोनों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी

2026 फर्मों को सूचीबद्ध करके छंटनी कराई जा रही है। इसमें किसी तरह की टालमटोल नहीं होने दी जाएगी। कार्रवाई का रुख स्पष्ट है। गड़बड़ फर्म काली सूची में डालने के साथ ही एफआईआर से लेकर वसूली भी होगी। - पुलकित खरे, डीएम
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