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कूड़ेदान घोटाले के आरोपी 40 पंचायत सचिवों की दो-दो वेतन वृद्धि रोकीं
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पीलीभीत। स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर कूड़ेदान खरीद में हुई घपलेबाजी के मामले में 40 पंचायत सचिवों की दो-दो वेतन वृद्धि रोक दी गई हैं। वहीं, दोषी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिवों से होने वाली 52.62 लाख रुपये की रिकवरी में से मात्र 9.14 लाख की ही वसूली हो सकी। रिकवरी की धनराशि जमा न करने वाले प्रधानों और सचिवों को चेतावनी दी गई है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2018 से जिले के ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखने के निर्देश दिए थे। प्रधान और सचिवों से सांठगांठ कर लाखों रुपये डकारने की नियत से ड्रमों को काटकर उन्हें ही कूड़ेदान का रुप दे दिया गया था। तत्कालीन सीडीओ विजय कृष्ण भागवत ने जांच करवाई तो कूड़ेदान घोटाले का खेल उजागर हुआ था। मामला शासन स्तर पर पहुंचा तो प्रशासन ने भी ब्लॉक स्तरीय कमेटी बनाते हुए मामले की जांच कराई। जांच में 164 ग्राम प्रधानों और 46 सचिवों की संलिप्तता पाई गई। निवर्तमान डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर तत्कालीन प्रभारी डीपीआरओ प्रमोद यादव ने दोषी पाए गए सभी 46 सचिवों की दो-दो स्थायी वेतन वृद्धि पर रोक लगाने और 164 ग्राम प्रधानों और 46 सचिवों से 50-50 फीसदी धनराशि मय ब्याज के रिकवरी करने के भी निर्देश जारी किए थे।
इधर, 46 सचिवों में से 40 सचिवों की दो-दो स्थायी वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई। इसमें 23 ग्राम पंचायत अधिकारी और 14 ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शामिल हैं। विभाग के मुताबिक शेष बचे छह सचिवों में कुछ रिटायर हो चुके हैं, जबकि कुछ के स्थानांतरण दूसरे जिलों को हो चुके हैं। स्थानांतरित सचिवों पर कार्रवाई के लिए संबंधित जिलों के डीएम को पत्र भेजा जाएगा। इधर सभी 164 प्रधानों और सचिवों से 52.62 लाख रुपये रिकवरी के भी आदेश थे। इसमें अब तक 9.14 लाख रुपये की रिकवरी हो सकी है। रिकवरी की धनराशि अदा न करने वाले प्रधानों और सचिवों को चेतावनी दी गई है।
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कूड़ेदान खरीद मामले में 40 सचिवों की दो- दो वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई है। रिकवरी को लेकर भी प्रयास चल रहे हैं। रिकवरी की धनराशि जमा न करने वाले प्रधानों और सचिवों को चेतावनी दी गई है। - राजकुमार, डीपीआरओ
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2018 से जिले के ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखने के निर्देश दिए थे। प्रधान और सचिवों से सांठगांठ कर लाखों रुपये डकारने की नियत से ड्रमों को काटकर उन्हें ही कूड़ेदान का रुप दे दिया गया था। तत्कालीन सीडीओ विजय कृष्ण भागवत ने जांच करवाई तो कूड़ेदान घोटाले का खेल उजागर हुआ था। मामला शासन स्तर पर पहुंचा तो प्रशासन ने भी ब्लॉक स्तरीय कमेटी बनाते हुए मामले की जांच कराई। जांच में 164 ग्राम प्रधानों और 46 सचिवों की संलिप्तता पाई गई। निवर्तमान डीएम वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर तत्कालीन प्रभारी डीपीआरओ प्रमोद यादव ने दोषी पाए गए सभी 46 सचिवों की दो-दो स्थायी वेतन वृद्धि पर रोक लगाने और 164 ग्राम प्रधानों और 46 सचिवों से 50-50 फीसदी धनराशि मय ब्याज के रिकवरी करने के भी निर्देश जारी किए थे।
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इधर, 46 सचिवों में से 40 सचिवों की दो-दो स्थायी वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई। इसमें 23 ग्राम पंचायत अधिकारी और 14 ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शामिल हैं। विभाग के मुताबिक शेष बचे छह सचिवों में कुछ रिटायर हो चुके हैं, जबकि कुछ के स्थानांतरण दूसरे जिलों को हो चुके हैं। स्थानांतरित सचिवों पर कार्रवाई के लिए संबंधित जिलों के डीएम को पत्र भेजा जाएगा। इधर सभी 164 प्रधानों और सचिवों से 52.62 लाख रुपये रिकवरी के भी आदेश थे। इसमें अब तक 9.14 लाख रुपये की रिकवरी हो सकी है। रिकवरी की धनराशि अदा न करने वाले प्रधानों और सचिवों को चेतावनी दी गई है।
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कूड़ेदान खरीद मामले में 40 सचिवों की दो- दो वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई है। रिकवरी को लेकर भी प्रयास चल रहे हैं। रिकवरी की धनराशि जमा न करने वाले प्रधानों और सचिवों को चेतावनी दी गई है। - राजकुमार, डीपीआरओ