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शासन तक पहुंचा नगरपालिका में स्ट्रीट लाइट खरीद घपला

Tue, 03 Mar 2020 02:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2020 02:05 AM IST
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scam in street lights
पीलीभीत। नगरपालिका में स्ट्रीट लाइट खरीद में हुए लाखों के घपले का मामला शासन तक पहुंच गया है। एक विधायक समेत कई लोगों की शिकायत के बाद नगर विकास विभाग ने प्रशासन से पूरा विवरण मांगा है। इसके बाद माना जा रहा है कि शासन स्तर से कभी भी इस मामले में जांच टीम आ सकती है। इससे नगरपालिका में हड़कंप मचा है। उधर, डीएम इस मामले की जांच पहले ही एडीएम एफआर अतुल कुमार सिंह को सौंप चुके हैं। इसके बाद स्ट्रीट लाइटें खरीद में शामिल रहे लोगों और कुछ खास लोगों के बीच मुलाकातें करके मामले को दबाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
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नगरपालिका ने जेम पोर्टल के माध्यम से 1500 स्ट्रीट लाइटें खरीदने का प्रस्ताव दिसंबर में भेजा था। लखनऊ की एक फर्म ने नगरपालिका को स्ट्रीट लाइट की सप्लाई की थी। इसमें 45 वाट की एक एलईडी स्ट्रीट लाइट 4940 रुपये और 75 वाट की 8050 रुपये में खरीदी गई। फरवरी में फर्म ने नगरपालिका को इन लाइटों की आपूर्ति की थी। सभासदों ने मुद्दा उठाया कि नगरपालिका ने बोर्ड में उनकी कमेटी से सत्यापन न कराके एसडीओ दीपक नेगी से गुपचुप तरीके से सत्यापन कराकर फर्म को बाजार रेट से साढ़े तीन गुना महंगा भुगतान कर दिया। लखनऊ की फर्म को स्ट्रीट लाइट खरीद के लिए एक करोड़ तीन लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसके विपरीत बरेली के एक बिजली व्यापारी का कहना है कि अगर उसी कंपनी की 1500 लाइटों की सप्लाई का अगर उनको मौका मिलता तो वह 29.50 लाख में सप्लाई दे देते। सभासदों ने लाइट खरीद घपले में हंगामा कर कमिश्नर को चिट्ठी भेजी थी। अब यह मामला शासन तक पहुंच गया है। नगर विकास विभाग ने इस मामले में जानकारी मांगी है। वहीं डीएम वैभव श्रीवास्तव ने इस प्रकरण में जांच एडीएम एफआर अतुल सिंह को सौंपी है। वह हाल ही में नगरपालिका के प्रभारी अधिकारी भी बनाए गए हैं। वह जल्द जांच शुरू कर सकते हैं।
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जेम पोर्टल की जांच करेंगे जलकल विभाग के जेई
एक तरफ स्ट्रीट लाइट घोटाले में एडीएम एफआर को जांच सौंपी गई है। वहीं दूसरी तरफ नगरपालिका ने अपनी साख बचाने के लिए जेम पोर्टल पर ऑर्डर देने की भी जांच शुरू कर दी है। जलकल विभाग के जेई को जांच सौंपी गई है। यह बात अलग है कि न तो जेई को जेम पोर्टल के बारे में कोई जानकारी है, न ही उन्हें लाइटों की खरीद प्रक्रिया के बारे में कुछ पता है।
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एसडीओ बोले- मैंने तो क्वालिटी का सत्यापन किया था, कीमत का नहीं
लाइट खरीद का सत्यापन करने वाले पावर कॉरपोरेशन के एसडीओ दीपक नेगी का कहना है कि उन्होंने लाइटों की क्वालिटी का सत्यापन किया था, न कि कीमत का। कीमत नगरपालिका तय करती है।
लाइटों की संख्या पर भी उठे सवाल
स्ट्रीट लाइट खरीद घोटाले को लेकर नगरपालिका में घमासान मचा है। कुछ सभासदों के मुताबिक स्ट्रीट लाइटों की संख्या कम थी। किसी भी अधिकारी के द्वारा इसको चेक नहीं किया गया। किसी को ठीक से यह भी नहीं पता कि स्ट्रीट लाइटों की कितनी आपूर्ति नगरपालिका को मिली।

स्ट्रीट लाइट खरीद मामले की जांच डीएम स्तर कराई जा रही है। नगरपालिका के जेई को भी जेम पोर्टल की प्रकिया को चेक करने को कहा गया है। जांच में जो भी दोषी मिलेंगे, उन पर कार्रवाई होगी। -निशा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी
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