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बड़े घोटाले की आहट : तय रेट से ढाई गुना ज्यादा कीमत पर खरीदे गए थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर
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पीलीभीत। ग्राम पंचायतों में थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर की खरीद अफसरों के गले की हड्डी बन सकती है। पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव ने थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर के दाम 2800 रुपये तय किए थे। इनकी खरीद भी ग्राम पंचायतों को स्वयं करनी थी। मगर, अफसरों की सांठगांठ से 721 ग्राम पंचायतों में तय रेट से ढाई गुना से भी अधिक 6558 रुपये के हिसाब से दोनों उपकण एक फर्म ने बिना टेंडर कराए गुपचुप तरीके से ग्राम पंचायतों में सप्लाई कर दिए।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जहां सरकार और पूरी मिशनरी पूरी ताकत लगाए हुए है, वहीं सिस्टम में शामिल कुछ अफसर कोरोना जैसी आपदा को अवसर में बदलकर अपनी जेबें भरने में लगे हैं। शासन ने जनपद की सभी 721 ग्राम पंचायतों में कोरोना संक्रमितों की जांच के लिए थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर खरीदने के निर्देश दिए थे। इन चिकित्सा उपकरणों की खरीद राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त मदों की धनराशि से खरीदकर स्थानीय ग्राम पंचायत की निगरानी समिति को सौंपे जाने थे। बताया जाता है कि अफसरों की सांठगांठ से थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर जैसे उपकरण आनन फानन में ब्लॉक स्तर से ग्राम पंचायतों में एक फर्म के माध्यम से सप्लाई करवा दिए गए। शासन ने प्रति थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर 2800 रुपये तय किए थे। साथ ही यह भी व्यवस्था भी की गई थी कि इनकी खरीद ग्राम पंचायतों के स्तर पर अलग-अलग की जाए। मगर, अफसरों की चहेती फर्म ने बिना टेंडर कराए तय रेट से करीब ढाई गुना अधिक कीमत 6558 रुपये प्रति थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर की दर से सभी 721 ग्राम पंचायतों को भेज दिए गए। इसके साथ ही 6558 रुपये का बिल और बैंक का खाता नंबर भी पंचायत सचिव को थमाकर भुगतान का दबाव बनाया जाने लगा। खास बात यह कि सभी ग्राम पंचायतों में एक ही कंपनी द्वारा चिकित्सा उपकरणों की सप्लाई की गई है, जबकि नियम यह था कि सभी पंचायतों को अलग-अलग उपकरण खरीदने थे।
टेंडर प्रक्रिया के नियम भी दरकिनार
शासन से नियम है कि एक लाख रुपये से ऊपर की खरीद टेंडर के माध्यम से की जानी चाहिए। मगर, यहां तो 47.21 लाख रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए कोई टेंडर प्रक्रिया तक नहीं अपनाई नहीं गई। मतलब, साफ है कि निजी फायदे के लिए नियमों को ताक पर रखकर चिकित्सा उपकरणों की खरीद कराई गई। अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो संबंधित अफसरों का फंसना तय माना जा रहा है।
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ज्यादा रेट में उपकरणों की खरीद पर नाराजगी
बीते शुक्रवार को शासन स्तर पर चिकित्सा उपकरण खरीद समेत अन्य कार्यों की समीक्षा की गई। इसमें महंगे दामों पर खरीदेे गए उपकरणों की बात सामने आई तो शासन में उच्चधिकारियों ने नाराजगी जताई। अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर के दाम 2800 रुपये निर्धारित करके उसका आदेश भी जारी दिया। अपर मुख्य सचिव के आदेश की जानकारी लगते ही स्थानीय अफसर चिंता में पड़ गए। पहले चिकित्सा उपकरणों का भुगतान गुपचुप तरीके से तय कीमत से ढाई गुना करने का दबाव पंचायत सचिवों पर बनाया जा रहा था, मगर उस समय पंचायत सचिव बैंक के खाता नंबर पर भुगतान करने को तैयार नहीं हुए। अब बड़े अफसरों से लेकर पंचायत सचिव तक खरीदे गए उपकरण का भुगतान कैसे किया जाए, इसकी माथापच्ची करने में लगे हैं। पंचायत सचिवों के भी पसीने छूटने लगे हैं कि कहीं महंगे दामों पर खरीदे गए उपकरणों का ठीकरा उनके सिर न फोड़ दिया जाए। इसलिए वह ग्राम पंचायत स्तर पर ढाई गुना ज्यादा बिल का भुगतान किसी तरह टालने में लगे हैं।
शासन के निर्देश पर चिकित्सा उपकरणों की खरीद की गई। चिकित्सा उपकरणों के दाम क्वालिटी पर भी निर्भर करते हैं। फिलहाल इस मामले को दिखवाया जाएगा। अभी खरीदे गए उपकरणों का भुगतान नहीं किया गया है। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ
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कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जहां सरकार और पूरी मिशनरी पूरी ताकत लगाए हुए है, वहीं सिस्टम में शामिल कुछ अफसर कोरोना जैसी आपदा को अवसर में बदलकर अपनी जेबें भरने में लगे हैं। शासन ने जनपद की सभी 721 ग्राम पंचायतों में कोरोना संक्रमितों की जांच के लिए थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर खरीदने के निर्देश दिए थे। इन चिकित्सा उपकरणों की खरीद राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त मदों की धनराशि से खरीदकर स्थानीय ग्राम पंचायत की निगरानी समिति को सौंपे जाने थे। बताया जाता है कि अफसरों की सांठगांठ से थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर जैसे उपकरण आनन फानन में ब्लॉक स्तर से ग्राम पंचायतों में एक फर्म के माध्यम से सप्लाई करवा दिए गए। शासन ने प्रति थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर 2800 रुपये तय किए थे। साथ ही यह भी व्यवस्था भी की गई थी कि इनकी खरीद ग्राम पंचायतों के स्तर पर अलग-अलग की जाए। मगर, अफसरों की चहेती फर्म ने बिना टेंडर कराए तय रेट से करीब ढाई गुना अधिक कीमत 6558 रुपये प्रति थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर की दर से सभी 721 ग्राम पंचायतों को भेज दिए गए। इसके साथ ही 6558 रुपये का बिल और बैंक का खाता नंबर भी पंचायत सचिव को थमाकर भुगतान का दबाव बनाया जाने लगा। खास बात यह कि सभी ग्राम पंचायतों में एक ही कंपनी द्वारा चिकित्सा उपकरणों की सप्लाई की गई है, जबकि नियम यह था कि सभी पंचायतों को अलग-अलग उपकरण खरीदने थे।
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टेंडर प्रक्रिया के नियम भी दरकिनार
शासन से नियम है कि एक लाख रुपये से ऊपर की खरीद टेंडर के माध्यम से की जानी चाहिए। मगर, यहां तो 47.21 लाख रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए कोई टेंडर प्रक्रिया तक नहीं अपनाई नहीं गई। मतलब, साफ है कि निजी फायदे के लिए नियमों को ताक पर रखकर चिकित्सा उपकरणों की खरीद कराई गई। अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो संबंधित अफसरों का फंसना तय माना जा रहा है।
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ज्यादा रेट में उपकरणों की खरीद पर नाराजगी
बीते शुक्रवार को शासन स्तर पर चिकित्सा उपकरण खरीद समेत अन्य कार्यों की समीक्षा की गई। इसमें महंगे दामों पर खरीदेे गए उपकरणों की बात सामने आई तो शासन में उच्चधिकारियों ने नाराजगी जताई। अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर के दाम 2800 रुपये निर्धारित करके उसका आदेश भी जारी दिया। अपर मुख्य सचिव के आदेश की जानकारी लगते ही स्थानीय अफसर चिंता में पड़ गए। पहले चिकित्सा उपकरणों का भुगतान गुपचुप तरीके से तय कीमत से ढाई गुना करने का दबाव पंचायत सचिवों पर बनाया जा रहा था, मगर उस समय पंचायत सचिव बैंक के खाता नंबर पर भुगतान करने को तैयार नहीं हुए। अब बड़े अफसरों से लेकर पंचायत सचिव तक खरीदे गए उपकरण का भुगतान कैसे किया जाए, इसकी माथापच्ची करने में लगे हैं। पंचायत सचिवों के भी पसीने छूटने लगे हैं कि कहीं महंगे दामों पर खरीदे गए उपकरणों का ठीकरा उनके सिर न फोड़ दिया जाए। इसलिए वह ग्राम पंचायत स्तर पर ढाई गुना ज्यादा बिल का भुगतान किसी तरह टालने में लगे हैं।
शासन के निर्देश पर चिकित्सा उपकरणों की खरीद की गई। चिकित्सा उपकरणों के दाम क्वालिटी पर भी निर्भर करते हैं। फिलहाल इस मामले को दिखवाया जाएगा। अभी खरीदे गए उपकरणों का भुगतान नहीं किया गया है। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ