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कमीशन का खेल नहीं बना तो जिला पंचायत में 25 करोड़ के काम लटके
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पीलीभीत। जिला पंचायत में छह बाद माह तय हुई बैठक की तारीख जिला पंचायत अध्यक्ष ने बढ़ाकर 14 मार्च तक कर दी है। सदस्यों का आरोप है कि अध्यक्ष के पास लंबित पड़ीं 25 करोड़ के प्रस्तावित विकास कार्यों की फाइल में कमीशन का खेल न बन पाने के कारण ऐसा किया गया। हालांकि सदस्यों ने ऐसा लिखकर नहीं दिया है। अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) ने वित्तीय वर्ष की समाप्त होने में मात्र 33 दिन शेष बचे होने के कारण बैठक जल्द कराने के लिए अध्यक्ष को पुनर्विचार के लिए भेजी है।
जिला पंचायत की कार्यप्रणाली इन दिनों सुर्खियों में है। मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र तत्कालीन सपा सरकार में विधायक रहे पीतमराम की पुत्रवधु हैं। वह 13 जनवरी 2016 से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर हैं। वर्तमान में जिला पंचायत बोर्ड में 34 सदस्य हैं। भारी भरकम बोर्ड के बावजूद जिला पंचायत में कामों के बंटवारे को लेकर अक्सर हाय तौबा मची रहती है। कुछ समय पहले जिला पंचायत के तमाम सदस्यों ने आरोप लगाया था कि पूरे साल जिला पंचायत बोर्ड की मात्र एक बैठक ही कराई गई, जबकि शासनादेश के मुताबिक पूरे साल में छह बैठकें होनी चाहिए। अब तक आखिरी बैठक पिछले साल जुलाई में हुई थी। इस बैठक के दो-तीन महीने बाद अपर मुख्य अधिकारी ने अगली बैठक कराने के लिए पत्रावली जिला पंचायत अध्यक्ष के पास भेजी। यह फाइल कई दिनों तक रही। इसे लेकर कुछ जिला पंचायत सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष पर आरोप भी लगाए।
अमर उजाला ने भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। तब जिला पंचायत अध्यक्ष ने 29 फरवरी को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक होने की स्वीकृति देते हुए उसका एजेंडा भी सदस्यों के पास भिजवा दिया। इस बात से सदस्य शांत हो गए। इसी बीच सदस्यों को जानकारी मिली कि 29 फरवरी को प्रस्तावित जिला पंचायत बोर्ड बैठक को अध्यक्ष ने मुख्यालय से बाहर जाने की बात कहकर स्थगित कर दिया और बोर्ड बैठक की अगली तारीख 14 मार्च तय कर दी। इसकी जानकारी होते ही सदस्यों में आक्रोश फैल गया। सदस्य इस तरह बोर्ड बैठक टाले जाने का विरोध करने लगे हैं। कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में 25 करोड़ के काम हैं। उनमें अध्यक्ष अपने लोगों को ठेका दिलाकर या कमीशन सेट करने में लगे हैं। जब कमीशन की सेटिंग नहीं हो पाई तो बैठक टाल दी गई। अपर मुख्य अधिकारी जागन लाल ने वित्तीय वर्ष समाप्ति के नजदीक होने का हवाला देकर बैठक की पत्रावली को अध्यक्ष के पास पुनर्विचार के लिए फिर से भेजी है।
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33 दिन शेष... 25 करोड़ के काम लटके
जिला पंचायत के माध्यम से क्षेत्र में होने वाले 25 करोड़ के विकास कार्यों की फाइल अध्यक्ष के पास लंबे समय से पेंडिंग पड़ी है। अपर मुख्य अधिकारी जागन लाल ने सीडीओ के अनुमोदन के उपरांत 18 दिन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के पास स्वीकृति के लिए भेजी थी, लेकिन इस पत्रावली पर उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया। इस पत्रावली कई कार्य 10 लाख के अधिक के भी शामिल हैं। इनकी ई-टेंडरिंग होनी है और ई-टेंडरिंग में अच्छा खासा समय भी लग जाता है। ऐसे में वित्तीय वर्ष के शेष बचे 33 दिनों में ई-टेंडरिंग कैसे होगी। अब अगर 14 मार्च को बैठक होगी तो कैसे इतने कम समय में काम पूरे हो पाएंगे। यह एक बड़ा सवाल है।
क्या है खेल
शासनादेश नियमों के अनुसार 10 लाख से ऊपर के कामों की ई-टेंडरिंग होनी है। मगर, यही काम अगर 10 लाख से नीचे के हों तो उनको बिना ई टेडरिंग के भी कराया जा सकता है। पता चला है कि दस लाख से ऊपर के एस्टीमेट कम करने की तैयारी है, ताकि ई टेंडरिंग न करके ऑफ लाइन टेंडर के जरिए अपने लोगों को ठेके दिए जा सकें।
जिला पंचायत में अध्यक्ष की मनमानी चल रही है। बोर्ड की बैठक इसलिए नहीं कराई जा रही है कि कहीं सदस्य कोई बखेड़ा न खड़ा कर दें। 25 करोड़ की फाइल भी कमीशनखोरी के चलते पेडिंग है। - रीना गंगवार, जिला पंचायत सदस्य
जिला पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। हर कोई मनमानी पर उतारु है। हठधर्मिता के चलते क्षेत्र का विकास थम गया है। इस मामले को उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लेना चाहिए। - असलम जावेद, जिलाध्यक्ष, पंचायत सदस्य संघ
जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्देश पर 29 फरवरी को बोर्ड की बैठक तय की गई थी। सदस्यों को एजेंडा भी भेज दिया गया था। 29 फरवरी को शहर में मौजूद न होने के कारण अध्यक्ष ने बैठक की तिथि 14 मार्च करने को कहा है। इस मामले में बैठक की पत्रावली पुनर्विचार के लिए उनके पास भेजी गई है। - जागन लाल, अपर मुख्य अधिकारी
प्रस्तावित कार्यों की पत्रावली मेें कुछ तकनीकी खामियां पाई गई थीं। उनको दुरुस्त किया जा रहा है। उसके बाद बोर्ड बैठक बुलाई जाएगी। कमीशन और भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं। - आरती महेंद्र, जिला पंचायत अध्यक्ष
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जिला पंचायत की कार्यप्रणाली इन दिनों सुर्खियों में है। मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र तत्कालीन सपा सरकार में विधायक रहे पीतमराम की पुत्रवधु हैं। वह 13 जनवरी 2016 से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर हैं। वर्तमान में जिला पंचायत बोर्ड में 34 सदस्य हैं। भारी भरकम बोर्ड के बावजूद जिला पंचायत में कामों के बंटवारे को लेकर अक्सर हाय तौबा मची रहती है। कुछ समय पहले जिला पंचायत के तमाम सदस्यों ने आरोप लगाया था कि पूरे साल जिला पंचायत बोर्ड की मात्र एक बैठक ही कराई गई, जबकि शासनादेश के मुताबिक पूरे साल में छह बैठकें होनी चाहिए। अब तक आखिरी बैठक पिछले साल जुलाई में हुई थी। इस बैठक के दो-तीन महीने बाद अपर मुख्य अधिकारी ने अगली बैठक कराने के लिए पत्रावली जिला पंचायत अध्यक्ष के पास भेजी। यह फाइल कई दिनों तक रही। इसे लेकर कुछ जिला पंचायत सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष पर आरोप भी लगाए।
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अमर उजाला ने भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। तब जिला पंचायत अध्यक्ष ने 29 फरवरी को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक होने की स्वीकृति देते हुए उसका एजेंडा भी सदस्यों के पास भिजवा दिया। इस बात से सदस्य शांत हो गए। इसी बीच सदस्यों को जानकारी मिली कि 29 फरवरी को प्रस्तावित जिला पंचायत बोर्ड बैठक को अध्यक्ष ने मुख्यालय से बाहर जाने की बात कहकर स्थगित कर दिया और बोर्ड बैठक की अगली तारीख 14 मार्च तय कर दी। इसकी जानकारी होते ही सदस्यों में आक्रोश फैल गया। सदस्य इस तरह बोर्ड बैठक टाले जाने का विरोध करने लगे हैं। कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में 25 करोड़ के काम हैं। उनमें अध्यक्ष अपने लोगों को ठेका दिलाकर या कमीशन सेट करने में लगे हैं। जब कमीशन की सेटिंग नहीं हो पाई तो बैठक टाल दी गई। अपर मुख्य अधिकारी जागन लाल ने वित्तीय वर्ष समाप्ति के नजदीक होने का हवाला देकर बैठक की पत्रावली को अध्यक्ष के पास पुनर्विचार के लिए फिर से भेजी है।
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33 दिन शेष... 25 करोड़ के काम लटके
जिला पंचायत के माध्यम से क्षेत्र में होने वाले 25 करोड़ के विकास कार्यों की फाइल अध्यक्ष के पास लंबे समय से पेंडिंग पड़ी है। अपर मुख्य अधिकारी जागन लाल ने सीडीओ के अनुमोदन के उपरांत 18 दिन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के पास स्वीकृति के लिए भेजी थी, लेकिन इस पत्रावली पर उन्होंने कोई निर्णय नहीं लिया। इस पत्रावली कई कार्य 10 लाख के अधिक के भी शामिल हैं। इनकी ई-टेंडरिंग होनी है और ई-टेंडरिंग में अच्छा खासा समय भी लग जाता है। ऐसे में वित्तीय वर्ष के शेष बचे 33 दिनों में ई-टेंडरिंग कैसे होगी। अब अगर 14 मार्च को बैठक होगी तो कैसे इतने कम समय में काम पूरे हो पाएंगे। यह एक बड़ा सवाल है।
क्या है खेल
शासनादेश नियमों के अनुसार 10 लाख से ऊपर के कामों की ई-टेंडरिंग होनी है। मगर, यही काम अगर 10 लाख से नीचे के हों तो उनको बिना ई टेडरिंग के भी कराया जा सकता है। पता चला है कि दस लाख से ऊपर के एस्टीमेट कम करने की तैयारी है, ताकि ई टेंडरिंग न करके ऑफ लाइन टेंडर के जरिए अपने लोगों को ठेके दिए जा सकें।
जिला पंचायत में अध्यक्ष की मनमानी चल रही है। बोर्ड की बैठक इसलिए नहीं कराई जा रही है कि कहीं सदस्य कोई बखेड़ा न खड़ा कर दें। 25 करोड़ की फाइल भी कमीशनखोरी के चलते पेडिंग है। - रीना गंगवार, जिला पंचायत सदस्य
जिला पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। हर कोई मनमानी पर उतारु है। हठधर्मिता के चलते क्षेत्र का विकास थम गया है। इस मामले को उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लेना चाहिए। - असलम जावेद, जिलाध्यक्ष, पंचायत सदस्य संघ
जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्देश पर 29 फरवरी को बोर्ड की बैठक तय की गई थी। सदस्यों को एजेंडा भी भेज दिया गया था। 29 फरवरी को शहर में मौजूद न होने के कारण अध्यक्ष ने बैठक की तिथि 14 मार्च करने को कहा है। इस मामले में बैठक की पत्रावली पुनर्विचार के लिए उनके पास भेजी गई है। - जागन लाल, अपर मुख्य अधिकारी
प्रस्तावित कार्यों की पत्रावली मेें कुछ तकनीकी खामियां पाई गई थीं। उनको दुरुस्त किया जा रहा है। उसके बाद बोर्ड बैठक बुलाई जाएगी। कमीशन और भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं। - आरती महेंद्र, जिला पंचायत अध्यक्ष