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राजकीय पक्षी सारस का होगा संरक्षण, जून में होगी गणना

Sun, 11 Apr 2021 12:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 11 Apr 2021 12:05 AM IST
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पीलीभीत। मेहमान पक्षियों की विदाई के साथ ही अब प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण पर ध्यान दिया जाएगा। अनुकूल पर्यावरण होने के चलते पिछले कुछ वर्षों में जनपद में सारस का कुनबा बढ़ा है। दिसंबर 2019 में इनकी संख्या 84 थी, जबकि दिसंबर 2020 में संख्या बढ़कर 90 हो गई। मगर इनके संरक्षण को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। जिससे इनके बढ़ते कुनबे को खतरा हो सकता है। ऐसे में पीलीभीत टाइगर रिजर्व और सामाजिक वानिकी प्रभाग ने इनके संरक्षण की पहल की है। इसको लेकर जून में सारस गणना की जाएगी।
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प्रदेश में सारस को राज्य पक्षी का दर्जा दिया गया है। राजकीय पक्षी होने के साथ सारस का पर्यावरण के सूचक के रूप में महत्वपूर्ण स्थान है। सारस की उपस्थिति को क्षेत्र की स्वस्थ पारिस्थितिकी का संकेतक माना जाता है, मगर इसके संरक्षण पर कोई विशेष ध्यान न दिए जाने से यह विशालकाय पक्षी संकटग्रस्त पक्षियों की सूची में शामिल हो गया है। जनपद में सारस की बात करें तो सरकारी आंकड़ों में इनकी संख्या 90 है। दूसरी ओर पक्षियों के संरक्षण पर काम कर रही प्राइवेट संस्थाओं का कहना है कि धरातल पर देखे तो जनपद में इनकी संख्या 200 के पार है। जनपद में हरीपुर रेंज के समीप, बीसलपुर, बिलसंडा आदि क्षेत्र में सारसों के कई बड़े कुनबे देखे जा सकते हैं, मगर तालाबों पर होते कब्जे और जंगल से सटे झाबर में बढ़ता खेती का दायरा इनके संरक्षण में रोड़ा बनता जा रहा है। सारस पर मंडराते खतरे को देखते हुए पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय तक दखल दे चुका है। सरकार ने भी इनके संरक्षण पर काम करना शुरू कर दिया है। जनपद में भी सामाजिक वानिकी प्रभाग द्वारा इनके संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं, मगर वह नाकाफी साबित हो रहे हैं। अफसरों के मुताबिक सारस के संरक्षण को लेकर शासन स्तर पर प्लान तैयार किया जा रहा है।
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पीटीआर में संख्या शून्य, बाहरी इलाकों में 90 सारस
वन विभाग साल मे दो बार सारस की गणना कराता है। इसके लिए समय निश्चित होता है और एक ही समय में पूरे प्रदेश की गणना की जाती है। जंगल क्षेत्र में सारस की गणना पीलीभीत टाइगर रिजर्व और जंगल क्षेत्र से बाहर गणना सामाजिक वानिकी प्रभाग के जिम्मे रहती है। वन विभाग द्वारा पिछले सालों में कराई गई गणना पर गौर करें तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व में एक भी सारस नहीं है। जबकि जंगल क्षेत्र से बाहर इनकी संख्या 90 है। सामाजिक वानिकी प्रभाग के मुताबिक दिसंबर 2019 में 84 सारस पाए गए थे। पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण जून में होने वाली गणना सितंबर में कराई गई। जिसमें 88 वयस्क सारस पाए गए थे। दिसंबर 2020 की गणना में 84 वयस्क और छह बच्चे यानी 90 सारस पाए गए थे।
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जून में दो दिन होगी गणना, फरमान जारी
शासन ने इस साल की पहली सारस गणना जून में कराने का निर्णय लिया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) पवन कुमार शर्मा ने दोनों प्रभागों को सारस गणना कराने के आदेश जारी दिए हैँ। यह गणना 25-26 जून को होगी। दोनों दिवसों में गणना सुबह छह से आठ बजे तक और शाम चार से छह बजे के बीच की जाएगी। दोनों में अधिकतम संख्या को वास्तविक संख्या माना जाएगा।
संरक्षण के लिहाज से अलग से हो प्रयास
जनपद में पुरनपुर, बीसलपुर आदि के कुछ क्षेत्रों में सारस काफी संख्या में देखे जा सकते हैं, मगर तालाबों पर हो रहे कब्जे, झाबर वाले क्षेत्रों में बढ़ती खेती के दायरे से इनके वासस्थल में कमी आती जा रही है। यदि सारस के संरक्षण को लेकर अलग से प्रयास किया जाए तो इनकी संख्या कहीं अधिक बढ़ सकती है। इसे पर्यटन से भी जोड़ा जा सकता है।

- अख्तर मियां खान, अध्यक्ष, टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी
सारस के संरक्षण के लिए वेटलैंड के आसपास और ऐसे स्थानों पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है जहां सारस की संख्या अच्छी और उनका कुनबा बढ़ने की उम्मीद है। पिछले सालों में सारस की संख्या बढ़ी है। इनके संरक्षण को लेकर प्रयास लगातार जारी हैं।
- संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग
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