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Pilibhit News: ग्रामीण अभियंत्रण एमडीआर तकनीक से संवारेगा सड़कों की सेहत

Mon, 12 Jun 2023 12:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jun 2023 12:20 AM IST
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Rural engineering will improve the health of roads with MDR technology
पूरनपुर पीलीभीत मार्ग पर नई तकनीक से बनाई जा रही सड़क। संवाद
पीलीभीत। जिले में पहली बार ट्रायल के तौर पर फुल-डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से 18 किलोमीटर लंबी दो सड़कों को आरईएस की ओर से बनवाया जा रहा है। इससे सड़कें मजबूत बनने के साथ ही लागत में करीब बीस प्रतिशत की कमी आएगी। यही नहीं पर्यावरण को भी इससे लाभ मिलने की बात कही जा रही है।
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अब तक सड़कों को बनाने में काफी खर्च आता है। गिट्टी और बजरी बाहर से मंगवानी पड़ती है। पुरानी सड़क को भी उखाड़ा जाता है। इन खर्चों को कम करने लिए केंद्र सरकार ने फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से सड़कों को बनवाने के लिए कहा था। इससे अब तक प्रदेश में कहीं भी सड़क नहीं बनी थी।
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प्रदेश में पीलीभीत जिले की दो सड़कों को इसके लिए चुना गया है। इन सड़कों को बनाने की जिम्मेदारी आरईएस को सौंपी गई है। आरईएस की ओर से सड़कों को बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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क्या है एफडीआर तकनीकी
फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक में पुरानी सड़क के पूरी पपड़ी का दोबारा इस्तेमाल हो जाता है। स्टोन एग्रीगेट यानी गिट्टी की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें सड़क का निर्माण बहुत तेजी से होता है और मरम्मत में खर्च भी कम आता है। विशेष मशीनों से पपड़ी, सीमेंट आदि को मिलाकर सड़क बनती है। यदि मिट्टी की सड़क भी होगी तो कुछ गिट्टी का प्रयोग करके कम लागत में सड़क बन जाएगी।

इन सड़कों का होगा निर्माण
ग्रामीण अभियंत्रण सेवा की ओर से जिले के मरौरी ब्लॉक में पूरनपुर-पीलीभीत मार्ग पर गांव कंजा हरैया में 7.45 किलोमीटर और इसी ब्लॉक में रिछौला से गजरौला बाया माला कॉलोनी। इसकी लंबाई 11.20 किलोमीटर की है। यहां पर ट्रायल के तौर पर सड़क को बनाया जा रहा है।



इसमें नई गिट्टी नहीं लाते हैं, पुरानी सामग्री में ही सीमेंट व अन्य तत्वों को डालकर इस्तेमाल किया जाता है। इससे प्राकृतिक संपदा का दोहन कम होता है और सड़क भी मजबूत बनती है। वर्तमान में पीलीभीत में दो मार्ग एफडीआर तकनीक से बनाने शुरू हुए हैं। - शैलेंद्र चौधरी, एई आरईएस
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