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गांव में जाकर होम क्वारंटीन नियमों को हवा में उड़ा रहे श्रमिक

Fri, 15 May 2020 01:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2020 01:00 AM IST
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rules break in shelter home
बीसलपुर। कोरोना संक्रमण केस आने के बाद तमाम शेल्टर होम इसलिए खोले गए थे, ताकि बाहर से आने वाले श्रमिकों और अन्य लोगों को वहां क्वारंटीन किया जा सके। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रमिकों को स्क्रीनिंग के बाद शेल्टर होम में न ठहराकर घरों में क्वारंटीन किया जा रहा है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है क्योंकि श्रमिक गांव जाने के बाद होम क्वारंटीन नहीं रहते, बल्कि वे घूमते रहते हैं।
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कस्बे में पांच गतिशील और 17 निष्क्रिय शेल्टर होम हैं। गतिशील शेल्टर होमों में बाहर से आने वाले मजदूरों को रखा गया है। निष्क्रिय शेल्टर होम अभी खाली पड़े हैं। जबकि रहने की व्यवस्थाएं यहां भी हैं। 17 शेल्टर होम बिल्कुल खाली पड़े हैं। इसके बावजूद बाहर से आने वाले मजदूरों को शेल्टर होम में न रखकर प्रथम स्क्रीनिंग के बाद घरों में ही 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया जाता है। होम क्वारंटीन के नाम पर घर पहुंचे ये मजदूर क्वारंटीन नियमों का पालन नहीं करते। वे अपने परिवार के लोगों के बीच हर वक्त रहने के अलावा आसपास पड़ोस के लोगों से भी मिलते जुलते रहते हैं। इसी का परिणाम यह है कि हाल ही में बीसलपुर के दौलतपुर हीरा गांव के एक मजदूर में कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद उसके पड़ोस के गांव को कंटेन्मेंट जोन बनाया गया है। वहां के लोगों से संक्रमित मजदूर मिला था।
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सीएचसी के अभिलेखों के अनुसार अब तक बाहर से 3250 मजदूर आ चुके हैं। इनमें से आधे मजदूरों को शेल्टर होम और बाकी बचे 50 प्रतिशत मजदूरों को उनके घरों में ही होम क्वारंटीन किया गया है। बाहर से आने श्रमिकों के होम क्वारंटीन होने से कभी भी स्थितियां बिगड़ सकती हैं।
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शेल्टर होम में क्षमता से ज्यादा लोग
शेल्टर होमों की बड़ी संख्या को देखते हुए उनमें 50 से ज्यादा लोगों को नहीं रखना चाहिए। मगर, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में 80, बाला देवी रोशन लाल डिग्री कॉलेज में 77 और एसआरएम इंटर कॉलेज में 89 मजदूरों को ही 14 दिन तक क्वारंटीन रखा गया है। मदर्स पब्लिक स्कूल में केवल 31 लोग रखे गए हैं। बालाजी गर्ल्स इंटर कॉलेज और केकेएस स्कूल के शेल्टर होम में किसी को भी नहीं रखा गया। यह खाली है।
बाहर से आने वाले लोगों को स्क्रीनिंग में कोरोना लक्षण मिलने पर ही शेल्टर होम में रखा जाता है। स्क्रीनिंग में कोरोना लक्षण नहीं मिलने पर उसे उसके घर में ही 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाता है। 14 दिन बाद उसकी दूसरी स्क्रीनिंग की जाती है। - डॉ. सीएम चतुर्वेदी, एसीएमओ

जिन मजदूरों का यात्रा इतिहास होता है, और उनमें कोरोना के लक्षण पाए जाते हैं तो उन्हें शेल्टर होम भेजा जाता है। जिनका यात्रा इतिहास नहीं है और कोरोना के लक्षण भी नहीं हैं, वह घरों में ही 14 दिन क्वांरटीन रहते हैं। - आशुतोष कुमार, तहसीलदार
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