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आठ माह से नहीं हुई रोडवेज के ड्राइवरों की आंखों की जांच

Mon, 19 Oct 2020 12:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2020 12:44 AM IST
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roadways bus drivers health issue
पीलीभीत। स्थानीय डिपो की रोडवेज बसों में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के साथ परिवहन निगम खिलवाड़ कर रहा है। यहां रोडवेज बसों में चलने वाले ड्राइवरों की आंखों की आठ माह से जांच नहीं हुई। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि फरवरी में ड्राइवरों की आंखों की जांच के लिए डिपो में शिविर लगवाया गया था। ड्राइवर कमजोर आंखों के सहारे ही ड्राइवर यात्रियों को रोडवेज का सफर पूरा कराते हैं। रोडवेज के तमाम ड्रावइरों की उम्र 40 साल तो किसी की 50 साल है। बड़ी संख्या में ड्राइवरों की आंखें कमजोर हैं। कुछ ड्राइवरों की आंखों में मोतियाबिंद भी है। किसी को चश्मा बदलवाने की जरूरत है, लेकिन उसका चश्मा नहीं बदला।
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परिवहन निगम के स्थानीय डिपो में कुल 96 बसें हैं। उनमें 88 चल रही हैं, जबकि आठ सरेंडर हैं। 16 रोडवेज बसें अनुबंधित हैं। उनमें अभी केवल 11 चल रही हैं। पांच संचालित नहीं हैं। इन बसों पर 112 ड्राइवर और इतने ही कंडेक्टर हैं। रोडवेज बसों को चलाने का नियम यह है कि लाइसेंस नवीनीकरण के समय ड्राइवरों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। विशेषकर चालक की आंखों का स्वास्थ्य का परीक्षण होता है। इसके अलावा परिवहन निगम की ओर से नेत्र शिविर लगाकर चालकों की आंखें चेक कराई जाती हैं। इस साल रोडवेज की ओर से फरवरी में शिविर लगवाकर चालकों का नेत्र परीक्षण कराया गया था। फिर कोरोना आ गया। उसके बाद नेत्र शिविर नहीं लगा। सूत्रों के अनुसार रोडवेज बसों पर तमाम चालक बिना आंखें चेक कराए ही लंबे रूट की बसें चलाते हैं। रात के समय उन्हें ठीक से दिखाई भी नहीं देता है। 40 और 50 साल के तमाम ड्राइवरों को अपना चश्मा बदलवाने की जरूरत हैं मगर वह पुराने चश्मे से काम चला रहे थे। ये लापरवाही हादसे को दावत दे रही हैं। हालांकि एआरएम वीके गंगवार का कहना है कि बिना स्वास्थ्य परीक्षण कराए वह किसी भी ड्राइवर को बस नहीं चलाने देते। कैंप लगाकर उनकी आंखों की जांच कराई जाती है। इस बार कोरोना के चलते कैंप नहीं लग पाया, मगर अब जल्द ही ड्राइवर की आंखों को चेक कराने के लिए कैंप लगाया जाएगा।
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दो ड्राइवर रखने का नियम, मगर अनुबंधित बस में एक ही था
रोडवेज बसों में लांग रूट पर चलने वाली बसों पर दो ड्राइवर रखने का नियम है। उनकी ड्यूटी हर 12 घंटे में बदलती रहती है। मगर, जो अनुबंधित रोडवेज बस असम हाईवे पर दुघर्टनाग्रस्त हुई, उसमें एक ही ड्राइवर था। वही लखनऊ से शाम छह से सात बजे के बीच चला था। रोडवेज एआरएम वीके गंगवार ने भी एक ही ड्राइवर होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वह सोमवार को पता करेंगे कि लखनऊ रूट पर एक ही ड्राइवर क्यों भेजा गया।
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