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सड़क बनी न कैंटीन चली, गोमती उद्गम स्थल पर व्यवस्थाओं पर लगा ग्रहण
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गोमती उद्गम स्थल पर कैंटीन के क्षेत्र में छाया सन्नाटा। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
कलीनगर। गोमती उद्गम स्थल की सुंदरता को चार चांद लगाने के प्रयासों के बीच कुछ अव्यवस्थाएं श्रद्धालुओं का मुंह चिढ़ा रही हैं। श्रद्धालु जिस मार्ग से होकर गोमती उद्गम स्थल पहुंचते हैं, उसकी चौड़ाई कई स्थानों पर काफी कम है। इससे वाहनों को निकालने में समस्या बनी रहती है। वहीं, श्रद्धालु भरपूर समय बिताने का मन बनाते भी हैं, लेकिन कैंटीन बंद होने से उन्होंने असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
गोमती उद्गम स्थल किसी पर्यटनस्थल से कम नहीं है। मंदिर परिसर के अलावा मुख्य झील के अलावा दो अन्य झीलों का सौंदर्यीकरण हो जाने से श्रद्धालुओं का आकर्षण भी बढ़ गया है। रोजाना करीब तीन सौ श्रद्धालु गोमती उद्गम स्थल पहुंच रहे हैं। मंदिर क्षेत्र में पूजा-अर्चना करने के साथ शांत वातावरण में पर्यटन का भी आनंद उठा रहे हैं। झीलों के चारों ओर लगे पौधे सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। पेड़ों की छाव के बीच बने पथवे क्षेत्र में भी रौनक अधिक रहती है।
रोजाना शाम को बनारस की तर्ज पर होने वाली आरती में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धालु शामिल होने पहुंचते हैं। व्यवस्थाओं को और विस्तार देने पर जोर भी जोर दिया जा रहा है। पूर्व में स्थानीय लोगों ने वाहनों के आवागमन में समस्या का हवाला देकर लिंक सड़क को चौड़ा करने की डीएम से मांग की थी। डीएम के निर्देश पर राजस्व विभाग ने पैमाइश भी की थी। पीडब्ल्यूडी को सड़क का निर्माण कराने के निर्देश दिए थे। छह माह से अधिक समय बीतने के बाद भी कार्य शुरू नहीं कराया जा सका।
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एक साल बाद चली कैंटीन कुछ दिन में हो गई बंद
गोमती उद्गम स्थल आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कैंटीन का संचालन शुरू कराया गया था। कोरोना के चलते कैंटीन बंद हो गई थी। करीब एक साल तक कैंटीन का संचालन ठप रहा। लंबे समय बाद दो माह पूर्व कैंटीन का दोबारा संचालन शुरू कराया गया, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सके। संचालन के चंद दिनों बाद ही कैंटीन बंद हो गई। एसडीएम कलीनगर की ओर से बेहतर संचालन के लिए कैंटीन को सही हाथों सौंपने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गोमती उद्गम स्थल पर कैंटीन का जल्द ही संचालन शुरू कराया जाएगा। इसके लिए कई लोगों से बातचीत की गई है। अन्य व्यवस्थाओं को भी बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। -शिखा शुक्ला, एसडीएम, कलीनगर
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गोमती उद्गम स्थल किसी पर्यटनस्थल से कम नहीं है। मंदिर परिसर के अलावा मुख्य झील के अलावा दो अन्य झीलों का सौंदर्यीकरण हो जाने से श्रद्धालुओं का आकर्षण भी बढ़ गया है। रोजाना करीब तीन सौ श्रद्धालु गोमती उद्गम स्थल पहुंच रहे हैं। मंदिर क्षेत्र में पूजा-अर्चना करने के साथ शांत वातावरण में पर्यटन का भी आनंद उठा रहे हैं। झीलों के चारों ओर लगे पौधे सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। पेड़ों की छाव के बीच बने पथवे क्षेत्र में भी रौनक अधिक रहती है।
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रोजाना शाम को बनारस की तर्ज पर होने वाली आरती में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धालु शामिल होने पहुंचते हैं। व्यवस्थाओं को और विस्तार देने पर जोर भी जोर दिया जा रहा है। पूर्व में स्थानीय लोगों ने वाहनों के आवागमन में समस्या का हवाला देकर लिंक सड़क को चौड़ा करने की डीएम से मांग की थी। डीएम के निर्देश पर राजस्व विभाग ने पैमाइश भी की थी। पीडब्ल्यूडी को सड़क का निर्माण कराने के निर्देश दिए थे। छह माह से अधिक समय बीतने के बाद भी कार्य शुरू नहीं कराया जा सका।
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एक साल बाद चली कैंटीन कुछ दिन में हो गई बंद
गोमती उद्गम स्थल आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कैंटीन का संचालन शुरू कराया गया था। कोरोना के चलते कैंटीन बंद हो गई थी। करीब एक साल तक कैंटीन का संचालन ठप रहा। लंबे समय बाद दो माह पूर्व कैंटीन का दोबारा संचालन शुरू कराया गया, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सके। संचालन के चंद दिनों बाद ही कैंटीन बंद हो गई। एसडीएम कलीनगर की ओर से बेहतर संचालन के लिए कैंटीन को सही हाथों सौंपने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गोमती उद्गम स्थल पर कैंटीन का जल्द ही संचालन शुरू कराया जाएगा। इसके लिए कई लोगों से बातचीत की गई है। अन्य व्यवस्थाओं को भी बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। -शिखा शुक्ला, एसडीएम, कलीनगर