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राहुलनगर में बाढ़ नियंत्रण का काम एनओसी न मिलने से अटकाया
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माधोटांडा। बाढ़ प्रभावित गांव राहुलनगर में बाढ़ नियंत्रण योजना शुरू न होने के पीछे मात्र टाइगर रिजर्व की एनओसी न मिलना नहीं है बल्कि इसके और भी कई कारण हैं। दो प्रोजेक्ट भेजने और उनमें से एक की स्वीकृति मिलने के बाद भी यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू नहीं कराए गए। नदी यहां 60 एकड़ जमीन काट चुकी है।
पूरनपुर तहसील के राहुलनगर गांव में पिछले साल भी तेजी से कटान हुआ था। तत्कालीन एसडीएम को कैंप कर रात-दिन काम करना पड़ा था। उस दौरान यह कहा गया था कि बरसात खत्म होते ही कटान रोकने के लिए बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जाएंगे। मगर, वह काम नहीं हुए। दूसरी ओर बाढ़ खंड ने राहुलनगर में बाढ़ नियंत्रण के लिए 12 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा था। उस प्रोजेक्ट की मंजूरी अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। तभी सिंचाई विभाग की मैकेनिकल डिवीजन ने राहुलनगर में नदी का रुख मोड़ने की बात कहकर नौ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शासन को भेज दिया। यह प्रोजेक्ट शासन से मंजूर हो गया। सिंचाई विभाग की मैकेनिकल डिवीजन ने प्रोजेक्ट मंजूरी मिलने के बाद जब काम की शुरुआत की तो टाइगर रिजर्व ने एनओसी न होने पर काम रुकवा दिया।
एनओसी मिलने में लग सकता है समय
वन क्षेत्र में किसी भी तरह के कार्य के लिए वन विभाग से एनओसी लेनी पड़ती है। वन क्षेत्र अब टाइगर रिजर्व घोषित हो चुका है। टाइगर रिजर्व से संस्तुति कराकर एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) से एनओसी लेनी है। इसमें समय लग सकता है। दूसरी ओर शारदा नदी तेजी से राहुल नगर की ओर बढ़ रही है। नदी की दूरी गांव से मात्र 10-12 मीटर ही दूर रह गई है। यहां अब तक 60 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। दो विभागों की खींचतान का खामियाजा राहुलनगर के लोगों का भुगतना पड़ रहा है।
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राहुलनगर में मैकेनिकल डिवीजन बाढ़ नियंत्रण के काम कराएगा। टाइगर रिजर्व से एनओसी न मिलने के कारण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। एनओसी लेने के प्रयास जारी हैं। - ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड
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पूरनपुर तहसील के राहुलनगर गांव में पिछले साल भी तेजी से कटान हुआ था। तत्कालीन एसडीएम को कैंप कर रात-दिन काम करना पड़ा था। उस दौरान यह कहा गया था कि बरसात खत्म होते ही कटान रोकने के लिए बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जाएंगे। मगर, वह काम नहीं हुए। दूसरी ओर बाढ़ खंड ने राहुलनगर में बाढ़ नियंत्रण के लिए 12 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा था। उस प्रोजेक्ट की मंजूरी अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी। तभी सिंचाई विभाग की मैकेनिकल डिवीजन ने राहुलनगर में नदी का रुख मोड़ने की बात कहकर नौ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शासन को भेज दिया। यह प्रोजेक्ट शासन से मंजूर हो गया। सिंचाई विभाग की मैकेनिकल डिवीजन ने प्रोजेक्ट मंजूरी मिलने के बाद जब काम की शुरुआत की तो टाइगर रिजर्व ने एनओसी न होने पर काम रुकवा दिया।
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एनओसी मिलने में लग सकता है समय
वन क्षेत्र में किसी भी तरह के कार्य के लिए वन विभाग से एनओसी लेनी पड़ती है। वन क्षेत्र अब टाइगर रिजर्व घोषित हो चुका है। टाइगर रिजर्व से संस्तुति कराकर एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) से एनओसी लेनी है। इसमें समय लग सकता है। दूसरी ओर शारदा नदी तेजी से राहुल नगर की ओर बढ़ रही है। नदी की दूरी गांव से मात्र 10-12 मीटर ही दूर रह गई है। यहां अब तक 60 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। दो विभागों की खींचतान का खामियाजा राहुलनगर के लोगों का भुगतना पड़ रहा है।
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राहुलनगर में मैकेनिकल डिवीजन बाढ़ नियंत्रण के काम कराएगा। टाइगर रिजर्व से एनओसी न मिलने के कारण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। एनओसी लेने के प्रयास जारी हैं। - ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड