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शहरवासियों को नहीं मिल रहा शुद्ध पानी!
पीलीभीत।
Updated Sat, 09 May 2015 11:47 PM IST
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शहरवासियों को शुद्ध
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पानी मुहैय्या कराने की जिम्मेदारी नगरपालिका प्रशासन की है, लेकिन जान कर
हैरत होगी कि जो पानी आप पी रहे हैं उसकी गुणवत्ता की जांच पिछले कई साल से
नहीं हुई। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच कराने के लिए नमूने
प्रयोगशाला में भेजने को कहा है। जबकि पालिका प्रशासन गत वर्ष शासन स्तर पर
पानी की जांच का दावा कर रहा है।
शहर की सवा दो लाख आबादी के लिए पेयजल आपूर्ति के संसाधन तीन दशक पुराने ही है। शहर में वर्ष 1980 में चार ओवर हेड टैंक व 11 नलकूप स्थापित कर पेयजल सप्लाई शुरू की गई थी। संसाधनों की कमी व रख-रखाव के अभाव के चलते पेयजल व्यवस्था साल दर साल लड़खड़ाती चली गई। नतीजा यह हुआ कि पेयजल को बिछाई गई अधिकतर पाइप लाइनें जीर्णशीर्ण हो गई। अब यह पाइप लाइनें कीचड़युक्त पानी उगल रही हैं। प्रदूषित पानी पीकर लोग बीमार हो रहे हैं वही कुछ जागरूक उपभोक्ता मात्र कपड़े धुलने में ही इस पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पानी जांच न होने पर शासन दिखा गंभीर
राज्य स्वास्थ्य मिशन के अपर निदेशक ने पेयजल जांच के नमूने न भेजे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने डीएम को पत्र कहा कि पेयजल के नमूनों की रासयनिक व जीवाणु जांच के लिए उन्हें प्रयोगशाला नहीं भेजा रहा है। इससे पेयजल की शुद्धता प्रमाणित नहीं हो पा रही है। अपरनिदेशक ने शासन से किट मंगवाकर जल्द पेयजल के नमूने भेजने के निर्देश दिए हैं। इधर डीएम ने तत्काल पेयजल नमूने प्रयोगशाला में भेजने को निर्देशित किया है।
यह हैं पेयजल के संसाधन
यशवंतरी देवी स्थित ओवरहेड टैंक 2250 किलोलीटर
वाटर वर्क्स स्थित ओवरहेड टैंक 450 किलो लीटर
नकटादाना स्थित ओवरहेड टैंक 450 किलो लीटर
आवास विकास स्थित ओवरहेड टैंक 340 किलो लीटर
फैक्ट फाइल
घरेलू उपभोक्ता 12436
कामर्शियल उपभोक्ता 286
आवश्यकता प्रति व्यक्ति 127 लीटर प्रतिदिन
जलापूर्ति प्रति व्यक्ति 122 लीटर प्रतिदिन
जल्द भेजा जाएगा सैंपल
जिला प्रशासन की ओर से पेयजल जांच के लिए किट मांग मंगाई जा रही है। पेयजल नमूने की जांच को जल्द ही सैंपल भेजा जाएगा। स्थानीय स्तर पर बीच-बीच में पेयजल की जांच की जाती रही है।
- सोमपाल, जेई, जलकल विभाग
शहर की सवा दो लाख आबादी के लिए पेयजल आपूर्ति के संसाधन तीन दशक पुराने ही है। शहर में वर्ष 1980 में चार ओवर हेड टैंक व 11 नलकूप स्थापित कर पेयजल सप्लाई शुरू की गई थी। संसाधनों की कमी व रख-रखाव के अभाव के चलते पेयजल व्यवस्था साल दर साल लड़खड़ाती चली गई। नतीजा यह हुआ कि पेयजल को बिछाई गई अधिकतर पाइप लाइनें जीर्णशीर्ण हो गई। अब यह पाइप लाइनें कीचड़युक्त पानी उगल रही हैं। प्रदूषित पानी पीकर लोग बीमार हो रहे हैं वही कुछ जागरूक उपभोक्ता मात्र कपड़े धुलने में ही इस पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पानी जांच न होने पर शासन दिखा गंभीर
राज्य स्वास्थ्य मिशन के अपर निदेशक ने पेयजल जांच के नमूने न भेजे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने डीएम को पत्र कहा कि पेयजल के नमूनों की रासयनिक व जीवाणु जांच के लिए उन्हें प्रयोगशाला नहीं भेजा रहा है। इससे पेयजल की शुद्धता प्रमाणित नहीं हो पा रही है। अपरनिदेशक ने शासन से किट मंगवाकर जल्द पेयजल के नमूने भेजने के निर्देश दिए हैं। इधर डीएम ने तत्काल पेयजल नमूने प्रयोगशाला में भेजने को निर्देशित किया है।
यह हैं पेयजल के संसाधन
यशवंतरी देवी स्थित ओवरहेड टैंक 2250 किलोलीटर
वाटर वर्क्स स्थित ओवरहेड टैंक 450 किलो लीटर
नकटादाना स्थित ओवरहेड टैंक 450 किलो लीटर
आवास विकास स्थित ओवरहेड टैंक 340 किलो लीटर
फैक्ट फाइल
घरेलू उपभोक्ता 12436
कामर्शियल उपभोक्ता 286
आवश्यकता प्रति व्यक्ति 127 लीटर प्रतिदिन
जलापूर्ति प्रति व्यक्ति 122 लीटर प्रतिदिन
जल्द भेजा जाएगा सैंपल
जिला प्रशासन की ओर से पेयजल जांच के लिए किट मांग मंगाई जा रही है। पेयजल नमूने की जांच को जल्द ही सैंपल भेजा जाएगा। स्थानीय स्तर पर बीच-बीच में पेयजल की जांच की जाती रही है।
- सोमपाल, जेई, जलकल विभाग