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Pilibhit News: धर्मांतरण मामले में तीनों आरोपियों की रिमांड अर्जी खारिज

Sat, 31 Oct 2026 12:06 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Sat, 31 Oct 2026 12:06 AM IST
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Remand plea for all three accused in conversion case rejected
पीलीभीत। कोतवाली नगर में दर्ज धर्मांतरण मामले में पुलिस की कार्रवाई को अदालत से झटका लगा है। तीन नामजद आरोपियों की 14 दिन की रिमांड मांगने वाली पुलिस की अर्जी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंगल देव सिंह की अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद रिमांड की पर्याप्त वजह नहीं पाई। साथ ही तीनों आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
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मामले में मोहल्ला खकरा निवासी हितेश कुमार सक्सेना ने 28 अक्तूबर को कोतवाली नगर में एफआईआर दर्ज कराई थी। तहरीर में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2019-20 में वह रिजवान हुसैन के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाते थे। इसी दौरान उन्हें धोखे से बीफ कबाब खिलाने, प्रेम जाल में फंसाने और बाद में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया गया। शिकायत के मुताबिक, चार अप्रैल 2025 को उन्हें सज्जाद हुसैन के घर बुलाकर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं में 15 लोगों को नामजद किया था। इनमें रौनक फातिमा, रिजवान हुसैन और सज्जाद हुसैन समेत दो अज्ञात मौलाना शामिल हैं। पुलिस ने रिजवान हुसैन, सज्जाद हुसैन और रौनक फातिमा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। इसके बाद विवेचक ने तीनों की 14 दिन की रिमांड मांगी थी।
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29 अक्तूबर को पारित आदेश में अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता वर्ष 2019 से धर्म परिवर्तन का आरोप लगा रहा है, जबकि प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून वर्ष 2021 में लागू हुआ था। केस डायरी के अवलोकन में शिकायतकर्ता के बयान के अलावा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे बल, कपट, अनुचित प्रभाव या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने की बात स्पष्ट होती हो। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी धर्म परिवर्तन संबंधी कोई प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।
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अदालत ने यह भी पाया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिखित आधार और उससे संबंधित सामग्री न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने इन परिस्थितियों में आरोपियों की रिमांड मंजूर करने का पर्याप्त आधार नहीं माना। साथ ही आरोपियों को विवेचना में सहयोग करने और समान अपराध नहीं करने
की शर्त लगाई गई।
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