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फिटेनस प्रमाण पत्र के नाम पर जिला अस्पताल में चयनित शिक्षकों से वसूली
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पीलीभीत। चयनित शिक्षकों से जिला अस्पताल में फिटनेस प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर खुलकर वसूली की गई। बाहर दलाल हावी रहे तो भीतर डॉक्टर समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी रिश्वत वसूलते दिखाई दिए। रुपये न देने वालों को कोई न कोई कमी बताकर टाला जाता रहा। खास बात यह रही कि खुलकर वसूली का खेल चलता रहा। मगर अफसर चुप रहे।
बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार शिक्षक भर्ती के दूसरे चरण में चयनित की ज्वाइनिंग से पहले उनसे स्वास्थ्य प्रमाण पत्र मांगा गया था। प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला अस्पताल में भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी। पहले तो जिला अस्पताल में एक रुपये का पर्चा भी दस रुपये में जारी किया जा रहा था। इसके अलावा खून की जांच से लेकर आई टेस्ट तक के लिए सभी डॉक्टरों के चैंबर के बाहर स्वास्थ्य कर्मी वसूली करते नजर आए। इतना ही नहीं, बल्कि जिला अस्पताल के कुछ डॉक्टर तो स्वयं ही रुपये लेते दिखाई दिए।
आरोप है कि आवेदनकर्ता रुपये देने से मना कर रहा था तो उसकी जांच करने से ही मना कर दिया गया। कुछ लोगों ने इसके वीडियो भी बनाए और वायरल कर दिए। इस दौरान कोविड नियमों की भी धज्जियां उड़ाई गईं। अभ्यार्थियों का कहना था कि 100 रुपये में आंख की जांच, 200 रुपये में ईसीजी, 300 रुपये में खून की जांच, कोविड की रिपोर्ट, सर्जन और हड्डी रोग चिकित्सक की रिपोर्ट लगाई जा रही है।
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सीएमएस बोले-मेरे पास नहीं आई कोई शिकायत
- जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रतनपाल सिंह सुमन ने बताया कि जिला अस्पताल में वसूली की जानकारी उन्हें नहीं है। न ही उनके पास कोई शिकायत आई है।
मामले की कराई जाएगी जांच
वसूली करने का प्रकरण संज्ञान में आया है। सीएमएस को पत्र भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। अगर मामला सही पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार शिक्षक भर्ती के दूसरे चरण में चयनित की ज्वाइनिंग से पहले उनसे स्वास्थ्य प्रमाण पत्र मांगा गया था। प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला अस्पताल में भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी। पहले तो जिला अस्पताल में एक रुपये का पर्चा भी दस रुपये में जारी किया जा रहा था। इसके अलावा खून की जांच से लेकर आई टेस्ट तक के लिए सभी डॉक्टरों के चैंबर के बाहर स्वास्थ्य कर्मी वसूली करते नजर आए। इतना ही नहीं, बल्कि जिला अस्पताल के कुछ डॉक्टर तो स्वयं ही रुपये लेते दिखाई दिए।
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आरोप है कि आवेदनकर्ता रुपये देने से मना कर रहा था तो उसकी जांच करने से ही मना कर दिया गया। कुछ लोगों ने इसके वीडियो भी बनाए और वायरल कर दिए। इस दौरान कोविड नियमों की भी धज्जियां उड़ाई गईं। अभ्यार्थियों का कहना था कि 100 रुपये में आंख की जांच, 200 रुपये में ईसीजी, 300 रुपये में खून की जांच, कोविड की रिपोर्ट, सर्जन और हड्डी रोग चिकित्सक की रिपोर्ट लगाई जा रही है।
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सीएमएस बोले-मेरे पास नहीं आई कोई शिकायत
- जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. रतनपाल सिंह सुमन ने बताया कि जिला अस्पताल में वसूली की जानकारी उन्हें नहीं है। न ही उनके पास कोई शिकायत आई है।
मामले की कराई जाएगी जांच
वसूली करने का प्रकरण संज्ञान में आया है। सीएमएस को पत्र भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। अगर मामला सही पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ