{"_id":"59ad5ceb4f1c1b50738b5172","slug":"randomized-responsibilities-took-away-the-enthusiasm","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेतरतीब मिली जिम्मेदारियों ने छीन लिया उत्साह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेतरतीब मिली जिम्मेदारियों ने छीन लिया उत्साह
सुनील यादव पीलीभीत।
Updated Mon, 04 Sep 2017 07:43 PM IST
विज्ञापन
हैप्पी टीचर्स डे
- फोटो : Youthgiri
आदेशों की पोटली से दबे शिक्षक
शिक्षक दिवस पर विशेष
बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की व्यथा
दशकों पूर्व गांवों के प्राइमरी पाठशालाओं की साख हुआ करती थी। समाज के हर व्यक्ति का बच्चा उसी स्कूल में पढ़ता लिखता था। शिक्षक भी अपनी निष्ठा से लोगों के बीच प्रतिष्ठा हासिल करते थे। उस दौरान शिक्षकों के पास न तो मिड डे मील था और न पोलियो। न डीएम साहब का डर था और न ही विभाग के हाकिम का, लेकिन अब मामला उलट हो गया है। शिक्षकों को अब आदेशों की पूरी एक भरकम पोटली पहले से ही थमा दी गई है और बता दिया गया कि आज अमुक दिवस है और कल फलां मीटिंग होगी। ऐसे में शिक्षक औपचारिकताओं व गैर शैक्षणिक कार्यों के बीच उलझे हुए हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो इन बेतरतीब मिली जिम्मेदारियों ने उनकी काबिलियत व उत्साह को ही छीन लिया है।
आदेशों के चाबुक से बदलता गया शिक्षकों का स्वरूप
यदि जिले के स्कूलों पर गौर करें तो अधिकांश शिक्षक औपचारिकता निभाते देखे जा सकते हैं। स्कूलों में टीचर लर्निंग मैटेरियल की जगह अधिकारियों के आदेश साफ देखे जा सकते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता व माहौल सुधारने को एक के बाद एक आदेश जारी होते ही हैं, वहीं शासन व विभागीय स्तर पर भी स्कूलों में होने वाले आयोजनों के बाबत पूर्व में ही आदेश किए जा चुके हैं। माह के कई दिन तो इन्हीं औपचारिकताओं को पूरा करने में गुजर जाते हैं। बचा वक्त अधिकारियों को दिखाने में निकल जाता है। ऐसे में आदेशों के चाबुक से सहमे शिक्षकों को बच्चों के साथ स्वस्थ मन से वक्त गुजारने का मौका हीं नहीं मिलता। कुल मिलाकर देखा जाए तो शासन व विभाग ने शिक्षकों व हेडमास्टरों के विवेक पर कुछ नहीं छोड़ रखा है।
जिम्मेदारियों के बोझ ने निकाला दिवाला
एजूकेशन क्वालिटी निल, एमडीएम नहीं बना, स्कूल में सफाई नहीं जैसी अनेक कमियों के लिए शिक्षकों को कार्रवाई के नाम पर सूली पर चढ़ा दिया जाता है और जो बच जाते हैं वह वसूली का शिकार बन जाते हैं। मौजूदा दौर में शिक्षक स्कूलों में क्लर्क व चपरासी तक का कार्य करते आ रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का सपना पालकर नौकरी ज्वाइन करने वाले अधिकांश शिक्षक पढ़ाने के अलावा कई अन्य सारे काम भी कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिले के कई स्कूल शिक्षकों की कमी झेल रहे हैं। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। उन स्कूलों के शिक्षक तो मिड डे मील, खातों के संचालन, साप्ताहिक मीटिंग से लेकर बीआरसी पर होने वाली मंथली मीटिंगों आदि में ही में उलझे रहते हैं। ऐसी दशा में शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होना लाजिमी है।
विज्ञापन
इन कार्यों के बोझ तले दबे हैं शिक्षक
- स्कूल चलो अभियान
- मिड डे मील
- यूनिफार्म वितरण
- एसएमसी, पीटीए, ग्राम शिक्षा निधि बैठकें
- एसएमसी, ग्राम शिक्षा निधि, लोक शिक्षा समिति, मिड डे मील के खाते का संचालन
- बोर्ड परीक्षा, पोलियो, चुनाव ड्यूटी, रैपिड सर्वे
- साप्ताहिक व बीआरसी पर मासिक बैठक
- स्कूलों की रंगाई पुताई व रोजाना साफ सफाई आदि।
शिक्षक का मूल कार्य शिक्षण कार्य है, लेकिन उस पर तमाम अन्य जिम्मेदारियां भी है। शिक्षण कार्य के समय एमडीएम बनवाना आदि जैसे कई कार्य होते हैं। ऐसे में बेहतर शिक्षा दे पाना काफी मुश्किल भरा होता है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। इन सबके बावजूद शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को भली भांति निर्वहन करें ताकि शिक्षक की मर्यादा कायम रह सके।
गंगाराम, राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक
विज्ञापन
शिक्षक दिवस पर विशेष
बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की व्यथा
दशकों पूर्व गांवों के प्राइमरी पाठशालाओं की साख हुआ करती थी। समाज के हर व्यक्ति का बच्चा उसी स्कूल में पढ़ता लिखता था। शिक्षक भी अपनी निष्ठा से लोगों के बीच प्रतिष्ठा हासिल करते थे। उस दौरान शिक्षकों के पास न तो मिड डे मील था और न पोलियो। न डीएम साहब का डर था और न ही विभाग के हाकिम का, लेकिन अब मामला उलट हो गया है। शिक्षकों को अब आदेशों की पूरी एक भरकम पोटली पहले से ही थमा दी गई है और बता दिया गया कि आज अमुक दिवस है और कल फलां मीटिंग होगी। ऐसे में शिक्षक औपचारिकताओं व गैर शैक्षणिक कार्यों के बीच उलझे हुए हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो इन बेतरतीब मिली जिम्मेदारियों ने उनकी काबिलियत व उत्साह को ही छीन लिया है।
आदेशों के चाबुक से बदलता गया शिक्षकों का स्वरूप
यदि जिले के स्कूलों पर गौर करें तो अधिकांश शिक्षक औपचारिकता निभाते देखे जा सकते हैं। स्कूलों में टीचर लर्निंग मैटेरियल की जगह अधिकारियों के आदेश साफ देखे जा सकते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता व माहौल सुधारने को एक के बाद एक आदेश जारी होते ही हैं, वहीं शासन व विभागीय स्तर पर भी स्कूलों में होने वाले आयोजनों के बाबत पूर्व में ही आदेश किए जा चुके हैं। माह के कई दिन तो इन्हीं औपचारिकताओं को पूरा करने में गुजर जाते हैं। बचा वक्त अधिकारियों को दिखाने में निकल जाता है। ऐसे में आदेशों के चाबुक से सहमे शिक्षकों को बच्चों के साथ स्वस्थ मन से वक्त गुजारने का मौका हीं नहीं मिलता। कुल मिलाकर देखा जाए तो शासन व विभाग ने शिक्षकों व हेडमास्टरों के विवेक पर कुछ नहीं छोड़ रखा है।
विज्ञापन
जिम्मेदारियों के बोझ ने निकाला दिवाला
एजूकेशन क्वालिटी निल, एमडीएम नहीं बना, स्कूल में सफाई नहीं जैसी अनेक कमियों के लिए शिक्षकों को कार्रवाई के नाम पर सूली पर चढ़ा दिया जाता है और जो बच जाते हैं वह वसूली का शिकार बन जाते हैं। मौजूदा दौर में शिक्षक स्कूलों में क्लर्क व चपरासी तक का कार्य करते आ रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का सपना पालकर नौकरी ज्वाइन करने वाले अधिकांश शिक्षक पढ़ाने के अलावा कई अन्य सारे काम भी कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिले के कई स्कूल शिक्षकों की कमी झेल रहे हैं। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। उन स्कूलों के शिक्षक तो मिड डे मील, खातों के संचालन, साप्ताहिक मीटिंग से लेकर बीआरसी पर होने वाली मंथली मीटिंगों आदि में ही में उलझे रहते हैं। ऐसी दशा में शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होना लाजिमी है।
विज्ञापन
इन कार्यों के बोझ तले दबे हैं शिक्षक
- स्कूल चलो अभियान
- मिड डे मील
- यूनिफार्म वितरण
- एसएमसी, पीटीए, ग्राम शिक्षा निधि बैठकें
- एसएमसी, ग्राम शिक्षा निधि, लोक शिक्षा समिति, मिड डे मील के खाते का संचालन
- बोर्ड परीक्षा, पोलियो, चुनाव ड्यूटी, रैपिड सर्वे
- साप्ताहिक व बीआरसी पर मासिक बैठक
- स्कूलों की रंगाई पुताई व रोजाना साफ सफाई आदि।
शिक्षक का मूल कार्य शिक्षण कार्य है, लेकिन उस पर तमाम अन्य जिम्मेदारियां भी है। शिक्षण कार्य के समय एमडीएम बनवाना आदि जैसे कई कार्य होते हैं। ऐसे में बेहतर शिक्षा दे पाना काफी मुश्किल भरा होता है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। इन सबके बावजूद शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को भली भांति निर्वहन करें ताकि शिक्षक की मर्यादा कायम रह सके।
गंगाराम, राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक