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Pilibhit News: नेपाल में दाम ज्यादा और दूरी कम, सरकारी केंद्रों पर क्यों लाएं गेहूं
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शारदा नदी पर नाव के सहारे फसल को पार करते ग्रामीण। संवाद
जंगल के रास्तों से होती है तस्करी, डीएम के आदेश के बाद तस्करों में मची खलबली
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। कुछ ही दूरी पर नेपाल, जबरदस्त मांग और 2300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल दाम। ऐसे में कौन लाए गेहूं सरकारी केंद्रों पर। नेपाल से सटे गांवों से नेपाल को फसलों की खाद की तस्करी का खेल कई सालों से चल रहा है। अब डीएम के इस संबंध में सख्ती अपनाने से तस्करों में खलबली है।
यहां बता दें कि टाइगर रिजर्व के कंजरिया और रमनगरा घाट के रास्ते तस्कर और बिचौलिए फसल को नेपाल में ले जाकर बेचते हैं। जिले में जब गेहूं खरीद लक्ष्य के सापेक्ष काफी कम हुई तो डीएम ने इसका कारण पता लगाया। पता चला कि नेपाल बाॅर्डर पर गेहूं की तस्करी हो रही है। मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने एसडीएम को मामले में सख्ती बरतने के निर्देश दिए। ऐसे में अब सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। अफसर भी सीमा क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं।
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ऐसे होती है धान, गेहूं और खाद की तस्करी
शारदा नदी के पार का इलाका बीहड़ है। तस्करी के मामले में टाइगर रिजर्व के घाटों की अहम भूमिका रहती है। सूत्रों का कहना है कि घाटों के ठेकेदार नदी के इस पार अफसरों के अलावा अन्य विभागों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इसके बाद तस्करों और बिचौलियों से मिलकर धान, गेहूं और खाद को नेपाल ले जाकर बेच दिया जाता है। इस बार भी शारदा पार लगी अधिकांश गेहूं की फसल को नेपाल ले जाकर बेच दिया गया। फसली सीजन के साथ खाद की तस्करी भी हावी रहती है।
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नेपाल में मिलते हैं अच्छे दाम
जनपद से सटी नेपाल की सीमा है। खुली सीमा होने के साथ बीहड़ इलाका पड़ता है। जनपद की कलीनगर और पूरनपुर तहसील के अंतर्गत शारदा नदी के पार हजारों एकड़ जमीन पर फसल उगाई जाती है। नेपाल में गेहूं, धान, गन्ने की फसल ज्यादा नहीं होती। वहां इन फसलों का दाम भी 2300-2400 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाता है। शारदा पार के लोग दूरी से बचने के साथ अच्छा मुनाफा कमाने के लिए तस्करों के हाथों फसल बेच देते हैं। तस्कर मौका लगते ही ट्रैक्टर ट्राॅलियों से जंगल के रास्ते से नेपाल ले जाकर फसल को बेच देते हैं। ऐसे में यह फसल यहां सरकारी केंद्रों तक नहीं पहुंच पाती।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। कुछ ही दूरी पर नेपाल, जबरदस्त मांग और 2300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल दाम। ऐसे में कौन लाए गेहूं सरकारी केंद्रों पर। नेपाल से सटे गांवों से नेपाल को फसलों की खाद की तस्करी का खेल कई सालों से चल रहा है। अब डीएम के इस संबंध में सख्ती अपनाने से तस्करों में खलबली है।
यहां बता दें कि टाइगर रिजर्व के कंजरिया और रमनगरा घाट के रास्ते तस्कर और बिचौलिए फसल को नेपाल में ले जाकर बेचते हैं। जिले में जब गेहूं खरीद लक्ष्य के सापेक्ष काफी कम हुई तो डीएम ने इसका कारण पता लगाया। पता चला कि नेपाल बाॅर्डर पर गेहूं की तस्करी हो रही है। मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने एसडीएम को मामले में सख्ती बरतने के निर्देश दिए। ऐसे में अब सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। अफसर भी सीमा क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं।
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ऐसे होती है धान, गेहूं और खाद की तस्करी
शारदा नदी के पार का इलाका बीहड़ है। तस्करी के मामले में टाइगर रिजर्व के घाटों की अहम भूमिका रहती है। सूत्रों का कहना है कि घाटों के ठेकेदार नदी के इस पार अफसरों के अलावा अन्य विभागों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इसके बाद तस्करों और बिचौलियों से मिलकर धान, गेहूं और खाद को नेपाल ले जाकर बेच दिया जाता है। इस बार भी शारदा पार लगी अधिकांश गेहूं की फसल को नेपाल ले जाकर बेच दिया गया। फसली सीजन के साथ खाद की तस्करी भी हावी रहती है।
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नेपाल में मिलते हैं अच्छे दाम
जनपद से सटी नेपाल की सीमा है। खुली सीमा होने के साथ बीहड़ इलाका पड़ता है। जनपद की कलीनगर और पूरनपुर तहसील के अंतर्गत शारदा नदी के पार हजारों एकड़ जमीन पर फसल उगाई जाती है। नेपाल में गेहूं, धान, गन्ने की फसल ज्यादा नहीं होती। वहां इन फसलों का दाम भी 2300-2400 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाता है। शारदा पार के लोग दूरी से बचने के साथ अच्छा मुनाफा कमाने के लिए तस्करों के हाथों फसल बेच देते हैं। तस्कर मौका लगते ही ट्रैक्टर ट्राॅलियों से जंगल के रास्ते से नेपाल ले जाकर फसल को बेच देते हैं। ऐसे में यह फसल यहां सरकारी केंद्रों तक नहीं पहुंच पाती।