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Pilibhit News: पीटीआर के इको सेंसिटिव जोन पर अंतिम मुहर की तैयारी
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व का सिग्नेचर गेट।
- फोटो : Archive
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पीलीभीत। तराई के जंगलों, बाघों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के इको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने पीटीआर के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम अधिसूचना जारी करने के लिए अपनी संस्तुति दे दी है। अब मंत्रालय की अंतिम अधिसूचना जारी होते ही टाइगर रिजर्व के चारों ओर लगभग 575 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र विशेष पर्यावरणीय संरक्षण व्यवस्था के तहत आ जाएगा। इससे जंगल की सीमा से जुड़े 230 गांवों में पर्यावरणीय गतिविधियों की निगरानी और वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने फरवरी 2025 में रिजर्व की सीमा से दो किलोमीटर तक के क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र को भेजा था। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत अधिसूचित होने वाले इस क्षेत्र का उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्र के आसपास अनियंत्रित और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण रखते हुए विकास और संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना है।
प्रस्ताव पर विचार के दौरान केंद्रीय मंत्रालय ने कुछ तकनीकी आपत्तियां दर्ज की थीं। वन विभाग ने सभी बिंदुओं का विस्तृत जवाब और आवश्यक संशोधन कर दोबारा प्रस्ताव भेजा। इसके बाद ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर 90 दिन तक आमजन से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गईं। इस दौरान कुल चार आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनका नियमानुसार निस्तारण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई। हाल ही में नई दिल्ली में डायरेक्टर (इको सेंसिटिव जोन) की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति की बैठक हुई। बैठक में प्रस्ताव के पर्यावरणीय, तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। सभी पहलुओं पर संतोष व्यक्त करते हुए समिति ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम मंजूरी के लिए संस्तुति दे दी।
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अब केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से अंतिम अधिसूचना जारी होना शेष है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण कर रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी गई थी। विशेषज्ञ समिति ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम मंजूरी के लिए संस्तुति प्रदान कर दी है। इससे बाघों के कॉरिडोर को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी और स्थानीय ग्रामीणों के हितों का भी पूरा संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। संवाद
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575 वर्ग किमी क्षेत्र आएगा इको सेंसिटिव जोन में
पीटीआर का कुल संरक्षित क्षेत्र 730.2498 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 602.798 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र तथा 127.4518 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। इसके चारों ओर लगभग 575 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। इसकी सीमा संरक्षित वन क्षेत्र से शून्य से दो किलोमीटर तक निर्धारित की गई है। ईएसजेड लागू होने के बाद टाइगर रिजर्व से सटे 230 गांव इसकी परिधि में आ जाएंगे। इनमें सबसे अधिक 112 गांव माला रेंज के हैं। इसके अलावा बराही रेंज के 59, दियोरिया रेंज के 30, हरीपुर रेंज के 16 और महोफ रेंज के 13 गांव शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप गतिविधियों की निगरानी की जाएगी, जबकि ग्रामीणों की आजीविका और वैध अधिकारों को प्रभावित किए बिना संरक्षण व्यवस्था लागू होगी। भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उत्तर दिशा में नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा और उत्तराखंड की अंतरराज्यीय सीमा से लगे क्षेत्रों में जीरो ईएसजेड का प्रावधान रखा गया है।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने फरवरी 2025 में रिजर्व की सीमा से दो किलोमीटर तक के क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र को भेजा था। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत अधिसूचित होने वाले इस क्षेत्र का उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्र के आसपास अनियंत्रित और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण रखते हुए विकास और संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना है।
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प्रस्ताव पर विचार के दौरान केंद्रीय मंत्रालय ने कुछ तकनीकी आपत्तियां दर्ज की थीं। वन विभाग ने सभी बिंदुओं का विस्तृत जवाब और आवश्यक संशोधन कर दोबारा प्रस्ताव भेजा। इसके बाद ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर 90 दिन तक आमजन से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गईं। इस दौरान कुल चार आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनका नियमानुसार निस्तारण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई। हाल ही में नई दिल्ली में डायरेक्टर (इको सेंसिटिव जोन) की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति की बैठक हुई। बैठक में प्रस्ताव के पर्यावरणीय, तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। सभी पहलुओं पर संतोष व्यक्त करते हुए समिति ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम मंजूरी के लिए संस्तुति दे दी।
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अब केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से अंतिम अधिसूचना जारी होना शेष है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण कर रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी गई थी। विशेषज्ञ समिति ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम मंजूरी के लिए संस्तुति प्रदान कर दी है। इससे बाघों के कॉरिडोर को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी और स्थानीय ग्रामीणों के हितों का भी पूरा संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। संवाद
575 वर्ग किमी क्षेत्र आएगा इको सेंसिटिव जोन में
पीटीआर का कुल संरक्षित क्षेत्र 730.2498 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 602.798 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र तथा 127.4518 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। इसके चारों ओर लगभग 575 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। इसकी सीमा संरक्षित वन क्षेत्र से शून्य से दो किलोमीटर तक निर्धारित की गई है। ईएसजेड लागू होने के बाद टाइगर रिजर्व से सटे 230 गांव इसकी परिधि में आ जाएंगे। इनमें सबसे अधिक 112 गांव माला रेंज के हैं। इसके अलावा बराही रेंज के 59, दियोरिया रेंज के 30, हरीपुर रेंज के 16 और महोफ रेंज के 13 गांव शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप गतिविधियों की निगरानी की जाएगी, जबकि ग्रामीणों की आजीविका और वैध अधिकारों को प्रभावित किए बिना संरक्षण व्यवस्था लागू होगी। भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उत्तर दिशा में नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा और उत्तराखंड की अंतरराज्यीय सीमा से लगे क्षेत्रों में जीरो ईएसजेड का प्रावधान रखा गया है।