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कोरोना ने छीना गरीबों को घर मिलने का सपना..प्रधानमंत्री आवास निर्माण ठप
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पीलीभीत। प्रधानमंत्री आवास योजना में जब शहर की डालचंद निवासी फूलमती का आवास स्वीकृत हुआ तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। योजना में उन्हें पहली किस्त मिली तो उन्होंने अपना कच्चे मकान गिरा दिया। उसी स्थान पर प्रधानमंत्री आवास का पक्का मकान बनाना शुरू करा दिया। मगर उन्हें क्या पता था कि कोरोना उनके सपनों का चकनाचूर कर देगा। पहली किस्त के छह माह बीतने के बाद भी उन्हें दूसरी किस्त नहीं मिल सकी। अब वह पन्नी तानकर बरसात में पूरे परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं।
ऐसा केवल अकेली फूलमती के साथ ही नहीं हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी/ग्रामीण) के ऐसे हजारों लाभार्थी हैं, जिन्हें अब भी पीएम आवास की दूसरी और तीसरी किस्त मिलने का इंतजार है। इनमें से अधिकांश लाभार्थियों की हालत यह है कि किसी को एक किस्त मिली तो दूसरी नहीं। दूसरी मिली तो तीसरी नहीं। देश में जब कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ, तब से इन लाभार्थियों को सरकार की ओर से एक धेला भी नहीं मिला है। इन गरीब लाभार्थियों में कुछ ने मिली पहली किस्त से चौखट लेवल तक बने अधूरे मकान में घासफूस की छत डाल ली। मगर, बहुत से तो पन्नी की ही छत बनाकर किसी तरह गुजारा करने को मजबूर हैं। लॉकडाउन के बाद जब देश में अनलॉक-1 लागू हुआ तो इन लाभार्थियों को उम्मीद थी कि उन्हें अब सरकार जरूर पैसा देगी, मगर लंबा वक्त बीतने के बाद भी इनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। यह लाभार्थी अब बाकी किस्त पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं विभाग ने ऊपर से बजट न आने की बात कहकर टरका रहा है।
10 हजार से अधिक शहरी लाभार्थियों की अटकी किस्तें
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत गत वर्ष 20,687 लाभार्थियों के लिए आवास स्वीकृत हुए थे। इसमें मार्च से पहले 9147 आवासों का निर्माण पूरा हो गया था। शेष 10 हजार आवासों का निर्माण चल रहा था। मार्च में कोरोना की दस्तक देते ही लॉकडाउन लग गया। इससे लाभार्थियों की किस्तों पर भी ब्रेक लग गया। तबसे लेकर आज तक इन लाभार्थियों को अगली किस्तें नहीं मिल सकी हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में 123 लाभार्थियों के आवास अधूरे
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की स्थिति भी शहरी आवास योजना की तरह ही है। इसमें 2527 आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें 2417 आवासों का निर्माण तो पूरा हो गया। शेष आवासों का निर्माण किस्तों के अभाव में अधूरा पड़ा है। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना में 93 आवास स्वीकृत हुए थे। इनमें भी 80 आवासों का ही निर्माण पूरा हो सका है। शेष का निर्माण किस्तों के अभाव में अधूरा पड़ा हुआ है।
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत मेरा आवास नवंबर में स्वीकृत होने पर पहली किस्त मिली थी। उसके बाद आज तक कोई किस्त नहीं मिली। आवास आधा-अधूरा बना है। - गोपाल कनौजिया, लाभार्थी, मोहल्ला डालचंद
मुझे एक साल पहले 50 हजार रुपये किस्त के तौर पर मिले थे। उससे नींव भरने का काम करा दिया। इसके बाद कोई किस्त ही नहीं मिली। बरसात में घासफूस की छत के नीचे रहना पड़ रहा है। - छोटू, लाभार्थी, बिलसंडा
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में 470 लाभार्थियों को तीसरी किस्त देने की तैयारी चल रही है। बजट न होने के कारण लाभार्थियों के आवास अधूरे पड़े हैं। शासन से बजट मिलते ही इन्हें किस्तें जारी की जा सकेंगी। - अनामिका सक्सेना, परियोजना अधिकारी, डूडा
शासन से बजट न मिल पाने के कारण आवास के लाभार्थियों को अगली किस्तें नहीं दी जा सकी हैं। संभवत: जल्द ही बजट मिलते ही इन्हें धनराशि मुहैया कराई जाएगी, ताकि आवास निर्माण पूरा हो सके। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ
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ऐसा केवल अकेली फूलमती के साथ ही नहीं हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी/ग्रामीण) के ऐसे हजारों लाभार्थी हैं, जिन्हें अब भी पीएम आवास की दूसरी और तीसरी किस्त मिलने का इंतजार है। इनमें से अधिकांश लाभार्थियों की हालत यह है कि किसी को एक किस्त मिली तो दूसरी नहीं। दूसरी मिली तो तीसरी नहीं। देश में जब कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ, तब से इन लाभार्थियों को सरकार की ओर से एक धेला भी नहीं मिला है। इन गरीब लाभार्थियों में कुछ ने मिली पहली किस्त से चौखट लेवल तक बने अधूरे मकान में घासफूस की छत डाल ली। मगर, बहुत से तो पन्नी की ही छत बनाकर किसी तरह गुजारा करने को मजबूर हैं। लॉकडाउन के बाद जब देश में अनलॉक-1 लागू हुआ तो इन लाभार्थियों को उम्मीद थी कि उन्हें अब सरकार जरूर पैसा देगी, मगर लंबा वक्त बीतने के बाद भी इनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। यह लाभार्थी अब बाकी किस्त पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं विभाग ने ऊपर से बजट न आने की बात कहकर टरका रहा है।
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10 हजार से अधिक शहरी लाभार्थियों की अटकी किस्तें
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत गत वर्ष 20,687 लाभार्थियों के लिए आवास स्वीकृत हुए थे। इसमें मार्च से पहले 9147 आवासों का निर्माण पूरा हो गया था। शेष 10 हजार आवासों का निर्माण चल रहा था। मार्च में कोरोना की दस्तक देते ही लॉकडाउन लग गया। इससे लाभार्थियों की किस्तों पर भी ब्रेक लग गया। तबसे लेकर आज तक इन लाभार्थियों को अगली किस्तें नहीं मिल सकी हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र में 123 लाभार्थियों के आवास अधूरे
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की स्थिति भी शहरी आवास योजना की तरह ही है। इसमें 2527 आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें 2417 आवासों का निर्माण तो पूरा हो गया। शेष आवासों का निर्माण किस्तों के अभाव में अधूरा पड़ा है। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना में 93 आवास स्वीकृत हुए थे। इनमें भी 80 आवासों का ही निर्माण पूरा हो सका है। शेष का निर्माण किस्तों के अभाव में अधूरा पड़ा हुआ है।
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत मेरा आवास नवंबर में स्वीकृत होने पर पहली किस्त मिली थी। उसके बाद आज तक कोई किस्त नहीं मिली। आवास आधा-अधूरा बना है। - गोपाल कनौजिया, लाभार्थी, मोहल्ला डालचंद
मुझे एक साल पहले 50 हजार रुपये किस्त के तौर पर मिले थे। उससे नींव भरने का काम करा दिया। इसके बाद कोई किस्त ही नहीं मिली। बरसात में घासफूस की छत के नीचे रहना पड़ रहा है। - छोटू, लाभार्थी, बिलसंडा
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में 470 लाभार्थियों को तीसरी किस्त देने की तैयारी चल रही है। बजट न होने के कारण लाभार्थियों के आवास अधूरे पड़े हैं। शासन से बजट मिलते ही इन्हें किस्तें जारी की जा सकेंगी। - अनामिका सक्सेना, परियोजना अधिकारी, डूडा
शासन से बजट न मिल पाने के कारण आवास के लाभार्थियों को अगली किस्तें नहीं दी जा सकी हैं। संभवत: जल्द ही बजट मिलते ही इन्हें धनराशि मुहैया कराई जाएगी, ताकि आवास निर्माण पूरा हो सके। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ