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दस करोड़ की आतिशबाजी से फूटा प्रदूषण बम
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आतिशबाजी से निकलता धुंआ। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। दस करोड़ की आतिशबाजी ने जिले की हवा जहरीली कर दी। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूूआई) 430 तक पहुंच गया, जो दिवाली से एक दिन पहले तक 165 था। इसके अलावा वातावरण में मौजूद धूलकणों (पीएम-2.5, पीएम 10) की मात्रा भी दो से तीन गुना तक बढ़ गई। मंगलवार शाम तक एक्यूआई में कुछ सुधार हुआ।
दिवाली से पहले पीएम-2.5 की मात्रा 160 और पीएम-10 की मात्रा 320 माइक्रोमीटर तक रही। मंगलवार दोपहर बाद स्थिति में कुछ सुधार हुआ। एक्यूआई का स्तर 192 तक आ गया। वहीं पीएम-2.5 का स्तर 132 और पीएम-10 का स्तर 221 माइक्रोमीटर रहा।
अगर पिछले साल दिवाली की बात करें तो अधिकतम एक्यूूआई 440 रहा था। अगले दिन दोपहर को आंकड़ा 220 तक आ गया था। वहीं प्रदूषण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पीलीभीत में विभाग के स्तर से उपकरण नहीं लगाए गए हैं, न ही मॉनिटिंरग होती है। इसलिए यह सटीक आंकड़ा नहीं है। उपरोक्त आंकड़े निजी मोबाइल एप्लीकेशन पर मौजूद डाटा के अनुसार हैं।
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0 से 50 तक एक्यूआई माना जाता है अच्छा
तराई के अपने जिले में एक्यूूआई 100 से 120 रहता है। वैसे 0 से 50 तक एक्यूआई सामान्य माना जाता है। इसके अलावा 50 से 100 के बीच दिक्कत शुरू हो जाती है। 100 से 150 के बीच नुकसानदायक और 150 से 300 के बीच का स्तर गंभीर माना जाता है। इसके अलावा 300 से ऊपर अगर एक्यूआई है तो स्थिति खतरनाक श्रेेणी में आ जाती है।
पटाखों से निकलती हैं जहरीली गैसें, सेहत के लिए बेहद खतरनाक
पटाखों से कई खतरनाक गैसें निकलती हैं। इसमें सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, कॉर्बन मोनो ऑक्साइड और हेवी मेटल्स सल्फर, लेड, क्रोमियम, कोबाल्ट, मरकरी मैग्निशियम सभी के लिए खतरनाक है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर के बताते हैं कि यह गैसें स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक सबित हो सकती हैं। आंख, बल्ड प्रेशर, अस्थमा, शुगर, हृदय रोगियों के साथ गभर्वती महिलाओं को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कुछ दिन सुबह टहलने से करें परहेज
सुबह मौसम ठंडा रहता है। कोहरे और ओस का असर भी शुरू हो गया है। इस वजह से कार्बन के कण वायुमंडल के निचले स्तर पर रहते हैं। अगर आप सुबह टहलने निकलते हैं और खुली हवा में सांस लेते हैं तो कार्बन के ये कण ऑक्सीजन के साथ अपने शरीर में पहुंच जाते हैं। ये कण दमा के मरीजों के लिए बहुत खतरनाक होते हैं। ऐसे में कुछ दिन सुबह टहलने से परहेज करें।
पटाखों के शोर में धुआं हुई महंगाई
पिछली साल करीब छह करोड़ के पटाखे बिके थे, इस बार दस करोड़ से ज्यादा
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। दीपावली पर इस बार भी जमकर आतिशबाजी हुई। पटाखे महंगे जरूर थे लेकिन इसका कोई असर नजर नहीं आया। आधी रात तक आतिशबाजी होती रही। पटाखा कारोबारियों का कहना है कि इस बार जिले में दस करोड़ के पटाखे दीपावली पर फूंक दिए गए। स्काई शॉट और अनार की मांग ज्यादा रही।
शहर के रामलीला मैदान पर लगे पटाखा बाजार में इस बार 147 दुकानें तो जिले में करीब 500 दुकानें लगी थीं। दीपावली से एक दिन पहले ही दुकानों पर पटाखा बाजार में जबरदस्त भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी। दीपावली पर भी देर शाम तक पटाखों की खरीदारी होती रही। कारोबारी अजीम का कहना है कि पिछले साल छह करोड़ के आस पास कारोबार हुआ था। जबकि इस बार महंगाई होने के बाद भी करीब दस करोड़ के पटाखे बिके। महंगाई का आलम यह था कि 50 रुपये का स्काई शॉट इस बार 100 रुपये, 70 का पैकेट 110 रुपये, 80 रुपये का अनार 100 रुपये, 60 रुपये की चकरी 90 रुपये में बिकी। वहीं 12 से 28 फीसदी तक जीएसटी लगने के कारण पटाखे और महंगे हो गए।
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दिवाली से पहले पीएम-2.5 की मात्रा 160 और पीएम-10 की मात्रा 320 माइक्रोमीटर तक रही। मंगलवार दोपहर बाद स्थिति में कुछ सुधार हुआ। एक्यूआई का स्तर 192 तक आ गया। वहीं पीएम-2.5 का स्तर 132 और पीएम-10 का स्तर 221 माइक्रोमीटर रहा।
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अगर पिछले साल दिवाली की बात करें तो अधिकतम एक्यूूआई 440 रहा था। अगले दिन दोपहर को आंकड़ा 220 तक आ गया था। वहीं प्रदूषण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पीलीभीत में विभाग के स्तर से उपकरण नहीं लगाए गए हैं, न ही मॉनिटिंरग होती है। इसलिए यह सटीक आंकड़ा नहीं है। उपरोक्त आंकड़े निजी मोबाइल एप्लीकेशन पर मौजूद डाटा के अनुसार हैं।
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0 से 50 तक एक्यूआई माना जाता है अच्छा
तराई के अपने जिले में एक्यूूआई 100 से 120 रहता है। वैसे 0 से 50 तक एक्यूआई सामान्य माना जाता है। इसके अलावा 50 से 100 के बीच दिक्कत शुरू हो जाती है। 100 से 150 के बीच नुकसानदायक और 150 से 300 के बीच का स्तर गंभीर माना जाता है। इसके अलावा 300 से ऊपर अगर एक्यूआई है तो स्थिति खतरनाक श्रेेणी में आ जाती है।
पटाखों से निकलती हैं जहरीली गैसें, सेहत के लिए बेहद खतरनाक
पटाखों से कई खतरनाक गैसें निकलती हैं। इसमें सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, कॉर्बन मोनो ऑक्साइड और हेवी मेटल्स सल्फर, लेड, क्रोमियम, कोबाल्ट, मरकरी मैग्निशियम सभी के लिए खतरनाक है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर के बताते हैं कि यह गैसें स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक सबित हो सकती हैं। आंख, बल्ड प्रेशर, अस्थमा, शुगर, हृदय रोगियों के साथ गभर्वती महिलाओं को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कुछ दिन सुबह टहलने से करें परहेज
सुबह मौसम ठंडा रहता है। कोहरे और ओस का असर भी शुरू हो गया है। इस वजह से कार्बन के कण वायुमंडल के निचले स्तर पर रहते हैं। अगर आप सुबह टहलने निकलते हैं और खुली हवा में सांस लेते हैं तो कार्बन के ये कण ऑक्सीजन के साथ अपने शरीर में पहुंच जाते हैं। ये कण दमा के मरीजों के लिए बहुत खतरनाक होते हैं। ऐसे में कुछ दिन सुबह टहलने से परहेज करें।
पटाखों के शोर में धुआं हुई महंगाई
पिछली साल करीब छह करोड़ के पटाखे बिके थे, इस बार दस करोड़ से ज्यादा
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। दीपावली पर इस बार भी जमकर आतिशबाजी हुई। पटाखे महंगे जरूर थे लेकिन इसका कोई असर नजर नहीं आया। आधी रात तक आतिशबाजी होती रही। पटाखा कारोबारियों का कहना है कि इस बार जिले में दस करोड़ के पटाखे दीपावली पर फूंक दिए गए। स्काई शॉट और अनार की मांग ज्यादा रही।
शहर के रामलीला मैदान पर लगे पटाखा बाजार में इस बार 147 दुकानें तो जिले में करीब 500 दुकानें लगी थीं। दीपावली से एक दिन पहले ही दुकानों पर पटाखा बाजार में जबरदस्त भीड़ उमड़ना शुरू हो गई थी। दीपावली पर भी देर शाम तक पटाखों की खरीदारी होती रही। कारोबारी अजीम का कहना है कि पिछले साल छह करोड़ के आस पास कारोबार हुआ था। जबकि इस बार महंगाई होने के बाद भी करीब दस करोड़ के पटाखे बिके। महंगाई का आलम यह था कि 50 रुपये का स्काई शॉट इस बार 100 रुपये, 70 का पैकेट 110 रुपये, 80 रुपये का अनार 100 रुपये, 60 रुपये की चकरी 90 रुपये में बिकी। वहीं 12 से 28 फीसदी तक जीएसटी लगने के कारण पटाखे और महंगे हो गए।