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Pilibhit News: देशभर में कान्हा के धामों में गूंजेंगी पीलीभीत की बांसुरी

Sat, 20 Jun 2026 01:37 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:37 AM IST
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Pilibhit's flutes will resonate in shrines dedicated to Kanha across the country.
बांसुरी बनाए जाने के लिए रखा बांस। फाइल फोटो।
पीलीभीत। देशभर के मंदिरों में अब पीलीभीत की बांसुरी के सुर सुनाई देंगे। ओडीओपी से बांसुरी को नई पहचान मिली है। इससे पूर्व डीएम ज्ञानेंद्र सिंह की पहल से मथुरा के बांके बिहारी सहित कई अन्य प्रमुख मंदिरों में भी यहां की बांसुरी को भेजा जा चुका है। जल्द ही पीलीभीत में बनी बांसुरियों के मधुर सुर कान्हा के सभी धामों में गूंजेंगे।
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बांसुरी नगरी के नाम से पहचान बना चुके पीलीभीत की इस पारंपरिक कला को नई उड़ान देने के लिए जिला प्रशासन ने अनूठी पहल की है। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह की ओर से प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाधिकारियों को पीलीभीत की बांसुरी के साथ अनुरोध पत्र भेजा जा रहा है, ताकि स्थानीय मंदिरों और सांस्कृतिक आयोजनों में इसका अधिक से अधिक उपयोग हो सके। इस अभियान की शुरुआत श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से की गई है। बांके बिहारी मंदिर समेत अन्य प्रमुख मंदिरों में पीलीभीत की बांसुरियां भेजी गई हैं।
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इसके अलावा राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित सांवरिया सेठ मंदिर और राजसमंद के प्रसिद्ध नाथद्वारा मंदिर के लिए भी बांसुरियां रवाना की गई हैं। पीलीभीत की बांसुरी को एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल किए जाने के बाद इस उद्योग को नई पहचान मिली है। करीब दो सौ वर्षों से यहां तैयार हो रही बांसुरी आज देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी मधुर धुन बिखेर रही है। मांग बढ़ने से उत्पादन में भी लगातार इजाफा हुआ है और अब यह उद्योग जिले के लगभग 400 परिवारों के करीब एक हजार लोगों की आजीविका का आधार बन चुका है।
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असम से आता है खास बांस, सुरों की होती है बारीक साधना
बांसुरी निर्माण के लिए विशेष किस्म का बांस असम से मंगाया जाता है। इसके बाद धागा बांधने, रंगाई, छिद्र बनाने, सुर मिलाने, पॉलिश, सजावट और पैकिंग तक का पूरा काम स्थानीय कारीगर करते हैं। हारमोनियम के सुरों के अनुरूप बांसुरी के प्रत्येक छिद्र को बेहद सावधानी से तैयार किया जाता है, जिससे हर बांसुरी मधुर और शुद्ध स्वर दे सके।

16.6 फीट लंबी बांसुरी से बनाया था विश्व रिकॉर्ड
ओडीओपी योजना के बाद बांसुरी उद्योग को नई रफ्तार मिली है। कारीगर बताते हैं कि सरकारी प्रोत्साहन से बाजार का विस्तार हुआ है। पीलीभीत के शिल्पियों ने 16.6 फीट लंबी बांसुरी बनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान बनाया था। इससे पहले 11.6 फीट लंबी बांसुरी का रिकॉर्ड गुजरात के नाम था। यह उपलब्धि पीलीभीत की बांसुरी कला की वैश्विक पहचान बन चुकी है। संवाद

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एक जिला एक उत्पाद के तहत बांसुरी का चयन किया गया है। इस योजना के अंतर्गत जिले के 400 परिवार काम कर रहे हैं। काम बढ़ाने के लिए लगातार युवाओं को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।- आशीष गुप्ता, उपायुक्त उद्योग
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