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रोजमर्रा की चीजों के लिए तरस गए लोग
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Thu, 10 Nov 2016 12:04 AM IST
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रोजमर्रा की चीजों के लिए तरस गए लोग
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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केंद्र सरकार द्वारा पांच सौ व एक हजार के नोट एकाएक बंद कर देने से बुधवार को जिले भर में उथल पुथल रही। जानकारी न होने पर गांव से शहर आए लोगों को खुले रुपये न होने के चलते परेशान होना पड़ा। डॉक्टर की फीस और विभिन्न जांचों के लिए खुले रुपये न होने पर लोगों को भटकना पड़ा। वहीं दोपहर तक गैस वितरण कार्य भी प्रभावित रहा। पांच सौ और हजार रुपये का नोट देने पर गैस वाले ने सिलेंडर नहीं दिया। बड़े नोट बंद होने के बाद सबसे ज्यादा भीड़ पेट्रोल पंपों दिखी। इसको लेकर कुछ स्थानों पर झड़पें भी हुईं। मंडी में आए किसानों को भी धान खरीद को लेकर परेशान होना पड़ा। धान बिक्री के बाद किसी ने व्यापारियों से आश्वासन पर थोड़ा भुगतान लिया तो कोई बिना भुगतान के ही लौट गया। कुछ किसानों ने चेक से भुगतान लेकर फसल बेची। खरीदारी करने शहर आए लोगों को भी नोटों के चलन पर रोक होने के चलते भटकना पड़ा और कई बिना खरीदारी के ही लौट गए। इसके चलते बाजार में अन्य दिनों की अपेक्षा काफी सन्नाटा रहा जबकि कुछ लोगों ने चेक देकर खरीदारी की।
भटकते दिखे मरीज
पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने का सबसे ज्यादा खामियाजा मरीजों को झेलना पड़ा। मरीजों के साथ आए इलाज के लिए अच्छी खासी रकम लेकर आते थे जिसमें अधिकांश बड़े नोट थे लेकिन पांच सौ व एक हजार के नोट होने के कारण चिकित्सकों की फीस देने एवं विभिन्न प्रकार की जांचें कराने को उन्हें परेशान होना पड़ा। किसी तरह चिकित्सक की फीस दे दी थी जांच के खुले रुपये नहीं जुटे आदि अगर किसी तरह यह भी कर लिया तो मेडिकल स्टोर पर अटक गए।
नोट बंद होने से परेशानी बढ़ी, फिर भी की सराहना
पांच सौ व एक हजार के नोट बंद करने से लोग परेशान तो दिखे लेकिन इनमें से अधिकांश निर्णय की सराहना करते भी दिखे। लोग बोले अचानक बंद होने से दिक्कत होना लाजमी है लेकिन देश के विकास के लिए जरूरी कदम है। वहीं कुछ ने जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया।
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पेट्रोलपंप की तरह गैस वितरण को भी बंदी से अलग रखा गया है। बृहस्पतिवार को भी गैस की डिलीवरी की जाएगी। इसमें पांच सौ के नोट लिए जाएंगे लेकिन उसके ऊपर के 50-60 रुपये के लिए पांच सौ व हजार का नोट नहीं खुलाया जाएगा।
प्रेमपाल गंगवार, जिलाध्यक्ष एलजीपी वितरक संघ
उधार बेचना पड़ा धान
धान लेकर मंडी पहुंचे गजरौला के जसवीर सिंह ने बताया कि आढ़ती ने उन्हें बड़े नोट बंद होने की समस्या बताई थी। इस पर उधार में फसल बेच दी। जरूरी काम के लिए कुछ रुपये लिए हैं।
अच्छा कदम, लेकिन पहले बताना चाहिए
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केंद्र सरकार द्वारा पांच सौ व एक हजार के नोट एकाएक बंद कर देने से बुधवार को जिले भर में उथल पुथल रही। जानकारी न होने पर गांव से शहर आए लोगों को खुले रुपये न होने के चलते परेशान होना पड़ा। डॉक्टर की फीस और विभिन्न जांचों के लिए खुले रुपये न होने पर लोगों को भटकना पड़ा। वहीं दोपहर तक गैस वितरण कार्य भी प्रभावित रहा। पांच सौ और हजार रुपये का नोट देने पर गैस वाले ने सिलेंडर नहीं दिया। बड़े नोट बंद होने के बाद सबसे ज्यादा भीड़ पेट्रोल पंपों दिखी। इसको लेकर कुछ स्थानों पर झड़पें भी हुईं। मंडी में आए किसानों को भी धान खरीद को लेकर परेशान होना पड़ा। धान बिक्री के बाद किसी ने व्यापारियों से आश्वासन पर थोड़ा भुगतान लिया तो कोई बिना भुगतान के ही लौट गया। कुछ किसानों ने चेक से भुगतान लेकर फसल बेची। खरीदारी करने शहर आए लोगों को भी नोटों के चलन पर रोक होने के चलते भटकना पड़ा और कई बिना खरीदारी के ही लौट गए। इसके चलते बाजार में अन्य दिनों की अपेक्षा काफी सन्नाटा रहा जबकि कुछ लोगों ने चेक देकर खरीदारी की।
भटकते दिखे मरीज
पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने का सबसे ज्यादा खामियाजा मरीजों को झेलना पड़ा। मरीजों के साथ आए इलाज के लिए अच्छी खासी रकम लेकर आते थे जिसमें अधिकांश बड़े नोट थे लेकिन पांच सौ व एक हजार के नोट होने के कारण चिकित्सकों की फीस देने एवं विभिन्न प्रकार की जांचें कराने को उन्हें परेशान होना पड़ा। किसी तरह चिकित्सक की फीस दे दी थी जांच के खुले रुपये नहीं जुटे आदि अगर किसी तरह यह भी कर लिया तो मेडिकल स्टोर पर अटक गए।
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नोट बंद होने से परेशानी बढ़ी, फिर भी की सराहना
पांच सौ व एक हजार के नोट बंद करने से लोग परेशान तो दिखे लेकिन इनमें से अधिकांश निर्णय की सराहना करते भी दिखे। लोग बोले अचानक बंद होने से दिक्कत होना लाजमी है लेकिन देश के विकास के लिए जरूरी कदम है। वहीं कुछ ने जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया।
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पेट्रोलपंप की तरह गैस वितरण को भी बंदी से अलग रखा गया है। बृहस्पतिवार को भी गैस की डिलीवरी की जाएगी। इसमें पांच सौ के नोट लिए जाएंगे लेकिन उसके ऊपर के 50-60 रुपये के लिए पांच सौ व हजार का नोट नहीं खुलाया जाएगा।
प्रेमपाल गंगवार, जिलाध्यक्ष एलजीपी वितरक संघ
उधार बेचना पड़ा धान
धान लेकर मंडी पहुंचे गजरौला के जसवीर सिंह ने बताया कि आढ़ती ने उन्हें बड़े नोट बंद होने की समस्या बताई थी। इस पर उधार में फसल बेच दी। जरूरी काम के लिए कुछ रुपये लिए हैं।
अच्छा कदम, लेकिन पहले बताना चाहिए